: संतों ने महंत सर्वेश्वर दास को श्रद्धांजलि अर्पित कर किया नमन
Sat, Sep 3, 2022
तपस्वी छावनी का महंत जगद्गुरू परमहंस आचार्य को अयोध्या के संतो ने पहले ही कर दिया था नियुक्त: महंत जगदीश दास
अयोध्या। आचार्य पीठ तपस्वी छावनी के पीठाधीश्वर महंत सर्वेश्वर दास के साकेत वास के बाद वर्तमान पीठाधीश्वर महंत जगतगुरु परमहंस आचार्य के संयोजन में गुरुवार शाम को दिगंबर अखाड़ा के महंत सुरेश दास की अध्यक्षता में एक शोक सभा का आयोजन किया गया। जिसमें अयोध्या के संतो ने साकेत वासी महंत सर्वेश्वर दास महाराज के व्यक्तित्व पर प्रकाश डाला। रामनगरी के प्रतिष्ठित पीठ श्रीहनुमान बाग के महंत जगदीश दास महाराज ने कहा कि यह पीठ त्यागी संप्रदाय की आचार्य पीठ है इसका अपना गौरवमई इतिहास है और यह त्याग तपस्या की पीठ है जिसका कुशल संचालन सर्वेश्वर दास जी महाराज करते रहे है। उन्होंने कहा कि इस पीठ का महंत जगद्गुरू परमहंस आचार्य को अयोध्या के संतो ने पहले ही नियुक्त कर दिया था। जगद्गुरू परमहंस आचार्य एक त्यागी संत है जो तपस्वी छावनी को आगे ले जायेंगे।
महंत सुरेश दास महाराज ने कहा कि यह पीठ तपस्वी संतो की है और सर्वेश्वर दास जी महाराज अपनी त्याग तपस्या और सरलता से निरंतर साधु सेवा विद्यार्थी सेवा करते रहे और आगे भी सभी सेवाएं संचालित होती रहेंगी।
गुजरात अहमदाबाद जगन्नाथ मंदिर से पधारे महंत दिलीप दास महाराज ने कहा की सर्वेश्वर दास महाराज से हमारे अच्छे संबंध थे मैं उनको नमन करता हूं प्रभु श्री राम लला अपने चरणों में उनको स्थान दें और मुझसे जो भी सहयोग मांगा जाएगा इस आचार्य पीठ के विकास के लिए मैं करता रहूंगा। कथा कुंज के महंत रामानंद दास महाराज वैद्य मंदिर के महंत राजेंद्र दास, महंत परशुराम दास, निर्मोही अखाड़ा के श्री महंत राजेंद्र दास,सरयू मंदिर के महंत राम अवध दास, हनुमानगढ़ी के नंदरामदास, मामा दास,बालयोगी राम दास,रावत मंदिर के महंत राम मिलन दास, हनुमान बाग मंदिर के महंत जगदीश दास, महंत हरिभजन दास, महंत सीताराम दास त्यागी, श्री राम कथा के मर्मज्ञ चंद्रांशु जी महाराज, अधिकारी छवि राम दास , महंत शशिकांत दास, महेंद्र भाई झा गुजरात ने श्री महाराज जी को भाव मई श्रद्धांजलि अर्पित की संचालन जगत गुरु परमहंस आचार्य ने किया। शोक सभा में अयोध्या के सैकड़ों संतों महंतों ने महाराज जी को श्रद्धांजलि अर्पित की।
: अयोध्या में भव्य मंदिर बन रहा, इसकी खुशी भारत ही नहीं पूरे विश्व में: गोविंद सिंह
Sat, Sep 3, 2022
मध्य प्रदेश के राजस्व एवं परिवहन मंत्री गोविन्द सिंह राजपूत अपने सौकड़ों समर्थकों के साथ पहुंचे रामनगरी, किया दर्शन पूजन
3 किलो 3 सौ 33 ग्राम की तीन चांदी की शिलाओं के साथ सुरखी विधानसभा क्षेत्र के राम भक्तों द्धारा संग्रहित 7 लाख 21 हजार धनराशि भी रामलला को किया समर्पित
अयोध्या। मध्य प्रदेश सरकार में राजस्व एवं परिवहन मंत्री गोविन्द सिंह राजपूत शुक्रवार को 400 राम भक्तों के साथ अयोध्या पहुंचकर रामलला के किये दर्शन पूजन। 3 किलो 3 सौ 33 ग्राम की तीन चांदी की शिलाओं के साथ सागर जिला मध्य प्रदेश के सुरखी विधानसभा क्षेत्र के रहने वाले राम भक्तों से इकट्ठा की हुई 7 लाख 21 हजार धनराशि भी रामलला को ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय के द्वारा समर्पित किए। अयोध्या पहुंचकर सबसे पहले मंत्री गोविन्द सिंह राजपूत ने नेपाली बाबा से आशीर्वाद लिया। अपने समर्थकों के साथ शिलाओं को लेकर पैदल शोभायात्रा के रुप में गाजेबाजे के साथ राम जन्मभूमि के लिए रवाना हुए, वहां पहुंचकर ट्रस्ट को समर्पित किया। मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने बताया कि सदियों से राम भक्त इंतजार कर रहे थे अयोध्या में भव्य मंदिर बन रहा है इसकी खुशी भारत ही नहीं पूरे विश्व में है। आने वाले समय में विश्व का प्रत्येक नागरिक अयोध्या आकर रामलला का दर्शन करेगा। उन्होंने बताया कि चांदी की शिलाओं को लेकर मैंने अपनी विधानसभा सुर्खी में प्रत्येक गांव और शहर भ्रमण किया हूं। लोगों के अंदर उत्साह देकर आनंदित हो गया और सबने जो भी धनराशि दी उसको लेकर रामलला के दरबार में उपस्थित हुआ हूं समर्पित करने के लिए।
प्रदेश सागर जिले से यह यात्रा वीरेंद्र पाठक के नेतृत्व में अयोध्या पहुंची। उन्होंने बताया कि सुरखी विधानसभा से जिला अध्यक्ष और मंडल अध्यक्ष सहित सभी पदाधिकारी एवं आम लोग आए हुए है। इनके साथ सागर जिले के जिला पंचायत अध्यक्ष हीरा सिंह, मंत्री की पत्नी सविता सिंह राजपूत सुखदेव मिश्र, रामेश्वर नाम देव, ओंकार सिंह और मंत्री के ओएसडी ज्वाला सिंह सहित लगभग 400 लोगों ने दर्शन पूजन की है। अयोध्या में नागा सूरज दास और हंसराज दास उर्फ नागा बाबा ने सभी अतिथियों का स्वागत किया। इस अवसर पर अमित दास बाबा महामंडलेश्वर सुरेंद्र गिरी महाराज सहित अन्य लोग उपस्थित रहे।
: रामानंद सम्प्रदाय की ध्वाजा देशभर में फहराई
Thu, Sep 1, 2022
संत,धर्माचार्य का समूह दिवंगत आचार्य को देगे श्रद्धांजलि, स्वामी हर्याचार्य के व्यक्तित्व-कृतित्व पर भी होगी चर्चा
महाराज श्री नारियल सदृश थे, यह जीवन धन्य है जिस पर उनकी कृपा बरसी: रामदिनेशाचार्य
अयोध्या। संतो की सराय कही जाने वाली रामनगरी में अनेक भजनानंदी संत हुए है। ऐसे संत जो अपना संपूर्ण जीवन भगवत भजन में ही समर्पित कर दिया उन संतों में एक के परम पूज्य जगद्गुरु रामानंदाचार्य स्वामी हर्याचार्य जी महाराज। हरिधाम गोपाल पीठ स्वामीजी की तपोस्थली आज भी अपने वैभव को समेटे हुए।आध्यात्मिकता को चार चांद लगा रहा है। रामनगरी का आध्यात्मिक जगत जिन आचार्यों से आलोकित है उनमें जगद्गुरु रामानंदाचार्य स्वामी हर्याचार्य जी महाराज एक है।
विशिष्टताद्वौत के साथ-साथ श्री हनुमत उपासना का अद्भुत संयोग उनके व्यक्तित्व का आभूषण था। उन्होंने जगद्गुरु के रूप में देश में दशकों तक रामानंद संप्रदाय की ध्वजा फहराई। जगद्गुरु रामानंदाचार्य स्वामी हर्याचार्य को शनिवार को उनकी 14वीं पुण्यतिथि पर श्रद्धापूर्वक याद किया जाएगा। श्री हरिधाम गोपालपीठ मंदिर स्थित उनकी तपोस्थली पर पुण्यतिथि के आयोजन की तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। संत- धर्माचार्य का समूह दिवंगत आचार्य को अपनी श्रद्धांजलि देगें। इस अवसर पर स्वामी हर्याचार्य के व्यक्तित्व-कृतित्व पर भी चर्चा होगी।
सिद्धार्थनगर जिले में मघा नक्षत्र में जन्मे बालक हरिनाथ त्रिपाठी किशोरावस्था में अयोध्याजी आ गये। उन्होंने हनुमानगढ़ी के गद्दीनशीन महंत रामबालक दास जी महाराज के शिष्य के रूप में वेद, वेदांत एवं व्याकरण में विशिष्टता हासिल की। कर्मकांड, ज्योतिष, वाल्मीकि रामायण, गीता व गोस्वामी तुलसीदास के द्वादश ग्रंथों का वे अध्यापन भी शिक्षार्थियों को कराते रहे।उन्होंने अयोध्या के कई संस्कृत विद्यालयों में प्राचार्य पद को सुशोभित किया। भगवान सीताराम जी की आराधना व हनुमान जी की सेवा उनके चिंतन में सदैव रची-बसी रही। स्वामी हर्याचार्य जी को सन् 1989 के प्रयाग कुंभ में जगद्गुरु रामानंदाचार्य के पद पर विभूषित किया गया। महाराज श्री ने हनुमत कवच व ब्रह्मासूत्र, गीता भक्ति दर्शन का 12वां अध्याय, वेदों में अवतार रहस्य, श्री संप्रदाय दर्शन तथा श्रीरामचरित मानस में वैदिकत्व सहित दो दर्जन पुस्तकों की रचना कर हिंदू धर्म-संस्कृति को समृद्ध किया। सन् 2008 में भाद्र शुक्ल सप्तमी उनका साकेतवास हुआ। उनके उत्तराधिकारी रामानंदाचार्य स्वामी रामदिनेशाचार्य जी कहते हैं कि महाराज श्री नारियल सदृश थे। यह जीवन धन्य है जिस पर उनकी कृपा बरसी। महाराज के सिद्धांतों का अनुसरण करते जीवन जाय, यही प्रार्थना श्री हनुमान जी से अनवरत होती रहती है।