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27वीं पुण्यतिथि श्रद्धापूर्वक मनाई गई,संत-महंतों ने दी भावभीनी श्रद्धांजलि, सेवा और साधना के आदर्शों को अपनाने का आह्वान

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शिद्दत से शिरोधार्य हुए पं. अखिलेश्वर दास महाराज : 27वीं पुण्यतिथि श्रद्धापूर्वक मनाई गई,संत-महंतों ने दी भावभीनी श्रद्धांजलि, सेवा और साधना के आदर्शों को अपनाने का आह्वान

शिद्दत से शिरोधार्य हुए पं. अखिलेश्वर दास महाराज

27वीं पुण्यतिथि श्रद्धापूर्वक मनाई गई,संत-महंतों ने दी भावभीनी श्रद्धांजलि, सेवा और साधना के आदर्शों को अपनाने का आह्वान

अयोध्या। रामनगरी के श्रीराम कुंज कथा मंडप, रामघाट में पंडित अखिलेश्वर दास महाराज की 27वीं पुण्यतिथि श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाई गई। इस अवसर पर आयोजित महोत्सव की अध्यक्षता पं. अखिलेश्वर दास सेवा ट्रस्ट के अध्यक्ष आचार्य महंत डॉ. रामानंद दास महाराज ने की। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में संत-महंत, धर्माचार्य और श्रद्धालु शामिल हुए।

रविवार को मंदिर परिसर में श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया, जहां उपस्थित संत-महंतों एवं धर्माचार्यों ने आचार्य श्री की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें नमन किया। इस दौरान संतों ने उनके कृतित्व और व्यक्तित्व पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए उनके जीवन से प्रेरणा लेने का संदेश दिया। कार्यक्रम में आए भक्तजनों ने प्रसाद ग्रहण कर पुण्य लाभ अर्जित किया।

दशरथ राजमहल बड़ा स्थान के पीठाधीश्वर बिंदुगाद्याचार्य स्वामी देवेंद्रप्रसादाचार्य महाराज ने श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि उन्हें भी आचार्य श्री के दर्शन और वाणी सुनने का सौभाग्य प्राप्त हुआ है। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में महापुरुषों की वाणी सुनने का अवसर कम मिलता जा रहा है, ऐसे में उनके बताए मार्ग पर चलना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने सेवा को परम धर्म बताते हुए सभी से सेवा व्रत अपनाने का आह्वान किया। साथ ही उन्होंने कहा कि राष्ट्र के समक्ष चल रहे संकटों का समाधान महापुरुषों की कृपा और उनके आदर्शों के पालन से ही संभव है।

कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे महंत डॉ. रामानंद दास महाराज ने कहा कि आश्रम में सद्गुरुदेव की पुण्यतिथि को श्रद्धापूर्वक मनाया गया। उन्होंने बताया कि अयोध्या धाम के विभिन्न मठ-मंदिरों से संत-महंत और धर्माचार्य इस अवसर पर उपस्थित हुए और गुरुदेव की प्रतिमा पर श्रद्धासुमन अर्पित कर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी।

महंत डॉ. रामानंद दास ने आगे कहा कि सद्गुरुदेव महाराज एक महान संत, गौसेवी और अद्वितीय प्रतिभा के धनी थे। वे भजनानंदी संत थे और सदैव भजन-साधना में लीन रहते थे। उनका स्वभाव अत्यंत सरल और सहज था, जो उनके व्यक्तित्व में स्पष्ट झलकता था। उन्होंने बताया कि वर्तमान में आश्रम में ठाकुरजी की सेवा के साथ-साथ गौसेवा और संत सेवा का कार्य सुचारु रूप से संचालित हो रहा है तथा सभी पर्व-त्योहार परंपरागत रूप से मनाए जा रहे हैं।

इस अवसर पर लक्ष्मण किला के महंत मैथिलीरमण शरण, खाक चौक के श्रीमहंत बृजमोहन दास, श्रीमहंत मुरली दास, संकट मोचन सेना के अध्यक्ष महंत संजय दास महाराज, श्रीराम बल्लभाकुंज के अधिकारी राजकुमार दास, श्रीअर्जुनद्वाराचार्य जगद्गुरु स्वामी कृपालु रामभूषण देवाचार्य, महंत मनीष दास, महंत राजू दास और महंत अयोध्या दास सहित अन्य संत-महंतों ने भी अपने वाक्यमयी पुष्प अर्पित कर आचार्य श्री को श्रद्धांजलि दी।

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