Wednesday 2nd of September 2026

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श्री अवध बिहारी कुंज में अग्रपीठाधीश्वर स्वामी डॉ. राघवाचार्य वेदांतीजी के द्वितीय साकेतोत्सव के उपलक्ष्य में आयोजित नौ

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श्रीरामचरितमानस केवल कथा का ग्रंथ नहीं, बल्कि आदर्श जीवन जीने की : श्री अवध बिहारी कुंज में अग्रपीठाधीश्वर स्वामी डॉ. राघवाचार्य वेदांतीजी के द्वितीय साकेतोत्सव के उपलक्ष्य में आयोजित नौ

श्रीरामचरितमानस केवल कथा का ग्रंथ नहीं, बल्कि आदर्श जीवन जीने की प्रेरणा देने वाला प्रकाशस्तंभ 

श्री अवध बिहारी कुंज में अग्रपीठाधीश्वर स्वामी डॉ. राघवाचार्य वेदांतीजी के द्वितीय साकेतोत्सव के उपलक्ष्य में आयोजित नौ दिवसीय सियपिय मिलन महोत्सव हो रहा

अयोध्या। भजन-स्मरण के साथ सत्य, धर्म और निष्ठा से किए गए कर्म मनुष्य को निरंतर उन्नति के मार्ग पर ले जाते हैं। धन अर्जित करना बुरा नहीं, बल्कि उसे सत्य और धर्म के मार्ग से अर्जित कर परिवार के पालन-पोषण के साथ परमार्थ में लगाना ही जीवन की वास्तविक सार्थकता है। यह विचार श्री अवध बिहारी कुंज के पीठाधीश्वर श्रीश्री 1008 महामंडलेश्वर डॉ. गणेशदासजी महाराज ने व्यक्त किए।वे श्री अवध बिहारी कुंज में श्रीमद्गुरु अग्रपीठाधीश्वर रैवासा धाम के साकेतवासी स्वामी डॉ. राघवाचार्य वेदांतीजी महाराज के द्वितीय साकेतोत्सव के उपलक्ष्य में आयोजित नौ दिवसीय श्री सियपिय मिलन महोत्सव एवं श्रीराम कथा में श्रद्धालुओं को संबोधित कर रहे थे। आयोजन श्रीमहामंडलेश्वर हरिकृष्णदास ग्वालिया बाबा के सानिध्य में चल रहा है।महामंडलेश्वर ने कहा कि श्रीरामचरितमानस केवल कथा का ग्रंथ नहीं, बल्कि आदर्श जीवन जीने की प्रेरणा देने वाला प्रकाशस्तंभ है। प्रभु श्रीराम ने अपने जीवन में सत्य, निष्ठा और धर्म की स्थापना के साथ गो-ब्राह्मण एवं विद्यार्थियों की रक्षा का संकल्प निभाया। माता-पिता की आज्ञा को सर्वोपरि मानते हुए उन्होंने भाइयों के साथ मर्यादा, त्याग और कर्तव्य का अनुपम आदर्श प्रस्तुत किया।उन्होंने कहा कि रामकथा सुनने का उद्देश्य केवल कथा श्रवण तक सीमित नहीं होना चाहिए। भगवान श्रीराम के चरित्र और आदर्शों को जीवन में आत्मसात करना ही कथा की वास्तविक सार्थकता है। जो व्यक्ति प्रभु के आदर्शों को अपने आचरण में उतार लेता है, उसका जीवन स्वयं समाज और परिवार के लिए कल्याणकारी बन जाता है।

उन्होंने श्रद्धालुओं से सत्य, धर्म और निष्ठा के मार्ग पर चलने तथा अर्जित धन का सदुपयोग करने का आह्वान किया। आयोजन में प्रतिदिन कथा के उपरांत आरती हुई और संतों-भक्तों को प्रसाद वितरित किया गया। नौ दिवसीय महोत्सव का समापन आठ सितंबर को संत सम्मेलन के साथ होगा।

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