: शिद्दत से शिरोधार्य हुए बाबा रामप्रसादाचार्य
Thu, Aug 4, 2022
विन्दुगद्यायाचार्य स्वामी देवेंद्र प्रसादाचार्य जी महाराज के अध्यक्षता में संत धर्माचार्यों ने किया नमन
अयोध्या। चक्रवर्ती सम्राट राजा दशरथ जी के राज महल महल बड़ा स्थान के संस्थापक आचार्य पूज्य बाबा रामप्रसादाचार्य जी महाराज की जयंती पर रामनगरी के संत-महंतों ने उन्हें श्रद्धापूर्वक याद कर आचार्य श्री की मूर्ति पर माल्यार्पण कर नमन किया। दशरथ महल के वर्तमान महंत विन्दुगद्यायाचार्य स्वामी देवेंद्र प्रसादाचार्य जी महाराज के अध्यक्षता में संतों ने किया नमन।इस अवसर पर संतों-महंतों व श्रद्धालुओं को विन्दु सम्प्रदाय के संस्थापक बाबा रामप्रसादाचार्य की जीवनगाथा सुनाई। उन्होंने कहा कि तीन सौ वर्ष पूर्व बाबा रामप्रसाद दास महाराज ने श्री जानकी की कठिन तपस्या कर उनकी कृपा प्राप्त की। श्री जानकी ने महाराज श्री को स्वयं अपने पैर के अंगूठे से तिलक लगाकर आशीर्वाद प्रदान किया था।
श्री महाराज जी की जयंती के अवसर पर दशरथ महल में अयोध्या के संतो महंतों ने महाराज जी की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया और इस अवसर पर वर्तमान महंत विंदुगद्यायाचार्य स्वामी देवेंद्रप्रसादाचार्य ने बताया कि एक बार महाराज जी संत परंपरा के अनुसार टीका लगाना भूल गए और मां जानकी प्रत्यक्ष रूप से प्रकट होकर के उनको टीका लगाया। उन्होंने बताया कि श्री महाराज जी को गोस्वामी तुलसीदास जी महाराज के अवतार स्वरूप में माना जाता है। महाराज जी के जयंती के अवसर पर आए सभी संतो महंतों का स्वामी देवेंद्रप्रसादाचार्य के कृपापात्र शिष्य मंगलभवन पीठाधीश्वर महंत कृपालु राम भूषण दास जी स्वागत सत्कार किया। जानकी घाट बड़ा स्थान के महंत जन्मेजय शरण, रंगमहल पीठाधीश्वर रामशरण दास, दिगंबर अखाड़ा के महंत सुरेश दास, बड़ा भक्तमाल के महंत अवधेश कुमार दास ,महंत शशिकांत दास, महंत मनीष दास, महंत राम कुमार दास, हनुमानगढ़ी के पुजारी पार्षद रमेश दास सहित सैकड़ों महंतों ने स्वामी जी के प्रतिमा पर माल्यार्पण कर आशीर्वाद प्राप्त किए।
: तुलसीदास जी हिंदी साहित्य के एक महान कवि थे: महंत विवेक आचारी
Thu, Aug 4, 2022
दंत धावन कुंड स्थित तुलसी चौरा मंदिर में धूमधाम से मनाया गया गोस्वामी तुलसीदास जी जन्म जयंती
अयोध्या। प्रभु श्रीराम को जन-जन तक रामचरित मानस से पहुंचाने वाले गोस्वामी तुलसीदास की जयंती रामनगरी अयोध्या में धूमधाम से मनाई गई। तुलसी चौरा मंदिर में तुलसी के जन्मोत्सव पर सुबह से बधाईयां बजी।
रामनगरी के दंत धावन कुंड स्थित तुलसी चौरा मंदिर जहां पर गोस्वामी तुलसीदास जी ने मानस की प्रथम टीका की थी। उसी पवित्र स्थान पर आज गोस्वामी तुलसीदास जी की जयंती बड़े ही श्रद्धा भाव के साथ मनाई गई। जिसमें पूरे मंदिर को फूलों से सजाया गया। तो वही देर शाम कवि सम्मेलन व गोस्वामी तुलसीदास जी जीवन चरित्र पर विद्धानों द्धारा गोष्ठी किया गया। यह आयोजन मंदिर के पीठाधीश्वर महंत विवेक आचारी महाराज के संयोजन में हुआ। दंत धावन कुंड पीठाधीश्वर महंत विवेक आचारी महाराज कहते है कि सावन माह में शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि को तुलसीदास जयंती मनाई जाती है। उन्होंने कहा कि तुलसीदास जी हिंदी साहित्य के एक महान कवि थे। रामचरित मानस जैसे महाकाव्य की रचना गोस्वामी तुलसीदास ने ही की थी। तुलसीदास की इस रचना ने उन्हें अमर कर दिया। रामचरित मानस में तुलसीदास जी ने मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम के जीवन का काव्य रूप में वर्णन किया है। कहा जाता है कि गोस्वामी तुलसीदास को प्रभु श्रीराम के साक्षात दर्शन हुए थे। तुलसीदास जी ने कवितावली, दोहावली, हनुमान बाहुक, पार्वती मंगल, रामलला नहछू आदि कई रचनाएं कीं। उनके दोहे भी जन-जन की जुबां पर आज भी हैं। उनके दोहों ने व्यक्ति एवं समाज को अच्छे संदेश दिए हैं। उनके दोहों से अच्छी सीख मिलती हैं। इस मौके पर कैस्तुभ मणि आचारी, बादल आचारी, महंत दिलीप दास त्यागी सहित बड़ी संख्या में संत साधक मौजूद रहें।
: श्री राम जन्मभूमि आंदोलन से जुड़े लोगों की शरणस्थली रही हिंदूधाम
Thu, Aug 4, 2022
हिंदूधाम में वशिष्ठपीठाधीश्वर की गद्दी पर डॉ राघवेश दास महाराज का आज होगा पट्टाभिषेक और महंताई
अयोध्या। श्री राम जन्मभूमि आंदोलन जुड़े अशोक सिंघल पूर्व गृहमंत्री लालकृष्ण आडवाणी और विनय कटियार जैसे नेताओं के यादों को अपने अंदर समेटे हिंदूधाम में वशिष्ठपीठाधीश्वर ब्रह्मर्षि वेदांती डॉ रामविलास दास के सानिध्य में समारोह मूर्धन्य विद्वान रामानंद दास के दिशा निर्देशन में रामार्चा पूजन के साथ प्रारंभ हुआ। ब्रह्म मुहूर्त की पावन बेला में वैदिक आचार्यों ने रामार्चा पूजन के बेदी का निर्माण करके मुख्य यजमान डॉ विजय कुमार पाठक शाहजहांपुर व उनकी धर्मपत्नी अनुराधा पाठक द्वारा पूजन प्रारंभ करवाया। रामार्चा पूजन में ब्रह्मर्षि डॉ रामविलास वेदांती और वशिष्ठ पीठाधीश्वर पद पर विभूषित होने वाले डॉ राघवेश दास महाराज ने भी रामार्चा पूजन किया। 5 अगस्त को दिन में 11 बजे संतो महंतों एवं वरिष्ठ नागरिकों के समक्ष पट्टाभिषेक और महंताई समारोह होगा। जिसमें हजारों शिष्य भक्त लोग सम्मिलित होंगे।
डॉ राघवेश दास वेदांती महाराज का बचपन से ही सनातन धर्म के प्रति अगाध अनुराग था और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के विचारों से प्रभावित होकर 1989 में शाखा में जाने लगे तथा 2009 में तृतीय वर्ष प्रशिक्षण नागपुर से प्राप्त किया।1993 में अयोध्या आए और श्री महाराज जी के सानिध्य में संस्कृत का अध्ययन करने लगे। 1995 वें में वशिष्ठ पीठाधीश्वर डॉ रामविलास वेदांती महाराज के शिष्य बने और दिव्य कला कुंज संस्कृत विद्यालय से वेदांत में आचार्य की डिग्री ली और उसके बाद वाराणसी में संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय गए जहां उन्होंने श्रीमद् भगवते योगस्वरुप विर्मश विषय से पीएचडी की उपाधि वेदांत विभाध्यक्ष पंडित राम किशोर त्रिपाठी के दिशानिर्देश में प्राप्त की। श्री त्रिपाठी जी भी महाराज जी को आशीर्वाद देने के लिए महंताई समारोह में पधार रहे है।1998 में वेदांती महाराज ने राघवेश दास को वशिष्ठपीठ का उत्तराधिकारी तकरुर सर्वराकार महंत बना दिया था। उन्होंने प्राथमिक संस्कृत की शिक्षा गरुड़ध्वज संस्कृत महाविद्यालय कटनी मध्य प्रदेश में हुई और उस विद्यालय के शिक्षक पंडित कृष्ण दास पांडे ,श्री विमलेन्दु प्रसाद प्यासी और राष्ट्रपति पुरष्कृत पण्डित रामनारायणाचर्य मिश्र जी आशीर्वाद देने के लिए पधार रहे है।