: सद्गुरु कबीर के विचारों को आत्मसात करने की जरूरत: अरविंद
Sun, Oct 13, 2024
अयोध्या। कबीर मठ जियनपुर महाेबरा बाजार के संस्थापक सद्गुरु रामसूरत साहेब एवं उदार साहेब की पुण्य स्मृति में चल रहे तीन दिवसीय सांप्रदायिक साैहार्द कबीर मेला का रविवार को समापन हुआ। समापन सत्र को संबाेधित करते हुए मुख्य अतिथि पूर्वांचल विकास बाेर्ड के सदस्य बाैद्ध अरविंद सिंह पटेल ने कहा कि हमें सद्गुरु कबीर के विचारों काे आत्मसात करने की जरूरत है। उनका उपदेश मानव-मानव एक समान का था। उन्होंने सद्भावना का संदेश दिया। कबीर का सांप्रदायिक सौहार्द देश-विदेश में एकता-अखंडता स्थापित कर रहा है। श्रीकबीर धर्म मंदिर सेवा समिति जियनपुर कबीर मठ अयोध्या के कार्यवाहक अध्यक्ष महंत उमाशंकर दास ने कहा कि कबीर मठ में तीन दिवसीय सांप्रदायिक साैहार्द कबीर मेला का समापन किया गया। प्रतिदिन सुबह बीजक पाठ, उसके बाद विचार गाेष्ठी और भजन संध्या का कार्यक्रम आयोजित हुआ। सांप्रदायिक साैहार्द कबीर मेला सन् 2005 से मठ में चल रहा है। यह मेला का 19वां वर्ष रहा है। जाे कबीर मठ के संस्थापक सद्गुरु रामसूरत साहेब एवं उदार साहेब की पुण्य स्मृति में प्रतिवर्ष आयाेजित हाेता है। कबीर मेले ने पूरे देश-दुनिया में सांप्रदायिक सौहार्द एवं एकता-अखंडता का संदेश दिया। गाेष्ठी में नरसिंह साहेब, निर्भय दास, राधेश्याम दास ने भी अपने विचार व्यक्त किए।
संचालन श्रीकबीर धर्म मंदिर सेवा समिति जियनपुर अयोध्या के कार्यवाहक मंत्री संत विवेक ब्रह्मचारी ने किया।
इससे पहले मुख्य अतिथि समेत अन्य ने ब्रह्मलीन सदगुरु रामसूरत साहेब और उदार साहेब के चित्रपट पर श्रद्धासुमन अर्पित कर नमन किया। कबीर मठ जियनपुर के कार्यवाहक अध्यक्ष महंत उमाशंकर दास द्वारा माल्यार्पण कर मुख्य अतिथि का स्वागत किया गया। आकाशवाणी गाेरखपुर के प्रख्यात भजन गायक रामप्रसाद साहेब ने अपने भजनाें से सांप्रदायिक साैहार्द कबीर मेला की महफिल सजा दी। इस अवसर कबीर मंदिर सूरत गुजरात के महंत देवेन्द्र साहेब, महंत रामप्रकाश दास, पूर्व डीसीएफ चेयरमैन बस्ती रामशंकर निराला, जिपं सदस्य बस्ती राजबहादुर वर्मा, सांसद प्रतिनिधि एवं जनशिक्षण संस्थान के डायरेक्टर इं. मनाेज वर्मा, एडवोकेट वीरेंद्र यादव, डॉ. अजय कुमार, डॉ. दिलीप सिंह, साध्वी ज्याेति पांडेय, जाेखू यादव, रविंद्र दास, हेमंत दास, युवराज दास, रामलाल दास, भुवनेश्वर दास, राधेश्याम दास, नरसिंह दास, अजीत दास, भानुप्रताप वर्मा इंटर कालेज हनुमत नगर के प्राचार्य निर्मल वर्मा, अनूप जायसवाल, शिवदास पटेल, बृजेश वर्मा, विजय चाैधरी, एडवोकेट सर्वेश सक्सेना व याेगेंद्र वर्मा, पूर्व प्रधान गुरचरन यादव, शेषनाग, रामसजन चाैधरी आदि माैजूद रहे।
: बिना डरे बिना भाई के समाज को एक करने का काम करते रहना चाहिए- संत परीक्षा साहेब
Sun, Oct 13, 2024
कबीर धाम मंदिर में चल रहे तीन दिवसीय सत्संग समारोह का हुआ समापन
अयोध्या।कबीर धर्म मंदिर जियनपुर के संस्थापक सद्गुरु रामसूरत साहेब की पुण्य स्मृति में तीन दिवसीय सत्संग समारोह का हुआ समापन समापन सत्र की अध्यक्षता रामसूरत साहेब के उत्तराधिकारी एवं कबीर की परंपरा के प्रख्यात उपदेशक संत परीक्षा साहेब ने किया और बताया कि अगर मध्यकाल में सदगुरु कबीर का प्रादुर्भाव ना हुआ होता तो वर्तमान भारत की स्थिति और खराब हो जाती शायद हम और टुकड़ों में बट जाते क्योंकि जब हम बृहद भारत की कल्पना करते हैं तब हमें मालूम होना चाहिए, कि हमारे भारत के कितने भूभाग हमसे अलग हो गए और इसका मूल कारण था जातियों में बंटना। जब हमारा भारत धर्म संप्रदाय जाति के घोर जाल में फंसा हुआ था उसे समय सदगुरु कबीर ने इन सभी मिथकों तोड़ने के लिए संघर्ष किया और देश को बचाया और हम ऐसे संघर्षशील सदगुरु कबीर के अनुयाई हैं हमको हमेशा उनके पद चिन्हों पर चलते हुए बिना डरे बिना भाई के समाज को एक करने का काम करते रहना चाहिए।
संत कबीर की जन्मस्थली से पधारे संत प्रेम साहेब ने बताया कि हमारा कर्तव्य है कि जो हमारे इष्ट है सद्गुरु कबीर साहेब उन्होंने जाति और कट्टर पंथ की आलोचना करते हुए पूरा जीवन संघर्ष किया आप कल्पना करिए की मध्यकाल में कबीर का जन्म काशी मे हुआ और काशी में रहकर के उन्होंने सब मार्ग का रास्ता नहीं छोड़ा रूढ़ियों पर कुठारा घात करते रहे जो लोग कबीर को मुस्लिम कहते हैं वह कबीर को समझ ही नहीं पाए, सगुण उपासक राम के अनुयाई भी सदगुरु कबीर साहब के विचारों को सुनते हैं और अमल करते। उन्होंने कहा कि हम ऐसे सदगुरु कबीर के अनुयाई हैं कि हमें जाति से ऊपर उठकर समाज को जोड़ने का कार्य करते रहना है। अगर सदगुरु कबीर मध्य काल में ना आए होते तो शायद भारत की स्थिति भी अन्य देशों जैसी होती। उन्होंने कहा कि हमारा कर्तव्य है कि हम कबीर के विचारों को जन-जन तक पहुंचाएं और समय की मांग है की सदगुरु कबीर को सभी को जानना होगा। विवेक साहेब ने बताया कि जब तक अंदर की आंख नहीं खोलेंगे तब तक मंजिल प्राप्त नहीं हो सकती और साधु का कार्य है लोगों के सोए हुए आंख को खोलना निरर्थक विचार को खत्म करना और जब तक विवेक का जागरण नहीं होगा तब तक निरर्थक विचार आते रहेंगे।
कार्यक्रम के संयोजक धर्म प्रकाश साहेब ने बताया कि सतगुरु रामसूरत साहेब अयोध्या में मठ की स्थापना सेवा के लिए किया था वैसे ही सेवा परीक्षा साहेब के निर्देशन में चल रही है लेकिन वर्तमान में कुछ लोग मंदिर की संपत्ति जो अब करोड़ों करोड़ों की हो गई है हड़प कर बेचना चाहते हैं विवाद पैदा किए हैं, मैंने तो संकल्प लिया है की रामसूरत साहेब ने जिस उद्देश्य के लिए मठ की स्थापना की थी अपने जीवन भर उसी रास्ते पर चलेंगे और मठ की सुरक्षा करेंगे आप लोगों को भी मठ के बारे में चिंता करने की आवश्यकता है। अंत में उन्होंने सभी अतिथियों का आभार व्यक्त किया।निष्ठा साहेब बाराबंकी, संजीवन साहेब कटिहार बिहार, रतन साहेब इटावा उत्तर प्रदेश,कसार साहेब रामपुर दिल्ली, विचार साहेब नवापारा छत्तीसगढ़, अचल साहेब बड़ौदा गुजरात, मुक्तिशरण साहेब धमतरी छत्तीसगढ़, घनश्याम साहब मंदौर छत्तीसगढ़, सत्यपाल साहेब राजस्थान, रहस्य साहेब कोटा राजस्थान ने भी अपने विचार व्यक्त किया। कार्यक्रम का समापन सदगुरु कबीर के पूजन से हुआ। इस तीन दिवसीय कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश छत्तीसगढ़ बिहार गुजरात राजस्थान मध्य प्रदेश सहित पूरे भारत के लोग उपस्थित हो करके सदगुरु कबीर के वचनों को सुने और पालन करने का संकल्प लिया।अचिंत दास, दुःख समन दास, सरल दास, विवेक शरण दास, विनय शरण दास ने अतिथियों का स्वागत सत्कार किया।
: शारदीय नवरात्र की पूर्व संध्या पर गाजे बाजे के साथ निकली कलश यात्रा
Thu, Oct 3, 2024
24 वर्षों से शक्ति वाहिनी के तत्वाधान में निकाली जा रही है यात्रा
अयोध्या। शारदीय नवरात्र की पूर्व संध्या पर बुधवार को शक्तिवाहिनी के संयोजन में हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी सरयू तट से वरुण आह्वान के साथ भव्य कलश यात्रा गाजे बाजे के साथ निकाली गई। मां के जयकारों के साथ शक्ति वाहिनी की अगुवाई में निकली यात्रा सरयू तट से शुरू होकर नगर के प्रमुख मार्गों से होती हुई छोटी देवकाली मंदिर पहुंची। यात्रा का संयोजन केंद्रीय दुर्गापूजा व रामलीला समन्वय समिति तथा शक्ति वाहिनी के संयुक्त संयोजन से किया गया। यात्रा नयाघाट, बाबू बाजार, श्रृंगारहाट, हनुमानगगढ़ी, हरिद्वारी बाजार होती हुई छोटी देवकाली मंदिर पहुंची। यात्रा का आचार्य पीठ तिवारी मंदिर के सामने महापौर महंत गिरीशपति त्रिपाठी और उनकी धर्मपत्नी श्रीमती राजलक्ष्मी त्रिपाठी ने माता जी की आरती कि और बताया कि माता का अनुष्ठान प्रतिपदा को शुभ मुहूर्त में करना चाहिए और विसर्जन दशमी तिथि को ही करना चाहिए यही शास्त्रों का मत है। माता रानी के यात्रा का दर्जनों स्थानों पर स्वागत हुआ और लोगों ने पुष्प वर्षा की। केंद्रीय समिति के संयोजक महंत धनुषधारी शुक्ला ने बताया कि पिछले 24 वर्षों से यह यात्रा अनवरत नवरात्रि के पूर्व संध्या पर निकाली जाती है। अध्यक्ष रमापति पांडे ने बताया कलश यात्रा सनातन परंपरा का एक अंग है जिसमें कोई अनुष्ठान प्रारंभ करने से पहले हम किसी पवित्र नदी से जल भरते है। नवरात्रि प्रारंभ के पूर्व मां सरयू के जल का पूजन करके कलश में भरकर अपने अपने घरों मे मां की स्थापना पूजन करेंगी। शक्ति वाहिनी प्रमुख बिंदु सिंह ने बताया कि बड़े ही उत्साह के साथ माताएं बहने माता की कलश यात्रा में शामिल होती हैं और यही कलश स्थापित करके 9 दिन तक पूजा करती है। उन्होंने सभी बहनों का आभार व्यक्त किया।दुर्गापूजा समिति के प्रवक्ता भानुप्रताप सिंह ने बताया कि बुधवार से शारदीय नवरात्र प्रारंभ हो रहा है। अयोध्या धाम में 57 स्थान पर प्रतिमा बैठेगी 19 स्थान पर अस्थाई पूजा स्थल है कल 76 स्थान पर नवरात्रि की प्रतिपदा से पूजन प्रारंभ हो जाएगा। शास्त्री नगर में श्याम सुंदर कसेरा, श्रृंगार हाट में ज्योति गुप्ता, रंजीतगुप्ता, सुंदर जायसवाल, कपिलगंज में पूर्व पार्षद नंदलाल गुप्ता युवराज मोदनवाल, हनुमानगढ़ी पर सुरेश मोदनवाल जितेंद्र मोदनवाल बैजनाथ मोदनवाल ओमकार मोदनवाल के नेतृत्व में कुछ वर्ष हुई और प्रसाद वितरण किया गया । देवकली पर प्रसाद वितरण कर यात्रा का समापन हुआ।अशोक शास्त्री ने वरुण पूजन कराया। , वन्दना त्रिपाठी, पार्वती कौशल, दया मिश्रा, आंचल यादव, प्रभादेवी, अनीता सिंह, अंजू सिंह, गरिमा आचार्य, उर्मिला तिवारी,अनीता, इस्रावती, रंजनसागर, कलश यात्रा में प्रभारी दीपचंद्र राही, देवर्षिराम त्रिपाठी ,सुरक्षा प्रभारी पंकज गुप्ता, मंगल गुप्ता, अनिल सहित सैकड़ों भाई बहनों ने भाग लिया।