संत परम्परा की अनमोल कड़ी थे करतलिया बाबा : शिद्दत से मनाया गया संस्थापक आचार्य की 40वीं पुण्यतिथि समारोह
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Mon, Feb 2, 2026
संत परम्परा की अनमोल कड़ी थे करतलिया बाबा
शिद्दत से मनाया गया संस्थापक आचार्य की 40वीं पुण्यतिथि समारोह
अयोध्या। रामनगरी में शिद्दत से शिरोधार्य हुए करतलिया बाबा।मां सरयू के पावन तट पर सुशोभित करतलिया बाबा आश्रम के संस्थापक आचार्य करतलिया बाबा की 40 वीं पुण्यतिथि बड़े ही श्रद्धा भाव के साथ मनाई गई। करतलिया बाबा सिद्ध भजनानंदी संत थे और वह सेवा में ही प्रभु श्रीराम को देखते थे। सरयू तट पर उनका निवास होने के कारण यहां गरीबों असहायों और अयोध्या में आने वाले गरीब श्रद्धालु उनके पास आया करते थे और वह अपने भजन के साथ साथ अयोध्या में आने वाले सभी श्रद्धालुओं में प्रभु श्री राम को ही देखते थे और अतिथि देवो भव के भाव से उनकी सेवा करते थे। उनके आश्रम से कोई भी व्यक्ति कभी भी भूखा और निराश नहीं गया है। वह अयोध्या के सिद्ध संतों में माने जाते थे और निरंतर श्री सीताराम नाम का जप ताली बजाकर करते रहते थे यही कारण है कि उनको अयोध्या के संत और श्रद्धालु करतलिया बाबा के नाम से ही जानते थे।
करतलिया बाबा के 40 वीं पुण्यतिथि पर अयोध्या के संतो महंतों ने पुष्पांजलि अर्पित कर उनको याद किया।
धर्म सम्राट श्रीमहंत ज्ञानदास महाराज उत्तराधिकारी व संकट मोचन सेना अध्यक्ष महंत संजय दास जी महाराज ने कहा कि करतलिया बाबा संत परम्परा की अनमोल कड़ी थी।उन्होंने पुष्पांजलि अर्पित करते हुए कहा की करतलिया बाबा सेवा की प्रतिमूर्ति थे और सेवा में ही अपने प्रभु को तलाश करते थे यही कारण है कि इस आश्रम में आज भी उनके आशीर्वाद से निरंतर सेवा चल रही है और चलती ही रहेगी। रसिक पीठाधीश्वर श्री महंत जन्मेजय शरण जी ने कहा कि करतलिया बाबा साधुता की प्रतिमूर्ति थे। बाबा मां सरयू की गोद में रहकर अयोध्या में आने वाले श्रद्धालुओं संतो असहयोग गरीबों और गौ माता की सेवा करते रहते थे सेवा के साथ-साथ उनका निरंतर सीताराम नाम जप कभी नहीं रुकता था और लोगों को सेवा का ही उपदेश देते थे। आए हुए संतों का करतलिया आश्रम के पीठाधीश्वर महंत बाल योगी रामदास महाराज ने स्वागत किया और कहां कि जैसे बाबा लोगों की सेवा करते थे। उनके ही आशीर्वाद से आश्रम में संत सेवा असहाय सेवा गरीब सेवा गौ सेवा मां सरयू की आरती निरंतर चलती रहेगी। 40वीं पुण्यतिथि समारोह में सुबह आचार्य श्री के मूर्ति का पंचामृत अभिषेक वैदिक आचार्यों द्धारा किया गया इसके बाद अखंड पाठ का समापन हुआ। मंदिर में संतो द्धारा वाक्यमयी पुष्पांजलि अर्पित किया गया। पुण्यतिथि समारोह का समापन वृहद भंडारे के साथ हुआ। आये हुए अतिथियों का स्वागत मंदिर के महंत बालयोगी रामदास ने परमपरागत तरीकें से किया। इस मौके पर रसिक पीठाधीश्वर महंत जन्मेजय शरण, महंत संजय दास, महंत राजेश पहलवान, श्रीमहंत बृजमोहन दास, महंत रामकुमार दास, महंत सीताराम दास, जगद्गुरु परमहंस आचार्य,महंत अयोध्या दास, महंत छविराम दास, महंत विनोद दास, महंत कन्हैया दास, पुजारी रमेश दास,पहलवान मनीराम दास, महंत डा जयराम दास, पूर्व मंत्री तेज नारायण पाण्डेय पवन, आनंद सेन यादव, संजय यादव, इंद्र पाल यादव, राम बक्श यादव, रवि यादव सहित अयोध्या के संत धर्माचार्य व करतलिया मंदिर से जुड़े शिष्य परिकर मौजूद रहें।
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