पीएम मोदी को चाय पिलाने वालीं मीरा मांझी पर कर्ज का बोझ, अब छिपकर रहने : तीन लाख के बैंक ऋण की किस्त चुकाने को दूसरों से उधार लेने का दावा, फूल बेचने का काम बंद; बीमार पति और तीन बच्चों की
admin
Thu, Oct 29, 2026
पीएम मोदी को चाय पिलाने वालीं मीरा मांझी पर कर्ज का बोझ, अब छिपकर रहने की नौबत
तीन लाख के बैंक ऋण की किस्त चुकाने को दूसरों से उधार लेने का दावा, फूल बेचने का काम बंद; बीमार पति और तीन बच्चों की जिम्मेदारी से बढ़ी मुश्किलें
आमदनी घटी तो किस्तें चुकाना हुआ मुश्किल, बैंककर्मियों के रोज घर पहुंचने से बच्चों में डर; दूसरे के घर छिपने को मजबूर होने का दावा
अयोध्या। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को घर पर चाय पिलाने वालीं मीरा मांझी आज आर्थिक तंगी से जूझने का दावा कर रही हैं। तीन लाख रुपये का बैंक कर्ज, बीमार पति और तीन बच्चों की जिम्मेदारी के बीच परिवार का खर्च चलाना मुश्किल हो गया है। मीरा का कहना है कि नाव से पर्याप्त कमाई नहीं हो रही, फूल बेचने का काम भी बंद हो चुका है। बैंक की किस्तें चुकाने के लिए उन्हें दूसरों से उधार लेना पड़ रहा है। बकाया वसूली के लिए बैंक कर्मचारियों के रोज घर पहुंचने से बच्चे सहम जाते हैं। हालात ऐसे हैं कि उन्हें दूसरे के घर में छिपकर रहना पड़ता है।
उम्मीदें जगीं, मुश्किलें बरकरार
30 दिसंबर 2023 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अयोध्या में मीरा मांझी के घर पहुंचकर चाय पी थी। मुलाकात के बाद उनका परिवार देशभर में चर्चा में आया। उम्मीद थी कि परिवार की आजीविका बेहतर होगी, लेकिन मीरा के मुताबिक, आर्थिक परेशानियां कम नहीं हुईं।
फूल बेचने का काम भी छूटा
मीरा पहले घाट पर फूल बेचकर परिवार का खर्च चलाती थीं। उनका आरोप है कि फूल बेचने की जगह के बदले पांच हजार रुपये की मांग की जाती थी। शिकायत के बावजूद समाधान नहीं हुआ और उन्हें काम बंद करना पड़ा। इससे परिवार की आमदनी का एक बड़ा सहारा छिन गया।
तीन लाख का कर्ज, किस्त चुकाना मुश्किल
मीरा के मुताबिक, नाव से रोजगार की इच्छा जताने के बाद डूडा के माध्यम से केनरा बैंक से तीन लाख रुपये का ऋण मिला। मगर नाव से होने वाली कमाई इतनी नहीं है कि घर का खर्च और बैंक की किस्तें दोनों संभल सकें। परिवार की जरूरतें पूरी करने के लिए पहले से उधार लेना पड़ रहा है। पति की बीमारी और बच्चों की परवरिश ने संकट और बढ़ा दिया है।
वसूली के दबाव से सहमे बच्चे
मीरा का आरोप है कि बैंक कर्मचारी बकाया किस्तों के लिए रोज घर पहुंचते हैं। उनके आने से बच्चे डर जाते हैं। इसी वजह से उन्हें दूसरे के घर में छिपकर रहना पड़ता है। परिवार के सामने अब रोजमर्रा का खर्च चलाने और कर्ज चुकाने, दोनों की चुनौती है।
प्रधानमंत्री से मुलाकात के बाद सुर्खियों में आया यह परिवार आज आजीविका के संकट से जूझने का दावा कर रहा है। मीरा की परेशानी ने स्वरोजगार की वास्तविक कमाई और कर्ज की किस्तें चुकाने की क्षमता पर सवाल खड़े किए हैं। अब देखना होगा कि परिवार की आर्थिक मुश्किलों को दूर करने के लिए कोई ठोस मदद मिलती है या नहीं।
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