: वेद वेदांत का परिपक्व फल है श्रीमद् भागवत कथा: बजरंग दास
Mon, Oct 21, 2024
आचार्य पीठ श्री लक्ष्मणकिला में श्रीमद्भागवत कथा की बह रही रसधार
श्रीमद्भागवत कथा आचार्य पीठ श्रीलक्ष्मणकिला के युवा अधिकारी सूर्यप्रकाश शरण के संयोजन में हो रहा
अयोध्या। रामनगरी के प्रसिद्ध आचार्य पीठ श्री लक्ष्मणकिला में कार्तिक मास के पावन अवसर पर सप्त दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा की अमृत वर्षा हो रही है। कथा के तृतीय दिवस राष्ट्रीय कथाव्यास एवं श्रीबाला जी सेवा धाम नागौर, राजस्थान पीठाधीश्वर महामंडलेश्वर आचार्य बजरंग दास महाराज ने कथा का विस्तार करते हुए कहा 5 वर्षीय अबोध बालक ध्रुव की तरह अविरल भक्ति जब साधक के मन में व्याप्त हो जाती है तब वह साधक भगवत धाम को प्राप्त करता है। महामंडलेश्वर आचार्य बजरंग दास जी ने पापी अजामिल की कथा का श्रवण कराते हुए कहा जन्म से ही पाप कर्म में लीन अजामिल प्रभु भक्ति में लीन संत जनों की कृपा पाकर के भगवान के धाम को प्राप्त करता है। वेद वेदांत का परिपक्व फल है श्रीमद् भागवत कथा। मनुष्य जन्म को प्राप्त करके प्रभु के बताए हुए मार्ग का अनुसरण करके सभी साधक भक्तजन सभी सुखों को प्राप्त कर सकते हैं।स्वामीजी ने कहा कि हिरण्यकश्यप ने घोर तप किया ब्रह्मा जी से वरदान भी प्राप्त किया लेकिन साधक भक्तों के मन में यदि अभिमान व्याप्त हो जाता है तो वह साधक भक्त भी भक्ति मार्ग से अलग हो जाता है और पाप कर्म में लीन हो जाता है। हिरण्यकशिपु के पुत्र बालक प्रहलाद मां के गर्भ में ही देवर्षि नारद से नवधा भक्ति का श्रवण करने के प्रभाव से अनेकों यातनाएं पिता से पाकर भी भक्ति मार्ग को नहीं छोड़ते हैं। प्रह्लाद जी की दृढ़ भक्ति को देख कर भगवान भक्त प्रहलाद को बचाने नरसिंह रूप धारण करके दुष्ट हिरण्यकशिपु का वध करते हैं। सुखदेव जी महाराज से कथा का श्रवण करके राजेंद्र परीक्षित जी का विश्वास और भी दृढ़ हो गया। श्रीमद्भागवत कथा आचार्य पीठ श्रीलक्ष्मणकिला के युवा अधिकारी सूर्यप्रकाश शरण महाराज के संयोजन में हो रहा है। इससे पहले कथा के यजमान ने व्यासपीठ की दिव्य आरती उतारी। अंत में कथा विश्राम पर प्रसाद वितरित हुआ। इस अवसर पर हजारों भक्तजनों ने कथा का श्रवण कर अपना जीवन धन्य बनाया।
: श्रीराम रक्षा स्तोत्र का पाठ करने से श्रीराम की कृपा मिलती है: महंत कमलनयनदास
Sun, Oct 20, 2024
श्रीराम सनातन संस्कृति के मानबिंदु हैं: महंत राजू दास
अंतरराष्ट्रीय ख्याति के ज्योतिषाचार्य डा. राजानंद शास्त्री द्वारा तैयार श्रीरामलला राम रक्षा यंत्र का हुआ विमोचन
सवा लाख रामरक्षा स्तोत्र पाठ से यंत्र को अभिमंत्रित कर सनातनियों तक पहुंचाने का लक्ष्य:डा. राजानंद शास्त्री
अयोध्या। श्रीराम रक्षा स्तोत्र का पाठ करने से श्रीराम की कृपा मिलती है। श्रीराम की कृपा यदि मिल जाए, तो बजरंगबली की कृपा अपने आप मिल जाती है। यह उद्गार हैं, मणिरामदास जी की छावनी के उत्तराधिकारी महंत कमलनयनदास के। वह वशिष्ठ चौक स्थित अरुंधति भवन के सभागार में अंतरराष्ट्रीय ख्याति के ज्योतिषाचार्य डा. राजानंद शास्त्री द्वारा तैयार श्रीरामलला राम रक्षा यंत्र का विमोचन कर रहे थे। इस अवसर पर कमलनयनदास ने अयोध्या की गौरव यात्रा का भी स्मरण कराया। कहा, अयोध्या ने सदियों तक संताप झेला है, अब अयोध्या में नित्य उत्सव हो रहा है। राममंदिर निर्माण से अयोध्या का वैभव लौटा है। इस दौरान महंत कमलनयनदास सहित महंत छविरामदास, महंत धर्मदास, आचार्य सतीश वैदिक समेत अन्य संतों का सम्मान किया गया।
समारोह का संचालन प्रख्यात हिंदूवादी नेता एवं हनुमानगढ़ी से जुड़े - महंत राजूदास ने कहा कि श्रीराम सनातन संस्कृति के मानबिंदु हैं। राम की संस्कृति, अयोध्या की संस्कृति को जन-जन तक पहुंचाने की जरूरत है।
डा. राजानंद शास्त्री ने कहा कि रामलला की प्राण प्रतिष्ठा की खुशी में अयोध्या में पांच दिनों तक सवा लाख राम मंत्रों का जाप किया जाएगा। इसमें 1100 वैदिक आचार्य पाठ करेंगे। उन्होंने बताया कि रामरक्षा यंत्र का प्राचीन शास्त्रों में बहुत ही उल्लेख है। यह प्रभु श्रीराम के भक्त-सेवक और हनुमान की उपासना करने वालों के लिए सुरक्षा कवच के स्वरूप में होता है। इसके ऊपर अंकित जो दिशाएं हैं, वह वास्तु दोष से भी हम लोगों की सुरक्षा करती हैं। नवनिर्मित मंदिर में रामलला की रामरक्षा यंत्र के ऊपर ही प्रतिष्ठा हुई है। इसी महत्व को समझते हुए सवा लाख रामरक्षा स्तोत्र पाठ से इस यंत्र को अभिमंत्रित करके प्रत्येक सनातनियों तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए हनुमानगढ़ी डाट काम को यह कार्य दिया गया है। यह रामरक्षा यंत्र या कवच मिलना तब शुरू होगा, जब सवा लाख रामरक्षा स्तोत्र के पाठ पूर्ण हो जाएंगे।
: उदारता सरलता के साक्षात स्वरूप थे महंत विजयराम दास: मयंक रामदास
Wed, Oct 16, 2024
श्री विजयराम भक्तमाल के महंत को अर्पित की गई श्रद्धांजलि
78 वर्ष की अवस्था में 12 अक्टूबर को हुआ था साकेतवास
अयोध्या। प्रसिद्ध पीठ श्रीविजयराम भक्तमाल रामघाट में एक शोकसभा का आयोजन किया गया। शोकसभा की अध्यक्षता बड़ाभक्तमाल के वयोवृद्ध महंत कौशलकिशोर दास महाराज एवं संचालन महंत रामशरण दास रामायणी ने किया। श्रीविजयराम भक्तमाल के महंत रहे विजयराम दास महाराज का 78 वर्ष की अवस्था में विगत 12 अक्टूबर को साकेतवास हो गया। जिन्हें लोग भईयाजी के नाम से भी जानते थे। वह इसी नाम से प्रसिद्ध रहे। महाराजश्री के साकेतवास उपरांत विजयराम भक्तमाल में शोकसभा आयोजित हुई। जिसमें रामनगरी के संत-महंतों ने महंत विजयराम दास महाराज के प्रति अपनी भावांजलि अर्पित करते हुए भावभीनी श्रद्धांजलि दी। इस अवसर पर मणिरामदास दास छावनी के उत्तराधिकारी महंत कमलनयन दास महाराज ने कहा कि साकेतवासी महंत अप्रतिम प्रतिभा के धनी संत रहे। भगवान श्रीराम सीता के प्रति उनकी अटूट भक्ति रहे। वह आज हमारे बीच में नही हैं। भगवान उन्हें अपने चरणों में स्थान दें। संकटमोचन सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष महंत संजय दास महाराज ने कहा कि महाराज श्री के बारे में जितना कहा जाए वह कम ही होगा। उनके जाने का बहुत दुख है। भविष्य में उस रिक्त स्थान की पूर्ति कभी नही की जा सकती है। बड़ाभक्तमाल के महंत स्वामी अवधेश कुमार दास ने कहा कि महंत विजयराम दास महाराज गौ एवं संत सेवी रहे। सरलता तो उनमें देखते ही झलकती थी। उनका व्यक्तित्व बड़ा ही उदार था। एक संत में जो संतत्व के गुण होते हैं, वह उनमें थे। महाराजश्री अब हम लोगों के बीच नही हैं, जिसका हम सबको बहुत ही अफसोस है। उनके जाने से पूरा संत समाज दुखी है। साकेतवासी महंत विजयराम दास महाराज के कृपापात्र शिष्य उत्तराधिकारी मयंकराम दास ने कहा कि गुरूदेव के साकेतवास हो जाने से हम सबको बहुत पीड़ा है, जिसको हम बयां नही कर सकते हैं। गुरूदेव के पदचिंहों पर चलने का प्रयास करेंगे। शोकसभा में बड़ाभक्तमाल के वयोवृद्ध महंत कौशलकिशोर दास, महंत रामकुमार दास, महंत माधवदास रामायणी, महंत सीताराम दास महात्यागी, रसमोदकुंज के महंत रामप्रिया शरण, महंत सच्चिदानंद दास, हनुमानगढ़ी के पुजारी हेमंत दास, नागा रामलखन दास, महंत विनोद दास, महंत नारायण दास, महंत रामकिशोर दास, महंत भूषण दास, विद्याभूषण, अयोध्या तीर्थ पुरोहित धर्मार्थ सेवा ट्रस्ट के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजेश महाराज आदि संत-महंत मौजूद रहे।