: गुंडागर्दी के बल पर तपस्वी छावनी पर अवैध कब्जे का हो रहा प्रयास: महंत माधव दास
Fri, Sep 9, 2022
तपस्वी छावनी की परिसंपत्तियों में दर्ज है औलिया बापू,अपदस्थ महंत कैसे करेगा उत्तराधिकारी घोषित व बनाएगा ट्रस्ट
हरिवंश दास औलिया बापू ने विपक्षियों द्वारा बनाए गए ट्रस्ट को बताया फर्जी, निरस्तीकरण के लिए कोर्ट में अर्जी देने की कही बात
अयोध्या। रामनगरी की प्राचीन पीठ तपस्वी छावनी में चल रहा महंती का विवाद हर दिन नया मोड़ ले रहा है। महंती विवाद को लेकर अयोध्या के संतों के दो गुट आमने-सामने हैं। इस बीच एक अन्य पक्ष की इंट्री से विवाद को नई दिशा मिल गई है। तपस्वी छावनी के साकेतवासी महंत सर्वेश्वर दास के बड़े गुरूभाई हरिवंश दास औलिया बापू ने शुक्रवार को तपस्वी छावनी में हनुमानगढ़ी के नागा-साधुओं की मौजूदगी में कहा कि वास्तव में मंदिर के असली सर्वराहकार तो वह स्वंय हैं। इसकी पुष्टि तपस्वी छावनी की परिसंपत्तियों में दर्ज उनके नाम से होती है। साथ ही उन्होंने विपक्षियों द्वारा बनाए गए ट्रस्ट को फर्जी बताते हुए इसके निरस्तीकरण के लिए कोर्ट में अर्जी देने की भी बात कही। उन्होंने तपस्वी छावनी के उत्तराधिकारी के रूप में परमहंसाचार्य का समर्थन किया।दिवंगत महंत के गुरुभाई हरिवंश दास महाराज ने कहा कि सर्वेश्वर दास हमारे अनुज थे। करीब डेढ़ साल बाद वह मिले तो उन्हें आश्रम में वापस लाकर फिर से इसलिए रख दिया कि वह कहीं इधर-उधर भटके नहीं। वयोवृद्ध महंत ने कहा कि उन्हें दोबारा यहां महंत पद पर पदस्थ नहीं किया गया था और न ही हमने पद से त्यागपत्र ही दिया तो फिर वह किस अधिकार से अपना उत्तराधिकारी नियुक्त कर सकते थे। यही नही जब यहां से अपदस्थ थे तो किस अधिकार से परिवाराचार्य की गद्दी का ट्रस्ट बना सकते थे।
इस दौरान निर्वाणी अनी अखाड़ा हनुमानगढ़ी पूर्व प्रधानमंत्री वरिष्ठ महंत माधव दास ने कहा कि गुंडागर्दी के बल पर दूसरे पक्ष द्वारा तपस्वी छावनी पर अवैध कब्जे का प्रयास किया जा रहा है। कहा कि हमें सर्वेश्वर दास की तेरहवीं संस्कार भी नहीं करने दिया जा रहा है। महंत की जरूरत ही नही है कि क्योंकि परमहंसाचार्य पहले ही महंत बनाए जा चुके हैं। इस दौरान मौजूद बड़ी संख्या में नागा साधुुओं ने परमहंसाचार्य के समर्थन में हुंकार भरी। इस अवसर पर संकट मोचन सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष महंत संजय दास, गद्दीनशीन के शिष्य हनुमत संस्कृत स्नातकोत्तर महाविद्यालय के प्राचार्य महंत डॉ.महेश दास, महंत नंदरामदास, हनुमान बाग के महंत जगदीश दास, महंत सत्यदेव दास, महंत अजीत दास पहलवान, महंत रामदास करतलिया, पुजारी हेमंतदास, मामा दास, राजेश दास पहलवान, अभिषेक दास, मनीराम दास, सहित बड़ी संख्या में नागा-साधु मौजूद रहे।
: तपस्वी छावनी महंती विवाद: मंदिर में बाहरी लोगों का प्रवेश से रोकने की मांग
Thu, Sep 8, 2022
योगी सरकार में हिंदू राष्ट्र की अलख जगाने वाले संत परमहंस दास को परेशान कर रहे भूमाफिया: महंत जगदीश दास
डीएम और डीआईजी से मिले परमहंस आचार्य के समर्थक संत महंत
अयोध्या। आचार्य पीठ तपस्वी छावनी के महंती को लेकर चल रहे विवाद में गुरुवार को दूसरा पक्ष भी पुलिस और प्रशासन के पास पहुंचा। डीएम और डीआईजी से मुलाकात कर बाहरी लोगों का मंदिर में प्रवेश रोकने की मांग की है। प्रार्थना पत्र के साथ महजरनामा की प्रति भी सौंपी है। बुधवार को धर्मनगरी के प्रमुख संत महंतों ने पुलिस प्रशासन से मुलाकात कर ट्रस्ट के निर्णय का अनुपालन कराने और विवाद तथा हस्तक्षेप रोकने की मांग की थी।
गौरतलब है कि कि रामघाट स्थित तपस्वी छावनी के महंत सर्वेश्वर दास की 30 अगस्त को मौत हो गई थी, इसको लेकर 12 सितंबर को मंदिर परिसर में भंडारा और नए महंत की ताजपोशी के लिए कंठी चादर का कार्यक्रम होना है। भंडारा के पहले ही मंदिर की महंती को लेकर गोलबंदी शुरू हो गई है। वर्ष 2019 में महंत सर्वेश्वर दास की ओर से पीठ के संचालन के लिए ट्रस्ट का गठन किया गया था।उनके निधन के बाद ट्रस्ट की ओर से 2 सितंबर को बैठक कर सर्वसम्मति से जगन्नाथ मंदिर अहमदाबाद के दिलीप दास को अध्यक्ष और पदेन महंत चुना गया है। वर्ही परमहंस आचार्य खुद को मंदिर का महंत बता रहे हैं। विवाद को लेकर धर्म नगरी के साधु-संत गोल बंद है। बुधवार को पचासों की तादात में प्रमुख संत-महंतों ने डीआईजी और एडीएम सिटी व एसपी सिटी से मुलाकात की थी।
गुरुवार को सौकड़ों साधु-संतों के साथ परमहंस आचार्य ने जिलाधिकारी नीतीश कुमार और डीआईजी एपी सिंह से मुलाकात की। दोनों अधिकारियों को प्रार्थना पत्र के साथ महजरनामा की प्रति सौंपी। दावा किया कि 18 जुलाई 2017 को महंत सर्वेश्वर दास ने राम नगरी के साधु-संतों की मौजूदगी में उनको सरवराहकार व महंत घोषित किया था। तभी से तपस्वी पीठ के संचालन और देखरेख का सर्वाधिकार उनके पास है। 2019 में सर्वेश्वर दास की ओर से ट्रस्ट का गठन किया गया, जबकि उनको इसका अधिकार ही नहीं था। इसी ट्रस्ट के बहाने कुछ लोग विवाद खड़ा करना चाहते हैं। ऐसे में मंदिर परिसर में बाहरी लोगों के प्रवेश पर रोक लगाई जाए। प्रतिनिधिमंडल में मुख्य रूप से हनुमान बाग के महंत जगदीश दास, महंत माधव दास,हनुमत संस्कृत स्नातकोत्तर महाविद्यालय के प्राचार्य महंत डा महेश दास, करपात्रीजी, महंत नंदराम दास जी, महंत राम चरण दास, महंत बलराम दास, महंत इंद्रदेव दास, महंत सत्यदेव दास, पहलवान राजेश दास, पार्षद पुजारी रमेश दास, पुजारी हेमन्त दास, महंत दिनेश दास, महंत अजीत दास, महंत राम करन दास, महंत राम नारायण दास, महंत रमेश दास, महंत विजय दास, महंत सुरेंद्र दास, महंत राम केवल दास, देवेशाचार्य, अभिषेक दास, जटा शंकर दास, परमानंद दास, रतन दास, आनंद दास, विराट दास सहित बड़ी संख्या में नागा साधु संत मौजूद रहे।
: महंत मैथिलीरमण शरण को संतो की किया नमन
Thu, Sep 8, 2022
अयाेध्या। जानकीघाट बड़ास्थान के साकेतवासी महंत मैथिलीरमण शरण महाराज काे पुण्यतिथि पर शिद्दत से याद किया गया। साेमवार काे संताें ने महंत के चित्रपट पर पुष्पांजलि कर भावभीनी श्रद्धांजलि दी और कृतित्व-व्यक्तित्व पर प्रकाश डाला। इस अवसर पर रसिक पीठाधीश्वर महंत जन्मेजय शरण महाराज ने कहा कि पूर्वाचार्य महंत की भगवान सीताराम जी के प्रति अनन्य भक्ति रही है। उन्हाेंने जीवन पर्यन्त रसिक परम्परा का निर्वहन किया। वह किशाेरी जी के अनन्य उपासक थे। मंदिर के सर्वांगीण विकास के साथ-साथ उन्हाेंने गाै, संत, विद्यार्थी सेवा पर विशेष ध्यान दिया। जाे आश्रम में सुचारू रूप से चल रही है। अंत महंत जन्मेजय शरण ने आए हुए संताें का स्वागत-सत्कार किया।पुण्यतिथि पर मुख्य रूप पूर्व सांसद निर्मल खत्री, लक्ष्मणकिला धीश महंत मैथिलीरमण शरण, जगतगुरू स्वामी रामदिनेशाचार्य, श्री राम वल्लभा कुंज के अधिकारी राजकुमार दास, बड़ाभक्तमाल महंत अवधेश कुमार दास, मंगल पीठाधीश्वर कृपालु रामभूषण दास, जगन्नाथ मंदिर महंत राघव दास, संकटमोचन के राष्ट्रीय अध्यक्ष संजय दास, हरिद्वारी पट्टी महंत मुरली दास, महंत अर्जुन दास, महंत मनीष दास, महंत शशिकांत दास, महंत गिरीश दास, महंत सीताराम दास त्यागी, महंत राजूदास हनुमानगढ़ी, हेमंत दास, श्यामासदन पीठाधीश्वर महंत श्रीधर दास, महंत विवेक आचारी, महंत अवधकिशाेर शरण, महंत रामलाेचन शरण, महंत भूषण दास, स्वामी छविराम दास, महंत जनार्दन दास, महंत रामदास करतलिया, महंत बलराम दास, महंत सत्येंद्र दास वेदांती, महंत उत्तम दास, नागा नंदराम दास, नागा रामलखन दास, महंत उद्धव शरण आदि उपस्थित रहे।