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: श्रीराम रक्षा स्तोत्र का पाठ करने से श्रीराम की कृपा मिलती है: महंत कमलनयनदास

बमबम यादव

Sun, Oct 20, 2024

श्रीराम सनातन संस्कृति के मानबिंदु हैं: महंत राजू दास

अंतरराष्ट्रीय ख्याति के ज्योतिषाचार्य डा. राजानंद शास्त्री द्वारा तैयार श्रीरामलला राम रक्षा यंत्र का हुआ विमोचन

सवा लाख रामरक्षा स्तोत्र पाठ से यंत्र को अभिमंत्रित कर सनातनियों तक पहुंचाने का लक्ष्य:डा. राजानंद शास्त्री

अयोध्या। श्रीराम रक्षा स्तोत्र का पाठ करने से श्रीराम की कृपा मिलती है। श्रीराम की कृपा यदि मिल जाए, तो बजरंगबली की कृपा अपने आप मिल जाती है। यह उद्गार हैं, मणिरामदास जी की छावनी के उत्तराधिकारी महंत कमलनयनदास के। वह वशिष्ठ चौक स्थित अरुंधति भवन के सभागार में अंतरराष्ट्रीय ख्याति के ज्योतिषाचार्य डा. राजानंद शास्त्री द्वारा तैयार श्रीरामलला राम रक्षा यंत्र का विमोचन कर रहे थे। इस अवसर पर कमलनयनदास ने अयोध्या की गौरव यात्रा का भी स्मरण कराया। कहा, अयोध्या ने सदियों तक संताप झेला है, अब अयोध्या में नित्य उत्सव हो रहा है। राममंदिर निर्माण से अयोध्या का वैभव लौटा है। इस दौरान महंत कमलनयनदास सहित महंत छविरामदास, महंत धर्मदास, आचार्य सतीश वैदिक समेत अन्य संतों का सम्मान किया गया।
समारोह का संचालन प्रख्यात हिंदूवादी नेता एवं हनुमानगढ़ी से जुड़े - महंत राजूदास ने कहा कि श्रीराम सनातन संस्कृति के मानबिंदु हैं। राम की संस्कृति, अयोध्या की संस्कृति को जन-जन तक पहुंचाने की जरूरत है।
डा. राजानंद शास्त्री ने कहा कि रामलला की प्राण प्रतिष्ठा की खुशी में अयोध्या में पांच दिनों तक सवा लाख राम मंत्रों का जाप किया जाएगा। इसमें 1100 वैदिक आचार्य पाठ करेंगे। उन्होंने बताया कि रामरक्षा यंत्र का प्राचीन शास्त्रों में बहुत ही उल्लेख है। यह प्रभु श्रीराम के भक्त-सेवक और हनुमान की उपासना करने वालों के लिए सुरक्षा कवच के स्वरूप में होता है। इसके ऊपर अंकित जो दिशाएं हैं, वह वास्तु दोष से भी हम लोगों की सुरक्षा करती हैं। नवनिर्मित मंदिर में रामलला की रामरक्षा यंत्र के ऊपर ही प्रतिष्ठा हुई है। इसी महत्व को समझते हुए सवा लाख रामरक्षा स्तोत्र पाठ से इस यंत्र को अभिमंत्रित करके प्रत्येक सनातनियों तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए हनुमानगढ़ी डाट काम को यह कार्य दिया गया है। यह रामरक्षा यंत्र या कवच मिलना तब शुरू होगा, जब सवा लाख रामरक्षा स्तोत्र के पाठ पूर्ण हो जाएंगे।

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