: मन की व्यथा भुलाकर प्रभु की कथा में लगाए मन तो दु:ख होगे दूर:रत्नेशप्रपन्नाचार्य
Sun, Jul 3, 2022
अयोध्या। भगवान के दिव्य गुणानुवादों के श्रवण, मनन और चिंतन से जीवन में शुभता, श्रेष्ठता और दिव्यता का आरोहण होता है। अतः इहलौकिक एवं पारलौकिक अनुकूलताओं के लिए भगवान का स्मरण प्रतिपल करते रहें। उक्त बातें जगद्गुरू रत्नेशप्रपन्नाचार्य जी महाराज ने द्वारिकाधीश मंदिर,राजघाट में चल रहे श्रीमद्वाल्मीकीय रामायण कथा के तृतीय दिवस में कही।रत्नेशप्रपन्नाचार्य ने कहा कि मनुष्य को हमेशा भगवान का चिंतन करना चाहिए। भगवान का चिंतन करने से धीरे-धीरे उनके गुण हममें आने लगते हैं। यदि मनुष्य वास्तविक शांति चाहता है, तो उसके चिंता को घटाकर चिंतन को बढ़ाना होगा। चिंता और चिता में कोई अंतर नहीं हैं। चिंता मनुष्य को जिंदा जलाती है और चिता मरे हुए को। जीव चिंता छोड़कर भगवान का चिंतन करे। चिंतन, भजन और मनन करने से काम, क्रोध, लोभ और मोह से मुक्ति मिलती है।उन्होंने कहा कि तब ही प्रभु की भक्ति में मन लगता है। मन की व्यथा भुलाकर प्रभु की कथा में मानव मन लगाए तो उसके दु:ख दूर होते हैं। परमात्मा का कोई आदि है न कोई अंत, वे तो निराकार स्वरूप हैं। भक्त उनका जिस रूप में स्मरण करता है वे उसे उसी रूप में दर्शन देते हैं। आत्मा-परमात्मा का सीधा संबंध है। जब तक मनुष्य अपनी आत्मा के विकार और मन को शुद्ध नहीं करता है, उसे परमात्मा की प्राप्ति नहीं हो सकती। जगद्गुरु जी ने कहा कि ईश्वर के गुणों का ज्ञान प्राप्त करने का प्राचीन उपाय तो वेद व उपनिषद आदि ग्रन्थ ही हैं। वेद व वेदभाष्य का अध्ययन कर के अनन्त गुणों वाले ईश्वर के अनेकानेक गुणों का ज्ञान प्राप्त होता है। ईश्वर के स्वरूप पर दृष्टि डालें तो ज्ञान हो जाता है।कथा के अंत में धूमधाम से श्रीराम जन्मोत्सव मनाया गया। इस मौके पर जगद्गुरू रामानुजाचार्य स्वामी सूर्य नारायणाचार्य जी,स्वामी शशिधराचार्य जी,स्वामी अनिरुद्धाचार्य करतलिया बाबा सहित बड़ी संख्या में संत साधक मौजूद रहें।
: उदयपुर कांड का फैसला एक हफ्ते हो नही तो कानून अपने हाथ में लूंगा :परमहंस
Thu, Jun 30, 2022
मामला फास्ट्रैक पर हो जिससे फैसला एक हफ्ते हो अन्यथा मै कानून अपने हाथ में लूंगा और इन दरिंदाें काे साै गुना ज्यादा तड़पाकर दंड दूंगा: जगतगुरु परमहंस आचार्य
अयाेध्या। उदयपुर राजस्थान की घटना पर तपस्वी छावनी पीठाधीश्वर जगतगुरु परमहंस आचार्य ने गहरा आक्रोश जताया है। परमहंस आचार्य बुधवार काे अपने आश्रम पर मीडिया से मुखातिब होते हुए कहा कि कन्हैयालाल की हत्या में शामिल दाेनाें हत्यारों को फांसी की सजा दी जाए। इस मामले काे फास्ट्रैक में एक हफ्ते के अंदर सुनवाई करके इनकी सजा मुकर्रर हाे। यदि ऐसा नही हाेता है। ताे मैं कानून अपने हाथ में लूंगा और इन दरिंदाें काे साै गुना ज्यादा तड़पाकर दंड दूंगा। आईपीसी की धारा 97 में है। अगर परिवार के ऊपर हमला हाेता है। ताे आप कानून हाथ में ले सकते हैं। उन्होंने कहा कि जिस तरह से कन्हैयालाल टेलर की दाे जेहादियों द्वारा निर्मम और नृशंस तरीके से गला काटकर हत्या की गई है। इससे मैं बहुत आहत हूं। इन जेहादियों ने वीडियो जारी करके देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का सर कलम करने की धमकी भी दिया है। अब हिंदू चुप नही बैठेगा। मेरी मांग है कि इन दरिंदाें काे तत्काल फांसी की सजा दी जाए। नही ताे मैं कानून हाथ में लेकर इन्हें फांसी पर चढ़ा दूंगा। इसके लिए देश का साै कराेड़ हिंदू हमारे साथ है। उन्होंने कहा कि सभी हिंदू हमारे परिवार हैं। एक हजार सालाें से हिंदुओं की हत्याएं हाे रही हैं। जाे अब बर्दाश्त से बाहर है। नूपुर शर्मा देश की बेटी है। उस पर अभद्र टिप्पणी करने वाले बाज आ जाएं। नही ताे एक बार माता सीता के लिए राक्षसों का वध हुआ था। अब देश की बेटी नूपुर शर्मा के सम्मान के लिए जेहादियों का वध हाेगा। इसके लिए देश का पूरा हिंदू समाज तैयार है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हमारे देश के गाैरव हैं। जेहादियों द्वारा उनका सर कलम करने की धमकी से मेरा खून खाैल रहा है। जेहादी मानसिकता के लोग कानून के दायरे में आ जाएं।
: शिद्दत से शिरोधार्य हुए महंत अम्बर दास
Thu, Jun 30, 2022
रामकचहरी चाराें धाम मंदिर के संस्थापक महंत स्वामी अम्बर दास की पुण्यतिथि पर संतो ने किया नमन
अयोध्या। रामनगरी के रामकाेट स्थित रामकचहरी चाराें धाम मंदिर के संस्थापक महंत स्वामी अम्बर दास महाराज काे पुण्यतिथि पर शिद्दत से याद किया गया। बुधवार को मंदिर परिसर में संताें ने साकेतवासी महंत के चित्रपट पर पुष्पांजलि अर्पित कर नमन किया। साथ ही कृतित्व और व्यक्तित्व पर प्रकाश भी डाला। इस माैके पर रामकचहरी के महंत शशिकांत दास व पत्थर मंदिर के महंत मनीष दास ने कहाकि संस्थापक महंत विलक्षण प्रतिभा के धनी संत थे। उन्होंने अयाेध्यानगरी में इस विशाल आश्रम की स्थापना किया। इनके बारे में जितना भी कहा जाए वह कम ही हाेगा। पुण्यतिथि पर भण्डारे का आयाेजन हुआ, जिसमें संताें व भक्ताें ने प्रसाद पाया। आये हुज अतिथियों का स्वागत-सत्कार मंदिर के महंत शशिकांत दास व महंत मनीष दास ने किया। इस अवसर पर मणिरामदास छावनी के महंत कमलनयन दास, रंगमहल महंत रामशरण दास, जगदगुरू रामानन्दाचार्य स्वामी रामदिनेशाचार्य, नाका हनुमानगढ़ी के महंत रामदास, श्रीरामवल्लभाकुंज अधिकारी राजकुमार दास, मंगल भवन सुंदर सदन पीठाधीश्वर महंत कृपालु रामभूषण दास,बावन मंदिर के महंत वैदेही बल्लभ शरण,महंत राजीव लोचन शरण, जगन्नाथ मंदिर महंत राघव दास, महंत अर्जुन दास, महंत रामकुमार दास, हनुमानगढ़ी के वरिष्ठ पुजारी हेमंत दास,महंत रामकेवल दास, रामायणी राममंगल दास, महंत रामप्रकाश दास, महंत परशुराम दास, स्वामी दिलीप दास, पार्षद रमेश दास, अनुज दास व संजय शुक्ला आदि उपस्थित रहे।