: पूर्व मंत्री पवन ने बजट पर दी तीखी प्रतिक्रिया
Thu, May 26, 2022
कहा,यह बजट किसान मजदूर गरीब छात्र नौजवान युवाओं के लिए निराशाजनक
अयोध्या। पूर्व मंत्री तेज नारायण पांडे पवन ने भाजपा सरकार के बजट पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त किया श्री पांडे ने कहा यह बजट किसान मजदूर गरीब छात्र नौजवान युवाओं के लिए निराशाजनक है श्री पांडे ने कहा भाजपा सरकार मैं महंगाई इस कदर बढ़ गई है की गरीबों को दो वक्त का रोटी भी मिलना मुश्किल है नौजवान पढ़ लिख कर नौकरी के लिए आस लगाए बैठे लेकिन उन्हें नौकरी नहीं मिल पा रही किसान को उनके फसल का उचित मूल्य भी नहीं मिल पा रहा है प्रदेश में व्याप्त महंगाई और भ्रष्टाचार से आम जनता त्रस्त है इस भीषण गर्मी में बिजली की आपूर्ति भी सही ढंग से नहीं हो पा रही है श्री पांडे ने कहा यह बजट देखकर ऐसा लग रहा है इसमें आम जनता खासकर गरीबों के लिए कुछ भी नहीं है l
: श्री रामलला देवस्थान के प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव में शामिल होगें सीएम योगी
Wed, May 25, 2022
उत्तर और दक्षिण का सांस्कृतिक संबंध आत्मा और परमात्मा की तरह अविछिन्न है: डा राघवाचार्य
अयोध्या में दिखाई देगी दक्षिण और उत्तर भारत की संस्कृति
राम जन्मभूमि से सटे एक एकड़ भूमि पर द्रविण शैली में बने रहें ऐतिहासिक श्री रामलला देवस्थानम मंदिर में भगवान श्री रामलला के साथ माता सीता व भरत, लक्ष्मण और शत्रुहन के मूर्ति का होगा भव्य प्राणप्रतिष्ठा
अयोध्या। मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम जन्म भूमि से सटे दिव्य भव्य द्रविण शैली में बन रहें श्री रामलला देवस्थानम मंदिर के प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव में बतौर मुख्य अतिथि के रुप में सूबे के मुखिया योगी आदित्यना 1 जून को शामिल होगें। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के हाथों राम मंदिर निर्माण के लिए गर्भगृह पर पहली शिला ही नही रखा जाएगी बल्कि राम जन्मभूमि परिसर से सटे रामकोट में बन रहें दक्षिण भारतीय शैली में तैयार किये गया ऐतिहासिक श्री रामलला सदन देवस्थानम मंदिर में भगवान श्री राम माता सीता व तीनों भाइयों के मूर्ति की भी प्राणप्रतिष्ठा करेंगे।
श्रीराम लला देवस्थान सेवा ट्रस्ट रामकोट द्धारा 5 दिवसीय आयोजित भव्य प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव में देश के कोने कोने से संत धर्माचार्य आ रहे है। यह महोत्सव अयोध्या के लिए बड़ा ही ऐतिहासिक होने जा रहा है। दक्षिण परम्परा से वैदिक आचार्यों द्धारा विधिवत पूजन के साथ प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव होगा। 31 मई को कार्यक्रम का शुभारंभ कलश यात्रा के साथ होगा। कार्यक्रम में 1 जून को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के हाथों भगवान के मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा होगी। इसका समापन 4 जून को विशाल भंडारे के साथ होगा।
अयोध्या में बन रहे भगवान श्रीराम के भव्य मंदिर निर्माण कार्य किया जा रहा है। मंदिर के फर्श को बनाये जाने के साथ मंदिर निर्माण का भी कार्य शुरू किया जा रहा है। तो वहीं राम मंदिर के साथ उत्तर और दक्षिण भारत के सांस्कृतिक जुड़ाव भी परिपुष्ट हो रही है। रामजन्मभूमि के कुछ ही फासले पर श्रीराम लला देवस्थानम् मंदिर द्रविड़ शैली में निर्माण किया गया है। राम मंदिर न केवल भारत बल्कि समूची दुनिया को जोडऩे में सेतु का काम भी कर रहा है। ऐसी धार्मिक मान्यता है कि यह स्थान प्राचीन और ऐतिहासिक है श्वेता युग में भगवान श्री राम और उनके भाइयों के जन्म होने के बाद इसी स्थान पर उनका नामकरण संस्कार संपन्न कराया गया था इसलिए आज भी इस स्थान को देवस्थान के नाम से जाना जाता है। राममंदिर संग परिपुष्ट हो रहा उत्तर-दक्षिण का जुड़ाव अयोध्या विविध संस्कृतियों का संगम भी बन रही है। अमूमन, उत्तर भारत के मंदिर नागर शैली पर बनते हैं। लेकिन, रामजन्मभूमि परिसर से कुछ फासले पर दक्षिण भारत के प्रतिनिधि मंंदिर निर्माण कला द्रविड़ शैली में श्रीरामलला देवस्थानम् मंदिर बनाया गया है। कार्यक्रम में संयोजक श्रीराम लला देवस्थान सेवा ट्रस्ट रामकोट के अध्यक्ष जगद्गुरु रामानुजाचार्य स्वामी डा राघवाचार्य जी महाराज ने बताया कि श्री रामलला देवस्थान मंदिर का प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव बड़े ही धूमधाम के साथ मनाया जायेगा। इस महोत्सव में पूरे देश से साधु संत शामिल होगे। मंदिर से जुड़े शिष्य परिकर भी बड़ी संख्या में आ रहे है। प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव में पूजा पद्धति पूरी तरह से दक्षिण के विशिष्ट आचार्यों द्धारा होगा।देवस्थानम् के अध्यक्ष जगद्गुरु रामानुजाचार्य स्वामी डा राघवाचार्य कहते हैं, यह मंदिर उत्तर और दक्षिण भारत को जोडऩे में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। क्योंकि, उत्तर और दक्षिण का सांस्कृतिक संबंध आत्मा और परमात्मा की तरह अविछिन्न है। उत्तर में यदि भगवान राम का जन्म हुआ तो दक्षिण में भक्ति का। इस तरह दोनों एक दूसरे के पूरक हैं।
: संतों के सानिध्य से ही राष्ट्र और समाज का कल्याण सम्भव: रत्नेशप्रपन्नाचार्य
Wed, May 25, 2022
रामानुजाचार्य जी ने श्रीमद्वाल्मीकीयरामायण के चतुर्थ दिवस कहा, संत-सत्पुरुषों ने अपनी विद्वता और तपस्या से भारतीय संस्कृति और सनातन धर्म की पताका सम्पूर्ण विश्व में फहराई
विश्व का सच्चा मित्र वह है जो अच्छे लोगों को आपस में जोड़े ।श्रीराम की पहली यात्रा सभी अच्छे लोगों को आपस में जोड़ने की थी।श्रीराम के कारण ही वशिष्ठ और विश्वामित्र एक हो गये।अयोध्या और मिथिला एक हो गयी। उक्त बातें जगद्गुरू रामानुजाचार्य रत्नेशप्रपन्नाचार्य ने कही। रामानुजाचार्य जी नंदीग्राम,भरतकुंड पर श्रीमद्वाल्मीकीयरामायण कथा की अमृत वर्षा कर रहें है। कथा के चतुर्थ दिवस व्यासपीठ से कथा का मर्म समझाते हुए रत्नेशप्रपन्नाचार्य जी ने कहा कि महर्षि गौतम और अहल्या आपस में पुन: गये।विश्वामित्र जी ने भगवान राम से कहा कि अब जनकपुर की यात्रा कीजिए। यह जनकपुर की यात्रा क्या है ? यदि इस प्रश्न पर विचार करें तो हमें यह स्पष्ट प्रतीत होगा कि यह ज्ञान-मार्ग की यात्रा है । महाराज जनक उस समय के सर्वश्रेष्ठ ज्ञानी थे।उनके लिए वाक्य भी यही कहा गया कि वे ज्ञानियों में सिरमौर हैं। और यदि ज्ञान के पथ पर चलेंगे तो सबसे पहला काम है अहिल्या का उद्धार। अहिल्या पत्थर बनी हुई है। गोस्वामीजी कहते हैं कि यह बुद्धि ही अहिल्या है। इसका अभिप्राय है कि जब तक बुद्धि, जड़ से चेतन नहीं होगी तब तक हम ज्ञान मार्ग में आगे बढ़ने में समर्थ नहीं होंगे।भगवान के द्वारा अहिल्या-उद्धार का अभिप्राय है कि विषयासक्ति के कारण जो बुद्धि जड़ हो चुकी थी, उसको श्रीराघवेन्द्र ने चेतन किया। रामानुजाचार्य जी ने कहा कि संतों के सानिध्य से ही राष्ट्र और समाज का कल्याण सम्भव है। संत संगति से ही व्यक्ति के उत्तम चरित्र का निर्माण होने से वे संस्कारवान बनते हैं। संतों का सानिध्य समाज को सन्मार्ग दिखाता है। संत-सत्पुरुषों ने अपनी विद्वता और तपस्या से भारतीय संस्कृति और सनातन धर्म की पताका सम्पूर्ण विश्व में फहराई है। भारत की धरती प्राचीन काल से ही संतों की तपोभूमि है। संत ही समाज को सही मार्ग दिखाते हैं। इसलिए तपस्वियों के बताये मार्ग का अनुसरण करने से समाज में समरसता एवं भाईचारा बना रहता है।उन्होंने कहा कि सन्तों का सानिध्य समाज को एक सूत्र में बांधे रखता है। यह युगधर्म है। विचारों में मतभिन्नता हो सकती है, परन्तु सबका लक्ष्य और उद्देश्य एक ही है। सभी देश हित में कार्य कर रहे हैं। सन्त हमेशा दूसरों की भलाई कर परोपकार करते हैं। सन्तों के जीवन से प्रेरणा लेकर जीवन को और श्रेष्ठ बनाया जा सकता है।कथा में मणिराम दास छावनी के महंत कमलनयन दास, संत परमात्मा दास सहित बड़ी संख्या में कथा प्रेमी मौजूद रहें।