: सवा अरब रामनाम जप के साथ युग तुलसी का मनाया जायेगा जन्म शताब्दी महोत्सव
Sun, Oct 27, 2024
सवा अरब रामनाम जप के साथ युग तुलसी का मनाया जायेगा जन्म शताब्दी महोत्सव4 दिवसीय समारोह के लिए रामायणम आश्रम सज कर तैयार, जुटेंगे देश विदेश के शिष्य परिकरयुगतुलसी ने सारा जीवन रामनाम की महिमा के गान, व्याख्या और उसके विस्तार को समर्पित कर दिया: मदाकिनी रामकिंकरअयोध्या। आधुनिक युग में गोस्वामी तुलसीदास जी की श्रीराम भकत पंरपरा में उनके जीवन के लगभग 500 वर्षों के बाद ऐसे ही एक महापुरूष युग तुलसी रामायण स्वरूप महाराज श्री रामकिंकर जी का आविर्भाव हुआ। युग तुलसी पंडित राम किंकर उपाध्याय जन्म शताब्दी महोत्सव में 4 दिवसीय समारोह के लिए रामायणम आश्रम सज कर तैयार है। इस समारोह भारत के अनेक राज्यों सहित विदेशों से भी शिष्य शामिल होगें। कार्यक्रम की जानकारी देते हुए परमाध्यक्ष परम विदुषी दीदी मां मन्दाकिनी श्रीरामकिंकर जी ने कहा कि 29 अक्टूबर से 1 नवंबर तक यह महोत्सव होगा। जिसमें 29 अक्टूबर मंगलवार को मानस गोष्ठी, भक्त सम्मान और सम्मेलन, धनतेरस पूजन, बुधवार को श्री रामकिंकर सम्मान समारोह, श्री हनुमान जन्मोत्सव, प्रकाशोत्सव 31 अक्टूबर, गुरूवार को श्री राम नाम अनुष्ठान यज्ञ, सांस्कृतिक कार्यक्रम, श्री गणेश लक्ष्मी पूजन, प्रकाशोत्सव, दीपोत्सव होगा समापन 1 नवम्बर शुक्रवार को भय प्रगट कृपाला, सतगुरूदेव भगवान का अभिषेक, छप्पन भोग, भजन, दखिनारायण सेवा, दीपोत्सव, प्रकाशोत्सव, गोवर्धन पूजा, सोहर गीत, महामंगल आदि से होगा। प्रेसवार्ता करती मंदाकिनी रामकिंकर ने कहा कि युगतुलसी इस आश्रम में भक्तों को सजीव प्रतीत होते हैं, महाराज जी जिनके पूरे विश्व में अनुयाई हैं भक्त हैं और जिनकी समाधि इस रामायण आश्रम में है। उन्होंने अपना सारा जीवन रामनाम की महिमा के गान, व्याख्या और उसके विस्तार को समर्पित कर दिया। उनके इसी योगदान के कारण युगतुलसी और पद्मभूषण जैसा सम्मान मिला। पर महाराज का असली सम्मान तो उनके अशरीरी होने पर उनके करोड़ों भक्त हैं जो भारत सहित विश्व के 50 से ज्यादा देशों में रामनाम की दीप जलाए हुए हैं। और यह बतलाते हुए अत्यंत हर्ष हैं कि महाराज श्री का 100वां जन्मदिवस विश्व के पूरे 50 देशों में मनाया जाएगा। उन्होंने कहा कि श्रीराम चरितमानस की जो व्याख्या और गूढार्थ महाराज श्री द्वारा प्रस्तुत किये गए उन पर देश विदेश में अनेक शोध प्रबंध लिखे गए हैं, तथा अनेक शोधार्थियों को पी एच डी की उपाधियों से अलंकृत किया गया है। महाराज श्री का प्रत्येक दिन का प्रवचन साहित्य के विद्वानों के लिए एक शोध पूर्ण आलेख ही होता था।
: दीपावली को लेकर भ्रम में नहीं पड़ें, 31 को होगी दीपावली: सूर्य प्रकाश शरण
Sun, Oct 27, 2024
दीपावली को लेकर भ्रम में नहीं पड़ें, 31 को होगी दीपावली: सूर्य प्रकाश शरणकहा, शुभ मुहूर्त दोपहर 1:33 बजे से 03: 04 के मध्य प्रदोष काल में वृष लग्न में शाम 6:11 बजे से 8: 08 के मध्य यह मुहूर्त सर्वश्रेष्ठअयोध्या। दीपावली पूजन को लेकर कुछे अखबारों एवं वाट्एप में भ्रम की स्थिति निर्मित करने की कुचेष्टा की जा रही है। जबकि काशी व अयोध्या के सभी प्रतिष्ठित पंचांगों ने एकरूपता लाते हुए 31 अक्टूबर को दीपावली महालक्ष्मी पूजन दर्शाया गया है। रामनगरी के आचरण पीठ श्री लक्ष्मणकिला के युवा अधिकारी सूर्य प्रकाश शरण ने बताया कि दीपावली हर साल अमावस्या तिथि पर मनाई जाती है इस वर्ष इसे लेकर असमंजस की स्थिति बनी है तिथियों के आगे पीछे होने के करण अधिकांश लोग दिपावली 31 अक्टूबर को तो कुछ लोग 1 नवंबर को बता रहे हैं मंथन के बाद श्री अयोध्या जी के ज्योतिषियों ने वाराणसी के ज्योतिषियों ने एक मत से कहा है कि दीपावली का पर्व 31 अक्टूबर को ही अयोध्या सहित पूरे देश में मनाई जानी चाहिए उनका तर्क है कि दीपावली के लिए प्रदोष व्यापिनी एवं रात्रि में अमावस्या जरूरी होती है यह योग 31 अक्टूबर को ही है। आचार्य पीठ श्री लक्ष्मणकिला के वर्तमान महंत श्री मैथिलीरमण शरण जी महाराज के कृपा पात्र शिष्य श्री लक्ष्मणकिला के अधिकारी सूर्यप्रकाश शरण ने कहा कि 31 अक्टूबर को ही मिल रही प्रदोष व्यापणी अमावस्या इसी दिन मनेगी दीपावली। दीपावली पर पूजन का शुभ मुहूर्त दोपहर 1:33 बजे से 03: 04 के मध्य प्रदोष काल में वृष लग्न में शाम 6:11 बजे से 8: 08 के मध्य यह मुहूर्त सर्वश्रेष्ठ है महानिशा में मंत्र सिद्धि आदि के लिए सिंह लग्न में रात्रि 12:39 बजे से 2:53 के मध्य में हैं।
: नवाह्न पारायण संग शुरु हुआ हनुमंतलला का अवतरण उत्सव
Sat, Oct 26, 2024
नवाह्न पारायण संग शुरु हुआ हनुमंतलला का अवतरण उत्सवकार्तिक कृष्ण चतुर्दशी के पर्व पर 30 को भव्यता से जयंती मनाई जाएगीदुनिया देखेगी अखिल भारतीय निर्वाणी अखाड़े के वैभव का नजाराकेला के पत्तों व तने के साथ आम्म्र पल्लव से मंदिर परिसर में सजेंगे तोरण द्वारअयोध्या। कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी यानि छोटी दीपावली के पर्व पर 30 अक्तूबर को श्री हनुमानगढ़ी में विराजमान हनुमंतलला की जयंती पूरी भव्यता व हर्षोल्लास के साथ मनाई जाएगी। हनुमानजी अयोध्या के राजा के रुप में विराजमान है,इसलिए उनका जन्मोत्सव बड़े ही भव्यता के साथ मनाई जाएगी।
अखाड़े की परम्परा में हनुमान जयंती से पहले नौ दिवसीय अनुष्ठान किया जा रहा है। इसके साथ अखाड़े की ओर से नियुक्त वैदिक आचार्य गण श्रीराम चरित मानस का नवाह्न पारायण भी कर रहे हैं।
इसकी पूर्णाहुति 29 अक्टूबर को हवन-पूजन के साथ होगी। इस अवसर नवाह्न पारायण में अन्य साधु-, संत व भक्तगण भी शामिल हैं। अनुष्ठान की पूर्णाहुति की तिथि पर हनुमानगढ़ी अखाड़े की तिजोरी गद्दी नशीन श्रीमहंत प्रेमदास जी महाराज व चारों पट्टियों के श्रीमहंतों व उनके प्रतिनिधियों की उपस्थिति में खोली जाएगी। इस तिजोरी से सोने-चांदी, हीरे जवाहरात, मूंगा - माणिक्य व अन्यान्य बहुमूल्य वस्तुएं निकाली जाएंगी और पुजारियों के सुपुर्द किया जाएगा। जयंती के मुख्य पर्व पर भगवान का वृहद श्रृंगार इन आभूषणों से किया जाएगा।
गद्दी नशीन श्रीमहंत प्रेमदास जी महाराज के शिष्य हनुमत संस्कृत स्नातकोत्तर महाविद्यालय के प्राचार्य महंत डा महेश दास कहते हैं कि हनुमानगढ़ी में जयंती पर्व को लेकर विशद तैयारियां की जा रही है। खास बात है कि इसी पर्व पर प्रदेश सरकार के द्वारा दीपोत्सव का भी आयोजन किया जाता है। ऐसे में यहां लाखों दीप तो जलेंगे ही, मंदिर का कोना-कोना दीयों से रोशन होगा। मंदिर परिसर में लगे कांच के सुंदर झूमरों में मोमबत्तियां लगाकर उन्हें प्रज्वलित किया जाता है। इस कार्य के लिए कर्मचारियों का पूरा दस्ता यहां तैनात हैं। इसके अलावा परम्परा नुसार मंदिर परिसर में केला के पत्तों व तने के अतिरिक्त आम्र पल्लव से तोरणद्वार भी सजाए जाएंगे। उधर बाह्य परिसर में पूरे किले को खूबसूरत रंग-बिरंगी लाइटों से सुसज्जित किया जा रहा है। इसके अलावा भक्ति पथ पर विद्युत लाइटों से सुसज्जित भव्य प्रवेश द्वार भी बनाया जाएगा। भगवान के जन्म के क्षण में होने वाली आतिशबाजी भी सदैव दर्शनीय और आकर्षण का केंद्र बनती है।
संकट मोचन सेना अध्यक्ष महंत संजय दास कहते है कि अयोध्या जी के राजा है श्री हनुमानजी इसलिए हम लोग पूरे उत्सव व उमंग के साथ जन्मोत्सव मनातें है। महंत संजय दास ने अयोध्या वासियों से अपील करते हुए कहा कि जयंती उत्सव में समस्त अयोध्यावासी शामिल हो,घर घर उत्सव मनाया जाये। पूरी अयोध्या में मंगल गीत गाये जायें। चहुंओर दीप मालाओं से उजाला हो सभी के जीवन में नई उमंग चेतना का संचार हो। उत्सव की तैयारियों को अंतिम रुप दिया जा रहा है।