: भगवान ने रुक्मणी के प्रेम के अधिकार को हर परिस्थिति में बचाया: आचार्य बजरंग दास
Fri, Oct 25, 2024
भगवान ने रुक्मणी के प्रेम के अधिकार को हर परिस्थिति में बचाया: आचार्य बजरंग दासभगवान कृष्ण और रुक्मणी के मंगल विवाह के प्रसंग को सुनकर कथा प्रेमी हुए भाव विभोरअयोध्या। रामनगरी के आचार्य पीठ श्री लक्ष्मणकिला में महंत मैथिलीरमण शरण महाराज के पावन सानिध्य व युवा अधिकारी सूर्य प्रकाश शरण जी के संयोजन में चल रही सप्त दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा के समापन दिवस की बेला में राष्ट्रीय कथाव्यास श्रीबाला जी सेवा धाम नागौर राजस्थान पीठाधीश्वर महामंडलेश्वर आचार्य बजरंग दास जी ने रुक्मिणी विवाह के पवित्र कथा का श्रवण कराया जिसको सुन पंडाल में बैठे श्रोता मंत्रमुग्ध हो गए। आचार्य बजरंग दास जी ने बताया कि रुक्मिणी विदर्भ के राजा भीष्मक की पुत्री थीं, जिन्हें भगवान श्रीकृष्ण से गहन प्रेम था। हालांकि , उनके भाई रुक्मी की इच्छा थी कि रुक्मिणी का विवाह शिशुपाल से हो। रुक्मिणी ने श्रीकृष्ण को अपना सर्वस्व मानते हुए उन्हें पत्र लिखा और अपनी सहायता के लिए बुलाया, क्योंकि वह अपने भाई की इच्छा के विरुद्ध शिशुपाल से विवाह नहीं करना चाहती थीं।रुक्मिणी ने अपने पत्र में श्रीकृष्ण से प्रार्थना की थी कि वे उन्हें शिशुपाल के चंगुल से बचाकर अपने साथ ले जाएं। रुक्मिणी ने यह पत्र एक विश्वस्त ब्राह्मण के हाथों श्रीकृष्ण तक पहुँचाया , जिसमें उन्होंने अपने प्रेम और भक्ति का इज़हार किया था।
आचार्य जी ने बड़े भावपूर्ण तरीके से उस दृश्य का वर्णन किया जब रुक्मिणी देवी ने भगवती पार्वती के मंदिर में पूजा करने के बाद श्रीकृष्ण का इंतजार किया। जैसे ही रुक्मिणी मंदिर से बाहर आईं, श्रीकृष्ण ने अपने रथ पर आकर उन्हें वहां से उठा लिया और विदर्भ से द्वारका ले गए। रुक्मी ने उनका पीछा किया, लेकिन भगवान श्रीकृष्ण ने उसे पराजित किया, हालांकि रुक्मिणी के आग्रह पर उसे जीवनदान दिया।आचार्य बजरंग दास जी ने कहा कि यह विवाह श्रीकृष्ण के भक्तवत्सल और करुणामय स्वभाव को दर्शाता है। भगवान ने अपने भक्त की पुकार सुनी और रुक्मिणी को उनके प्रेम के अधिकार के लिए हर परिस्थिति से बचाया। यह कथा सिखाती है कि जब भक्त सच्चे हृदय से भगवान को पुकारते हैं, तो भगवान स्वयं उनकी रक्षा के लिए आते हैं।कथा का समापन रुक्मिणी विवाह के इस पवित्र प्रसंग से हुआ, जिसमें स्वामी जी ने भक्तों को प्रेम, समर्पण और भक्ति के महत्व को समझाया। श्रद्धालु भक्तों ने भजन-कीर्तन के साथ इस कथा का आनंद लिया और आचार्य जी के प्रवचनों से प्रेरणा प्राप्त की।कथा शुभारंभ के पहले व्यास पीठ का पूजन किया गया। कथा के विश्राम बेला में पुनः आरती उतारी है।
: श्री हनुमान किला मंदिर में स्थापित हुए बर्फानीश्वर महादेव
Sun, Jul 28, 2024
शांति स्थापित करने के लिए कायाकल्पी बर्फानी दादा के स्मरण में कराया गया है बर्फानीश्वर महादेव को: महंत परशुराम दास
वैदिक विद्वानों व संतों का अभिनन्दन किया समाजसेवी अमर सिंह ने सपत्नीक
अयोध्या। भगवान श्री राम की जन्मस्थली अयोध्या के बाईपास स्थित श्री संकटमोचन हनुमान किला मंदिर में मंदिर के पीठाधीश्वर महंत परशुराम दास महाराज के संयोजन में श्रावण मास की पवित्र महीने में जन कल्याण और विश्वकल्याण के लिए बर्फानीश्वर महादेव की प्राण प्रतिष्ठा मुख्य यजमान समाजसेवी अमर सिंह ने सपत्नीक की। प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव 5 दिन पूर्व वैदिक विद्वान आचार्य कुलदीप तिवारी द्वारा कराया गया।
महंत परशुराम दास महाराज ने बताया कि वर्तमान समय में पूरे विश्व मे अशांति व्याप्त है। शांति स्थापित करने के लिए कायाकल्पी बर्फानी दादा के स्मरण में कराया गया है। बर्फानी दादा हमेशा विश्वशांति और जीव कल्याण की बात करते थे। उन्होंने बताया कि प्रभु श्री राम की जन्मस्थली अयोध्या में भगवान शिव की प्राण प्रतिष्ठा करके ऐसा प्रतीत हो रहा था जैसे भगवान भोलेनाथ स्वयं प्रभु श्री राम का दर्शन कर रहें हो, क्योंकि पांच सौ वर्षों के प्रतिरक्षा के बाद प्रभु श्री राम लाल अपने जन्म स्थान पर विराजमान और भगवान श्री राम के अन्नय भक्त हनुमान जी के स्थान संकट मोचन हनुमान किला में भगवान शिव भी विराजमान हो गए हैं।
समाजसेवी अमर सिंह ने बताया कि हनुमान जी ऐसे देवता जिनकी आराधना से सभी का कल्याण होता है सर्व भवंति सुखना सर्वे संतु निरामया के उद्देश्य से शिवजी की स्थापना महंत परशुराम दास महाराज के संयोजन में संकटमोचन हनुमान किला में उन्हीं की कृपा से किया गया। इस अवसर पर वरिष्ठ पुजारी महंत रामचरण दास खाक चौक,महंत विजय राम दास, महंत दामोदर दास, शिक्षक संघ के नेता चंद्रशेखर सिंह, उमेश सिंह, प्रमोद कुमार सोनी उर्फ मोदी, ज्ञानप्रकाश शर्मा सहित दर्जनों लोग मौजूद रहे प्राणप्रतिष्ठा महोत्सव के अवसर पर संतो महंत एवं भक्तों का बृहद भंडारा भी किया गया।
: श्री राम के जीवन चरित्र से समाज को नई दिशा की तरफ ले जा सकते है: संध्या
Sun, Jul 28, 2024
हनुमान बाग मंदिर का छाया रामकथा का उल्लास, संत साधक लगा रहें गोता, जलाना पूना महाराष्ट्र के भक्तों से पटा हनुमान बाग
अयोध्या। रामनगरी के हनुमान बाग में श्री रामकथा महोत्सव का उल्लास अपने चरम पर है। व्यासपीठ से श्री रामकथा की अमृत वर्षा जलाना पूना से पधारी प्रख्यात कथावाचिका संध्या जी कर रही है।कथा के चतुर्थ दिवस में संध्या जी ने सभी भक्तों को राम कथा का रसपान बड़े ही मार्मिक एवं विस्तार से प्रसंग एवं संजीव झांकियो द्वारा करवा रही। उन्होंने बताया कि भगवान की सहज अवस्था बाल लीला के रूप में पूरे विश्व को एक नया दिग्दर्शन देता है जब भक्ति के पराभूत परमात्मा होता है तब वह बालक बन करके आता है।उन्होंने कहा कि भगवान ज्ञानी राजा के बुलाने पर भोजन करने नहीं आते पर जब कोई भक्त परमात्मा को पुकारता है तो भगवान नाचते हुए भक्तों के पास चले आते हैं। ब्रह्मम परमात्मा और भगवान तीनों एक ही तत्व है।निर्गुण वादी जिन्हें ब्रह्म कहते है विद्वान पंडित इन्हें परमात्मा कहते हैं और भक्त उन्हें भगवान कहते है। यह तीनों बातें ऐसे ही है जैसे बादल जल और बर्फ। संध्या जी ने भगवान श्री राम के बाल लीलाओं का विस्तार से वर्णन किया और कथा सुनाते हुए कहा कि एक ही तत्व के रूप में तीन अलग-अलग स्थानों पर अनुभव में आता है कि भगवान भक्ति के आधीन हो नरोत्तम लीला के लिए शरीर धारण करते है। भगवान अपने लीला के माध्यम से प्रत्येक लीला को अनुकरणीय रूप में प्रस्तुत करते है। उन्होंने कहा बाल्यकाल से मनुष्य का जीवन वैसा होना चाहिए जैसे भगवान श्री राम हमें सिखाते है। भगवान श्रीराम ने अपने श्रेष्ठ जनों के प्रति वंदन का भाव रखते है। प्रातःकाल उठिए कै रघुनाथा मात पिता गुरु नावई माथा। वर्तमान समय में हमें अपने बच्चों को अपने आराध्य श्री राम की जीवन चरित्र को पढ़ाना चाहिए जिससे वह हमारी संस्कृति और धर्म को अनुकरण में ला सकें और समाज को नई दिशा की तरफ ले जा सके। माता पिता भाई बंधु गुरु और देश काल परिस्थितियों से प्रेम कर सकें। कथा से पूर्व व्यासपीठ का पूजन कार्यक्रम के संयोजक श्याम जी लाखोटिया व जलाना पूना महाराष्ट्र के भक्तों ने किया। यह महोत्सव हनुमान बाग पीठाधीश्वर महंत जगदीश दास महाराज के अध्यक्षता में हो रहा।महोत्सव की देखरेख सुनील दास व रोहित शास्त्री कर रहें।इस मौके पर मामा दास, लवकुश दास, महंत हरिभजन दास, पुजारी योगेंद्र दास, नितेश शास्त्री सहित सैकड़ों संत महंत एवं राम कथा के रसिक गण उपस्थित रहे।