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: संत परम्परा की अनमोल कड़ी थे रसिकाचार्य सीताराम शरण जी

बमबम यादव

Sat, Mar 12, 2022

आचार्य पीठ श्री लक्ष्मणकिला के पूर्वाचार्य की 24वीं पुण्यतिथि पर रामनगरी में शिद्दत से शिरोधार्य हुए

अयोध्या। रामनगरी के आचार्य पीठ श्रीलक्ष्मण किला के पूर्वाचार्य स्वामी सीताराम शरण जी महाराज की 24वीं पुण्यतिथि बड़े ही श्रद्धा भाव के साथ मनायी गई। तिथि पर लक्ष्मणकिला में आचार्य श्री को वाक्यमयी पुष्पांजलि अर्पित कर नमन किया। संतो ने नमन करते हुए कहा कि आचार्य श्री संत परम्परा की अनमोल कड़ी थे। भगवान श्री राम की नगरी अयोध्या में अंनको संत और साधक हुए हैं जिनकी गणना उच्च कोटि के साधकों मे होती है। इन्हीं सिद्ध साधकों में रसिकोपासना के विशिष्ट आचार्य स्वामी सीताराम शरण जी महाराज की गणना होती है। महंत सीताराम शरण लक्ष्मण किला के महंत बने और उसका वैभव हमेशा बढ़ाया और कथा व्यास के रूप में अपनी अमिट छाप समाज में छोड़ी। उनके अनन्य भक्तों में देश के कोने कोने से विद्वान नौकरशाह और राजनीतिक लोग जुड़े हुए थे। श्री महाराज जी हमेशा श्री सीताराम नाम जप और सेवा में विश्वास रखते थे। वह हमेशा लक्ष्मण किला में सेवा का संचालन करते रहते थे। लक्ष्मण किला इतना वैभवशाली मंदिर है कि यहां से जो भी व्यक्ति आता हुआ खाली हाथ नहीं जाता था गौ सेवा संत सेवा तो महाराज जी किस साधना का एक अंश था। महाराज जी की कथा पूरे देश में लाखों लाख श्रोता थे जो महाराज जी को अनन्य प्रेम करते थे। स्वामी सीताराम शरण जी महाराज की 24 पुण्यतिथि हर्षोल्लास के साथ 1 सप्ताह से लक्ष्मण किला धीश महंत मैथिली रमण शरण के संयोजन में मनाया जा रहा था जिसका आज वृहद भंडारे के साथ समापन हो गया। वर्तमान महंत मैथिली रमण शरण जी महाराज ने बताया कि 1 सप्ताह से गुरु महाराज की पुण्यतिथि मंदिर में मनाई जा रही थी जिसमें आचार्य श्री द्धारा रचित ग्रन्थों नाम महिमा व धाम महिमा सहित कई ग्रन्थों का सस्वर पाठ किया गया। पुण्यतिथि समारोह का समापन में रामनगरी के संत धर्माचार्य ने आचार्य श्री को नमन किया इसके बाद वृहद भंडारे के साथ संतो का परम्परागत तरीक़े किलाधीश महंत मैथलीरमण शरण व महंत मिथलेश नन्दनी शरण ने किया। इस अवसर पर श्रीमहंत बिंदुगाद्याचार्य स्वामी देवेन्द्र प्रसादाचार्य, महंत कमलनयन दास, श्रीरामबल्भाकुंज के अधिकारी राजकुमार दास, महंत जनमेजय शरण, महंत रामकुमार दास, जगद्गुरु रामानन्दाचार्य स्वामी रामदिनेशाचार्य, बिंदुगाद्याचार्य के कृपापात्र शिष्य महंत रामभूषण दास कृपालुजी, महंत बृजमोहन दास,महंत अवधकिशोर शरण, महंत अवधेश दास, महंत अर्जुन दास, पुजारी रमेश दास, महंत गिरीश पति त्रिपाठी, संजय शुक्ला, भाजपा नेता अशोक सिंह, विधायक वेद प्रकाश गुप्ता, आलोक मिश्रा, धनश्याम दास सहित सौकड़ों संत साधक व मंदिर के शिष्य मौजूद रहे।

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