: रोजा रखकर बच्चे भी कर रहे अल्लाह की इबादत
Fri, Apr 5, 2024
कहा, रोजा रखने से सवाब मिलता है, गरीबों की भूख-प्यास का भी एहसास होता है
अयोध्या। रमजान हर किसी को नेकी की तरफ बुलाता है। इतना ही नहीं रमजान के रोजे हर बालिग पर फर्ज हैं। चाहे वह महिला हो या पुरुष । रमजान के रोजे शरई मजबूरी के बिना छोड़ने पर गुनाह होता है। रमजान का पाक महीना शुरू होते ही जहां बड़ों में उत्सुकता देखी जाती है। वहीं बच्चे भी किसी से कम नहीं है। शहर के अलग-अलग स्थानों पर कई बच्चों ने रोजा रखकर अल्लाह की इबादत की। बच्चों के हौसलों की मुहल्लेवासियों समेत रिश्तेदारी में चर्चा रही और सभी ने बच्चों को तरह-तरह के उपहार देकर हौसला अफजाई की।रमजान माह का मकसद है कि रोजा रखकर जहां बुराईयों से बचा जा सके वहीं अल्लाह के करीब पहुंचा जा सके। रमजान के रोजे हर बालिग पर फर्ज किये गये हैं। मसलन वह बीमार न हो और रोजा रखने की हालत में न हो।
धर्म नगरी अयोध्या जो गंगा जमुनी तहजीब की नगरी भी है। हिंदू मुस्लिम एकता में जो हमेशा पुल का काम करते है। या हम यू कहें कि गंगा जमुनी तहजीब की जीवंत मिशाल मोहम्मद इरफान अंसारी नन्हे मिंया का दरवाजा दीन दुखियों के लिए हमेशा खुला रहता है। उनके पुत्र समाजसेवी मोहम्मद इमरान अंसारी व फिल्म प्रड्यूसर समाजसेवी सुल्तान अंसारी खुद तो रोजा रखते हुए लोगों की मदद के लिए अपने पिता के बतायें मार्ग का अनुसरण करते हुए दो कदम आगे रहते हैं और अल्लाह की इबादत पूरे नेक दिल से करते हैं। इमरान व सुल्तान के बेटे और बेटियां भी रोजा रखे हुए हैं।अरहन अंसारी, अलिशफा अंसारी,अलीजबा अंसारी व कश्फिया अंसारी अपने परिवार के सदस्यों को रोजा रखते हुए देखकर मन में भी रोजा रखकर अल्लाह की इबादत का ख्याल आया। सभी ने मां- बाप की इजाजत से अपना रोजा रखा। भीषण गर्मी और शिद्दत के दिनों में रखे गये इस रोजे की अहमियत ही कुछ और है। अल्लाह तआला को जहां गर्मी का रोजा अधिक पसंद हैं वहीं जवानी की इबादत बेहद प्यारी है। सभी बच्चों ने रोजा रखकर पूरा दिन अल्लाह की इबादत की। बच्चों के इस हौसले को देखकर मुहल्ले के साथ- साथ रिश्तेदारों ने उसकी भूरि-भूरि प्रशंसा की। सभी बच्चों ने बताया कि उनकी मां व अन्य घर वाले भी रोजा रखते हैं। उनको देखकर ही उसके मन में भी रोजा रखने की नियत आयी। बताया कि रोजा रखने से सवाब मिलता है और गरीबों की भूख-प्यास का भी एहसास होता है।
: बाबा दामाेदर दास महाराज काे संताें ने दी भावभीनी श्रद्धांजलि
Wed, Apr 3, 2024
हनुमानगढ़ी के गद्दीनशीन श्रीमहंत प्रेमदास जी महाराज व धर्मसम्राट श्रीमहंत ज्ञानदास जी महाराज के सानिध्य और बाबा रामप्रसाद दास जी के संयोजन में हुआ कार्यक्रम
अयोध्या। मणिपर्वत विद्याकुंड स्थित रामायणी जी की कुटिया के साकेतवासी बाबा दामाेदर दास महाराज काे संताें ने भावभीनी श्रद्धांजलि दी। संताें ने उनके चित्रपट पर पुष्पांजलि अर्पित करते हुए नमन किया और कृतित्व-व्यक्तित्व पर प्रकाश भी डाला। विगत 22 मार्च को बाबा दामाेदर दास चेला परमेश्वर दास का साकेतवास हाे गया। बुधवार को उनका त्रयाेदश संस्कार रहा। इस अवसर पर हनुमानगढ़ी के गद्दीनशीन श्रीमहंत प्रेमदास जी महाराज व धर्मसम्राट श्रीमहंत ज्ञानदास जी महाराज के सानिध्य और बाबा रामप्रसाद दास जी के संयोजन में बाबा दामाेदर दास चेला परमेश्वर दास का तेरहवीं भंडारा रामायणी जी की कुटिया पर आयाेजित हुआ। भंडारे में हनुमानगढ़ी समेत रामनगरी के सभी विशिष्ट संत-महंतों ने सम्मिलित हाेकर प्रसाद ग्रहण किया। कार्यक्रम का संचालन संकटमोचन सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष संजय दास व हनुमत संस्कृत स्नातकोत्तर महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. महेश दास जी महाराज द्वारा किया गया। आये हुए अतिथियों का स्वागत-सत्कार हनुमानगढ़ी के वरिष्ठ पुजारी हेमंत दास व महंत संजयदास जी के निजी सचिव शिवम श्रीवास्तव ने किया। इस माैके पर रसिक पीठाधीश्वर महंत जन्मेजय शरण, बड़ाभक्तमाल के महंत स्वामी अवधेश कुमार दास, हनुमानगढ़ी के सरपंच महंत रामकुमार दास, महंत बलराम दास, स्वामी दिलीप दास त्यागी, संकटमोचन हनुमानकिला के महंत परशुराम दास,राज गोपाल मंदिर के शरद जी, महंत अर्जुन दास, महंत मुकेश दास, पुजारी रमेश दास, नागा नंदराम दास, पहलवान राजेश दास,पहलवान मनीराम दास, अखाड़े के मुख्तार अजय श्रीवास्तव, नागा उपेंद्र दास, नागा बजरंग दास, पहलवान रितेश दास, रामानंद दास,कल्लू दास, प्रेममूर्ति कृष्णकांत दास,महंत शैलेश दास, नागा सूरज दास, संजय शुक्ला, सूर्यभान दास, संतदास आदि संत-महंत उपस्थित रहे।
: भगवान ऋषभदेव की जन्मजयन्ती पर निकली रथ यात्रा, हुआ मस्तिकाभिषेक
Wed, Apr 3, 2024
श्री दिगम्बर जैन मन्दिर में भगवान ऋषभदेव का पंचामृत अभिषेक
भगवान ऋषभदेव ने करोड़ो वर्ष पूर्व पुण्य धरा पर जन्म लिया एवं सम्पूर्ण विश्व को जीवन जीने की कला सिखाई: स्वामी रविन्द्र कीर्ति
अयोध्या। धर्मनगरी अयोध्या भूमि ऐसी है, जहां पर सभी धर्मों के बहुरंगी फूल खिले। हिंदू, जैन, बौद्ध, सिख, इस्लाम सब के सब इसके आंगन में पले-बसे और बड़े हुए। यह ऐसी पवित्र भूमि है जिसने सबको रिझाया। अयोध्या में जैन धर्म की भी जड़ें गहरी हैं।
पांच तीर्थंकरों की जन्मभूमि अयोध्या है। पहले तीर्थंकर भगवान ऋषभदेव जी की जयंती धूमधाम से मनाई गई।जिसमें महामस्तकाभिषेक किया गया। भगवान के मस्तक पर जल, दूध, घी, दही, सर्वोपधि, पुष्पवृष्टि, हरिद्रा, केशर आदि का अभिषेक किया गया सारे विश्व में मंगल की कामना को लेकर भगवान के मस्तक पर की शांतिधारा इस अवसर पर सर्वप्रथम झण्डारोहण पूर्वक कार्यक्रम का शुभारम्भ किया गया। बुधवार को रायगंज स्थित श्री ऋषभदेव बड़ी मूर्ति दिगम्बर जैन में भगवान आदिनाथ का जन्मोत्सव गणनी आर्यिका ज्ञानमती माता जी व गाणिनी आर्यिका प्रज्ञामती माताजी एवम् गणिनी आर्यिका सुप्रकाश मति माताजी व आर्यिका चंदनामती माता जी के सानिध्य में बड़ी ही धूमधाम से मनाया गया। प्रातः मन्दिर में भगवान आदिनाथ के जयकारों के साथ प्रभात फेरी निकाली गयी।ततपश्चात भगवान आदिनाथ स्वामी को रथ पर विराजमान कर गाजे-बाजे के साथ एक विशाल शोभायात्रा निकाली गई।रायगंज जैनमन्दिर से रथ भगवान के जन्मस्थान टोंक मन्दिर तक गया वहाँ पर भगवान का पंचामृत अभिषेक सम्पन्न किया गया।यात्रा बैंड बाजे के साथ संगीत मंडली एवं ध्वज लेकर के भक्तगण जय-जयकार के नारे लगाते हुए चल रहे थे। पीठाधीश स्वस्तिश्री रवीन्द्रकीर्ति स्वामी जी ने सबको बताया कि भगवान ऋषभदेव ने करोड़ो वर्ष पूर्व पुण्य धरा पर जन्म लिया एवं सम्पूर्ण विश्व को जीवन जीने की कला सिखाई। पक्रियाओं के द्वारा जीवन यापन करना बतलाया उनके प्रथम पुत्र भगवान भरत चक्रवर्ती के नाम पर इस देश का नाम भारत पड़ा। भगवान आदिनाथ का पंचामृत अभिषेक शांतिधारा पंडित विजय कुमार ने विधिविधान से सम्पन्न कराया।दोपहर में बड़ी मूर्ति का महा मस्तकाभिषेक अभिषेक,पंचामृत अभिषेक शांतिधारा किया गया। इस मौके पर अध्यक्ष पीठाधीश स्वामी रविन्द्र कीर्ति ,महामंत्री अमर चन्द्र जैन,ऋषभ जैन,लल्ला जैन,पंकज जैन,निदेश जैन,चन्दर जैन,घल्लन जैन,सिद्धार्थ जैन,रितेश जैन,मनोज जैन आदि मौजूद रहे।