Tuesday 1st of September 2026

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भक्ति की अविरल धारा में बही रामनगरी, कलश यात्रा से श्री सियपिय मिलन महोत्सव का शुभारंभ

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संत परंपरा,भक्ति और अध्यात्म की त्रिवेणी देखी अवध बिहारी कुंज में : भक्ति की अविरल धारा में बही रामनगरी, कलश यात्रा से श्री सियपिय मिलन महोत्सव का शुभारंभ

संत परंपरा,भक्ति और अध्यात्म की त्रिवेणी देखी अवध बिहारी कुंज में

भक्ति की अविरल धारा में बही रामनगरी, कलश यात्रा से श्री सियपिय मिलन महोत्सव का शुभारंभ

मां सरयू का विधिवत पूजन-अर्चन के साथ दुग्धाभिषेक के बाद 108 गज लंबी चुनरी अर्पित की गई

अयोध्या। संत परंपरा, भक्ति और अध्यात्म की त्रिवेणी में सोमवार को रामनगरी सराबोर नजर आई। श्री अवध बिहारी कुंज में श्रीमद्गुरु अग्रपीठाधीश्वर रैवासा धाम के साकेतवासी स्वामी डॉ. राघवाचार्य वेदांतीजी महाराज के द्वितीय साकेत प्रयाणोत्सव के उपलक्ष्य में नौ दिवसीय श्री सियपिय मिलन महोत्सव का शुभारंभ भव्य कलश यात्रा के साथ हुआ। कलश यात्रा में बड़ी संख्या में संत-महंत, वैदिक विद्वान और श्रद्धालु शामिल हुए। भक्ति गीतों और जयघोष से रामनगरी का वातावरण आध्यात्मिक ऊर्जा से ओतप्रोत हो उठा।श्रीमहामंडलेश्वर हरिकृष्णदास ग्वालिया बाबा के संयोजन तथा श्री अवध बिहारी कुंज के श्रीश्री 1008 महामंडलेश्वर डॉ. गणेशदासजी महाराज के सानिध्य में आयोजित महोत्सव की कलश यात्रा रथ और बैंड-बाजे के साथ मां सरयू के पावन तट पर पहुंची। यहां संतों और श्रद्धालुओं ने वैदिक मंत्रोच्चार के बीच मां सरयू का विधिवत पूजन-अर्चन किया। दुग्धाभिषेक के बाद मां सरयू को 108 गज लंबी चुनरी अर्पित की गई। सैकड़ों वैदिक विद्वानों ने मंत्रोच्चार कर वातावरण को भक्तिरस से भर दिया।

वरुण आवाहन के पश्चात माता-बहनों ने सरयू जल से भरे कलश धारण किए और यात्रा पुन: प्रारंभ हुई। लता चौक, श्रृंगारहाट और अशर्फी भवन होते हुए कलश यात्रा श्री अवध बिहारी कुंज पहुंची, जहां विधि-विधान से कलशों का पूजन किया गया। इसके साथ ही नौ दिवसीय श्रीराम कथा का शुभारंभ संतों की उपस्थिति में हुआ।व्यास पीठ से कथा का शुभारंभ करते हुए महामंडलेश्वर डॉ. गणेशदासजी महाराज ने श्रीराम कथा की महिमा का वर्णन किया। उन्होंने कहा कि श्रीराम कथा केवल श्रवण का विषय नहीं, बल्कि जीवन को मर्यादा और आदर्श के पथ पर ले जाने का माध्यम है। जो व्यक्ति भगवान श्रीराम के चरित्र को अपने जीवन में धारण करता है, उसके जीवन में सद्गुणों का उदय होता है और उसका सर्वांगीण कल्याण होता है।

श्रीराम कथा प्रतिदिन दोपहर तीन से शाम सात बजे तक होगी। कथा के साथ प्रतिदिन संतों का आशीर्वचन भी श्रद्धालुओं को प्राप्त होगा। प्रतिदिन दोपहर 12 बजे संतों और भक्तों के लिए प्रसाद की व्यवस्था रहेगी। आठ सितंबर को संत सम्मेलन आयोजित किया जाएगा। इसमें देशभर से विद्वान संत और महात्मा पहुंचकर अपने आशीर्वचनों से श्रद्धालुओं को अभिसिंचित करेंगे।महोत्सव को सफल बनाने में श्रीमहामंडलेश्वर रामबिहारीदास, महंत गंगादास, महंत देवादास सहित समस्त शिष्य एवं भक्तगण जुटे हैं।

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