: महंत दयारामदास को संतो ने किया नमन
Sun, Jun 26, 2022
23वीं पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि सभा के साथ हुआ वृहद भंडारा
अयाेध्या। प्रसिद्ध पीठ परमहंस आश्रम, वासुदेवघाट में शनिवार को साकेतवासी महंत दयारामदास महाराज की 23वीं पुण्यतिथि श्रद्धापूर्वक मनाई गई। पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया, जिसमें अयाेध्याधाम के विशिष्ट संत-महंत व धर्माचार्यों ने पूर्वाचार्य महंत काे भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए नमन किया। संताें ने पूर्वाचार्य के कृतित्व-व्यक्तित्व पर प्रकाश भी डाला। परमहंस आश्रम के वर्तमान पीठाधीश्वर महंत रामानंद दास महाराज ने कहा कि उनके गुरूदेव अप्रतिम प्रतिभा के धनी संत रहे। वह भजन-साधना में तल्लीन रहा करते थे। भगवान सीताराम के प्रति उनकी अटूट भक्ति रही है। उनके जैसा उदार व्यक्तित्व का संत मिलना। आज के समय में बहुत ही मुश्किल है। सरलता ताे उनमें देखते हुए झलकती थी। अयाेध्यानगरी में एक आश्रम की स्थापना कर उसका सर्वांगीण विकास किया। वह मंदिर के उत्तराेत्तर विकास में आजीवन लगे रहे। गुरूदेव हम सबके बीच में नही हैं। लेकिन उनकी यश और कीर्ति सदैव रहेगी। उनका अनुसरण कर मैं आगे बढ़ रहा हूं। आश्रम में गाै, संत, विद्यार्थी, आगंतुक सेवा सुचारू रूप से चल रही है। पुण्यतिथि पर काफी संख्या में संताें और भक्तों ने प्रसाद ग्रहण किया। मठ के व्यवस्थापक रामउजागर दास महाराज द्वारा संताें का स्वागत-सत्कार किया गया। इस अवसर पर मणिरामदास छावनी उत्तराधिकारी महंत कमलनयन दास, बावन मंदिर महंत वैदेहीवल्लभ शरण, जगतगुरु रामानन्दाचार्य स्वामी रामदिनेशाचार्य, मंगलभवन सुंदर सदन पीठाधीश्वर कृपालु रामभूषण दास, बधाई भवन महंत राजीव लाेचन शरण, महंत हरिभजन दास, महंत सीताराम दास, महंत रामकुमार दास, महंत अर्जुन दास, महंत शशिकांत दास, महंत मनीष दास, स्वामी छविराम दास, पार्षद पुजारी रमेश दास, पार्षद महेंद्र शुक्ला, संतदास, सूरज दास आदि माैजूद रहे।
: पौराणिक पीठ दंतधावन कुंड का विवाद आया सामने
Fri, Jun 24, 2022
दंतधावन कुंड मंदिर के पौराणिक से हो रहा खेल, गद्दी की परम्परा मर्यादा हो रही तार तार
अंकुराचारी
महंत विवेक आचारी
देवोत्तर संपत्ति का विक्रय करते हुए करोड़ों की संपत्ति कर दी नष्ट भ्रष्ट
मंदिर की सम्पत्ति का नही होने दिया जायेगा दोहन : अंकुराचारी
अयोध्या। अयोध्याधाम में मंदिरों के संपत्ति विवाद का प्रकरण आए दिन आता रहता है। यहां बहुत कम ही ऐसे मंदिर होंगे, जिनका विवाद कोर्ट कचहरी में नहीं चल रहा होगा। शुक्रवार को पौराणिक पीठ दंतधावन कुंड का मामला सामने आया। इसको लेकर आचारी सगरा, कुशमाहा निवासी अनुभव पांडेय उर्फ अंकुराचारी ने महंत माधव दास पूर्व प्रधानमंत्री निर्वाणी अनी अखाड़ा इमली बगिया हनुमानगढ़ी में प्रेसवार्ता के दौरान बताया कि दंतधावन कुंड मंदिर अयोध्या का अत्याधिक प्राचीन मंदिर है। जो कि विरक्त परंपरा की गद्दी है। स्व. जय कृष्णाचारी दंतधावन कुंड के महंत एवं सरवराहकार थे। जो स्वयं विरक्त व बाल ब्रह्मचारी के तौर पर गद्दीनसीन थे। उनकी मृत्यु सन 1959 में हुई। लेकिन मृत्यु से पूर्व उन्होंने दो वसीयतनामा लिखा था। पहली वसीयत 19 जनवरी 1959 को लिखा, जिसमें नाबालिक नारायणाचारी को निहंग, विरक्त , बालब्रह्मचारी, सर्वरहकार एवम अनंताचारी को वली नामित किया। जिसे 27 जून 1959 की वसीयत से निरस्त किया और अपनी समस्त जायदाद ठाकुर जी को समर्पित कर दिया एवं अपने बाद के लिए निहंग, विरक्त बाल ब्रह्मचारी सरवराहकार नारायणाचारी को चेला बनाकर। नाबालिग होने के कारण एक वली सुदर्शन दास आचारी को नामजद कर ट्रस्ट का गठन, मंदिर एवं समस्त संपत्ति की देखरेख के लिए कर दिया, जिसमें सार्वजनिक देवोत्तर संपत्ति मंदिर के ट्रस्टीयान को हक दिया कि यदि वली या सरवराहकार में किसी प्रकार की बुराई या बदचलनी पाई जाए तो उसे हटा दें एवं स्थान खानदान से अन्य योग्य विरक्त को गद्दी पर बैठा दे। उन्होंने बताया कि डीड के विपरीत महंथ व सरवराहकार नारायणाचारी ने गृहस्थ जीवन जिया। अपने परिवार के भरण-पोषण के लिए भगवान की संपत्ति में अनगिनत बैनामे किए, जिसका अधिकार उनको को नहीं था। आगे चलकर ट्रस्ट के अस्तित्व को समाप्त कर दिया। देवोत्तर संपत्ति का विक्रय करते हुए ठाकुरजी के करोड़ों की संपत्ति नष्ट भ्रष्ट कर दी। 14 अगस्त 1986 को एक वसीयत विवेकाचारी को सरवराहकारी एवम वली अनुरागाचारी पुत्र रामचंद्राचारी का तथ्य गोपन करके तहरीर कर रजिस्ट्री करा दिया। जो कि पीठ का अपमान करने का प्रयास मात्र है। महंत नारायणाचारी ने अपने तीन बेटों में से सबसे छोटे बेटे विवेक को सरवराहकार लिखा एवं अपने सबसे बड़े बेटे कौस्तुभ को अपने ही बड़े भाई रामचंद्र आचारी का बेटा लिखते हुए वली बना दिया। जो न तो रामचंद्र आचारी का बेटा रहा। न ही वसीयत के समय बालिग था। 1994 से मंदिर की संपत्ति का मुकदमा चल रहा है, जिसका वर्तमान समय में स्थगन आदेश है। क्योंकि ठाकुर जी के संपत्ति के अधिकारी लाखों शिष्य हैं। इसलिए डीड के अनुसार ट्रस्ट को पुनर्जीवित करके खानदान से विरक्त वारिस को मंदिर का महंत बनाया जाए। इससे ठाकुर जी की संपत्ति की रक्षा हो सके। सार्वजनिक कार्य के लिए इस्तेमाल हो सके। जो सनातन धर्म की मर्यादा के अनुरूप हो। उन्होंने कहा कि दंतधावन कुंड मंदिर की सम्पत्ति ट्रस्ट और सवा लाख जुड़े शिष्यों की सम्पत्ति है। इसका दोहन नही होने दिया जायेगा। इसके लिए मैं लगातार आवाज उठा रहा हूं।
लगाए जा रहे सभी आरोप फर्जी : विवेक आचारी
-दंतधावन कुंड आचारी मंदिर के वर्तमान पीठाधीश्वर महंत विवेक आचारी ने कहा कि मंदिर के नाम कोई ट्रस्ट नही है। मंदिर के नाम 27 मौजा है। यानि कुल मिलाकर 22 हजार एकड़ जमीन थी। अगर किसी प्रकार का ट्रस्ट होता। तो वे जमीनें सीलिंग में न जाती। जो चली गई हैं यह स्थान गृहस्थ परंपरा का स्थान है। जो रामानुज सम्प्रदाय के श्री परंपरा से संबंधित है। यह उत्तर भारत की प्रधानतम पीठ है। हम रामानुज संप्रदाय के बड़गल से हैं। मैं आचारी मंदिर में 13वीं पीढ़ी का महंत हूं। हम लोग भगवान लक्ष्मी नारायण के उपासक हैं। पूरे देश में मठ से जुड़े हुए ढ़ाई लाख परिवार है। जो समय-समय पर उत्सव में सम्मिलित होते हैं। उन्होंने कहा कि जितने भी आरोप लगाए जा रहे हैं। वह सब फर्जी व मनगढंत हैं। सारा प्रोपेगेंडा मंदिर और मंदिर की जमीन कब्जियाने के उद्देश्य से रचा जा रहा है। सब कुछ बर्दाश्त है। लेकिन अगर ठाकुरजी के प्रति कोई गलत करेगा। तो उसे कत्तई बर्दाश्त नही किया जायेगा। जो लोग हमारे ऊपर आरोप लगा रहे हैं। उनके ऊपर खुद कई गंभीर केस चल रहे हैं। जल्द ही इनके खिलाफ कार्रवाई करवायी जायेगी।
: कमिश्नर की चाहत, उनके सरकारी बंगले को सजाने में खर्च हो एक करोड़
Fri, Jun 24, 2022
चीफ इंजीनियर ने लगायी आपत्ति तो हटवा दिया कमिश्नर ने
अवस्थापना निधि के प्रस्ताव में दी थी धनराशि खर्च करने की मौखिक स्वीकृति
जिस ठेकेदार को मिले दर्जनों नोटिस उसे दे दिए मनमानी नंबर
एलडीए में चहेते ठेकेदारों को संरक्षण देने के भी लगते रहे हैं आरोप
पहले भी विवादों में रहे हैं कमिश्नर रंजन कुमार
लखनऊ। एक ओर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अपने मंत्रियों, विधायकों और अफसरों को फिजूलखर्ची न करने की हिदायत दे रहे हैं वहीं दूसरी ओर लखनऊ कमिश्नर और एलडीए अध्यक्ष रंजन कुमार ने अपने सरकारी आवास को सजाने-संवारने के लिए एलडीए की अवस्थापना निधि प्रस्ताव में एक करोड़ से अधिक की धनराशि खर्च करने की मौखिक स्वीकृति दी है। यही नहीं वे न केवल एलडीए की बोर्ड और सामान्य बैठकों में जबरन दखल देते हैं बल्कि अपने चहेते ठेकेदारों को संरक्षण भी दे रहे हैं। जिस ठेकेदार को दर्जनों नोटिस मिल चुके हैं उसे कमिश्नर ने मनमानी तरीके से बेहतर होने का नंबर तक दे दिया। इसके पहले भी रंजन कुमार पर गंभीर आरोप लगते रहे हैं। सवाल यह है कि क्या सरकार इस मामले की जांच कराकर कार्रवाई करेगी या मामले को ठंडे बस्ते में डाल देगी।
एलडीए की एक के बाद एक कारगुजारियों और घपलों से सरकार की लगातार किरकिरी हो रही है। ताजा मामला कमिश्नर रंजन कुमार से जुड़ा है। कमिश्नर रंजन कुमार ने एलडीए की अवस्थापना निधि से राज्य सम्पत्ति द्वारा खुद के लिए आवंटित बंगले को सजाने-संवारने के लिए एक करोड़ से अधिक की धनराशि खर्च करने की मौखिक स्वीकृति दी थी। एलडीए के चीफ इंजीनियर (सिविल) इंदुशेखर सिंह ने इस प्रस्ताव पर 21 जून को आपत्ति लगा दी। इसके अगले दिन ही एलडीए की बैठक के बाद चीफ इंजीनियर इंदुशेखर सिंह को हटा दिया गया। इसकी सूचना सरकार तक पहुंच गयी है। इससे हडक़ंप मच गया है। यही नहीं कमिश्नर पर एलडीए की बैठकों में जबरन दखल देने और अपने चहेते ठेकेदारों को लाभ पहुंचाने के भी आरोप लगते रहे हैं। उन्होंने ऐसे ठेकेदारों के कामों को बेहतर नंबर दिए जिन्हें दर्जनों नोटिस मिले चुके हैं। इसके कारण अन्य अधिकारी भी दबाव में आकर दागी ठेकेदारों को मनमानी नंबर देते हैं। अब यह मामला सीएम योगी आदित्यनाथ तक पहुंच चुका है। गौरतलब है कि एलडीए के चीफ इंजीनियर से मनमाने ढंग से काम करवाने को लेकर विवादों में आए रंजन कुमार पर पहले भी गंभीर आरोप लगते रहे हैं।
इस मामले में कमिश्नर रंजन कुमार ने कहा कि मुझे इसकी जानकारी नहीं है। सभी कमिश्नरी में कैंप ऑफिस है लेकिन लखनऊ में नहीं है। संभवत: इसी कैंप कार्यालय की बात है। इसमें कोई सजावट नहीं, जरूरी उपकरण के लिए एलडीए ने खुद प्रस्ताव बनाया है।
रंजन कुमार पर महिला अफसर ने लगाए थे गंभीर आरोप
जिस समय रंजन कुमार गोरखपुर के डीएम थे उस दौरान उनकी ही जूनियर महिला आईएएस अफसर ने उन पर गंभीर आरोप लगाए थे। महिला अफसर की शिकायत के मुताबिक, डीएम रंजन कुमार उन्हें रात के दो बजे फाइल देखने के बहाने आवास पर बुलाते थे। इसके बाद उनसे घर पर खाना बनाने को कहते थे। महिला अफसर की शिकायत के मुताबिक, उनसे डीएम कहते थे कि तुम्हें शहर में तैनाती इसलिए दी गई है ताकि तुम्हारा चेहरा मेरे सामने रहे। रंजन कुमार महिला अफसर को एक-दो बार फिल्म दिखाने भी ले गए थे।
तत्कालीन प्रमुख सचिव नियुक्ति से मिली थी पीडि़ता
तत्कालीन ट्रेनी आईएएस अफसर व वर्तमान में एक जिले की कलेक्टर अपने पति के साथ प्रमुख सचिव नियुक्ति से भी मिलीं थी। हालांकि बाहर निकलने पर उन्होंने कोई भी बात बताने से इनकार कर दिया था। यही नहीं मंडल के एक सीनियर आईएएस से भी पीडि़ता ने शिकायत की थी। सूत्रों के मुताबिक, पीडि़ता ने मंडल के सीनियर अफसर से शिकायत की थी। उस अधिकारी ने माना था कि डीएम का रवैया ठीक नहीं था और कहा था कि पीडि़ता उनकी बेटी की तरह है।
ऐसे बनाया गया था प्रोजेक्ट
प्रोजेक्ट के मुताबिक कमिश्नर के बटलर पैलेस के बंगला नंबर ए-3 का रंग रोगन होना है। यह राज्य संपत्ति विभाग का है। एलडीए के एक्सईएन ओपी मिश्रा, एई विपिन त्रिपाठी ने इसे संवारने के लिए 81 लाख 79 हजार 306 रुपये का इस्टीमेट तैयार किया था। बिजली, बाथरूम के कामों के लिए करीब 20 लाख का प्रोजेक्ट अलग से तैयार किया गया था।