: महापौर ने सामने साफ कराई मुख्यामार्ग की नाली, गंदगी पर लगाई अधिकारियों को फटकार
Tue, Jun 21, 2022
योगा के आयोजन तक राम की पैड़ी में कैंप करेंगे स्वच्छता देवदूत
सरयूघाट, नागेश्वनाथ आदि मंदिरों की विशेष् सफाई अभियान की समीक्षा, बनेगी स्वच्छता हेल्पडेस्क, श्रद्धालुओं से लिया जाएगा फीडबैक
अयोध्या। 21 जून को राम की पैड़ी में होने वाले योग के महाकुंभ के कार्यक्रम स्थल का महापौर रिषिकेश उपाध्याय ने निरीक्षण किया। इस दौरान बड़ी संख्या में स्वच्छता देवदूत कर्मचारी महापौर के निर्देश का पालन करते हुए सफाई करते रहे। महापौर ने घंटों नयाघाट, बंधा तिराहा, रामकथा पार्क व पूरा सरयू तट का जायजा लिया। आरती स्थल व घाटों की सफाई को लेकर जिम्मेदारी तय की। नागेश्वर नाथ व कालेराम मंदिर गए। गलियों की सफाई से संतुष्ट रहे। नयाघाट क्षेत्र के मुख्यमार्ग के नालियों को सामने ही मेयर ने साफ कराया। कुछ खराब गुणवत्ता के निर्माण कार्य पर अधिकारियों को फटकारा। राम पैड़ी की साफ सफाई कराई। यहां पुरोहित समाज के लोगाें से बातचीत कर साफ-सफाई में सहयोग मांगा। श्रद्धालुओं का सहयोग करने को कहा। बंधा तिराहे पर बने शौचालय के भीतर जाकर सफाई देखी। गांधी पार्क के समीप लगे प्याऊ के सामने कूड़ा दान लगाने पर अधिकारियों को फटकार लगाई, इसे हटाने का निर्देश दिया। महापौर ने घाटों की विशेष सफाई कार्यक्रम को निरंतर क्रियान्वित करते रहने को कहा। दो दिन क्षेत्र में बड़ी संख्या में सफाई सफाई कर्मी रहेंगे। घाट पर नित्य शिफ्ट में कर्मियों की ड्यूटी लगाई जाती रहेगी। नोडल अधिकारी बनाए गए। घाटों के चेंजिंग रूप,शौचालय आदि का निरीक्षण किया। चेंजिंग रूम के रखरखाव करने के लिए टीम गठित की गई है। सफाई की मानीटरिंग को सेल बनाया गया। महापौर ने तीर्थयात्रियों से स्वच्छता को लेकर फीड बैक लेने को कहा। यहां पर स्वच्छता हेल्प डेस्क बनायी जाएगी। कर्मचारियों का मोबाइल नंबर सार्वजनिक रहेगा। कहा कि सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने वालों पर कार्यवाही की जाए। रानी हो पार्क में पीएससी कैंप के समीप बने शौचालय व स्वच्छ जल उपलब्ध कराने को कहा। राम की पैडी पर अतिक्रमण को मुक्त कराने के लिए अधिकारियों को निर्देशित किया। महापौर ने दुकानदारों से बातचीत की। कहा कि आप सभी दुकान इस तरह लगाए, जिससे श्रद्धालुओं को असुविधा न हो। इस मौके पर क्षेत्रीय पार्षद महेंद्र शुक्ला, सहायक नगर आयुक्त अंकिता शुक्ला, भाजपा महानगर उपाध्यक्ष राकेश मणि त्रिपाठी, अधिशाषी अभियंता एमएन झा, सहायक अभियंता जलकल गिरीश तिवारी, जेई चंद प्रकाश मौर्या, एसएसआई कमल कुमार, एसआई राकेश कुमार, हरिवंश, विशाल भारती, महापौर के निजी सहायक गोविंद राज आदि मौजूद रहे।
: अरकम पायलट ट्रेनिंग के लिए आज न्यूज़ीलैंड हुआ रवाना
Mon, Jun 20, 2022
सोहावल पूर्व ब्लाक प्रमुख समाजसेवी फिरदौस अहमद खान के बेटे अरकम खान क्राइस्टचर्च में एयरलाइन अकैडमी में पायलट कोर्स के लिये न्यूजीलैंड रवाना
अयोध्या। बीकापुर विधानसभा के लोकप्रिय नेता जो अपने समाजसेवी के लिए न सिर्फ बीकापुर विधानसभा बल्कि आसपास के जिलों में भी मशहूर है हाजी फिरोज खान गब्बर जो समाजवादी पार्टी के नेता है। आज हाजी फिरोज़ खान गब्बर के छोटे भाई सोहावल विकासखंड के पूर्व ब्लाक प्रमुख समाजसेवी फिरदौस अहमद खान के पुत्र अरकम खान पायलट ट्रेनिंग के लिए न्यूजीलैंड रवाना हुए। अरकम खान न्यूजीलैंड के क्राइस्टचर्च में एयरलाइन अकैडमी में पायलट कोर्स से सम्बंधित पढ़ाई एवं ट्रेनिंग केरेगें। अरकम खान बचपन से ही पायलट बनना चाहते थे। 6 से 12 तक अरकम ने मुंबई के लोनावाला स्थित कैथिडरील विद्या स्कूल में पढ़ाई की है।
समाजसेवी फिरदौस खान ने बताया कि अरकम बचपन से ही पायलट बनना चाहता था। उसकी रूचि को देखते हुए पूरे परिवार ने निर्णय लिया कि उसे इस कोर्स से संबंधित अच्छी से अच्छी शिक्षा दिलाई जाएगी।जिसके तहत आज अरकम न्यूज़ीलैंड जा रहे हैं। न्यूजीलैंड के लिए रवाना होते समय अरकम के बड़े पिता हाजी फिरोज़ खान गब्बर, हाजी सरफराज़ खान, समाजवादी पार्टी के ज़िला उपाध्यक्ष एजाज़ अहमद, रौनाही प्रधान खुर्शीद खान, शोएब खान,एशात खान, जावेद खान, शोएब खान, नफीस ने बधाई दी।
: आसान नहीं है राहुल गांधी बनना
Mon, Jun 20, 2022
इसलिए चांदी का चम्मच फेंक ज़हर का प्याला पी रहे राहुल
निराशा, पराजय, आलोचना, गालियां और लम्बे संघर्ष के जितने कांटे चुभेंगे भविष्य में उतना लम्बा सत्ता का क़ालीन समय का चक्र बिछा देगा। सियासत का यही क़ायदा है। दूध, सोने और मरहूम ऐथलीट मिल्खा जैसी ख़ासियतें असरदार होती हैं। खूब स्वादिष्ट होने के लिए दूध को खूब खपना पड़ता है। कुंदन बनने के लिए सोने को आग में तपना पड़ता है। मिल्खा बनने के लिए हर सुबह की नींद त्यागनी पड़ती है। दौड़-दौड़ कर टांगों को पंख बना देना पड़ता है। सियासत भी ऐसी ही कुर्बानियां मांगती है। कुछ बड़ा पाने के लिए संघर्ष और पसीने की बली देनी पड़ती है। चांदी का चम्पच लेकर पैदा होना जुर्म नहीं है लेकिन यदि वक्त ने आपको संघर्षों की ट्रेनिंग नहीं दी तो चांदी के चम्मच वाले किसी भी क्षेत्र में टिकाऊ नहीं साबित होते।
सियासत के शिखर पर पंहुचने से पहले नरेन्द्र मोदी का जितना विरोध होता था राहुल गांधी का उनसे ज्यादा विरोध होने लगा है। नरेंद्र मोदी को चाय की भट्टी की तपिश, संघ के अनुशासित संघर्ष के बाद गुजरात के मुख्यमंत्री की कुर्सी मिली। इस तरह सीढ़िया तय करते हुए वो प्रधानमंत्री बने। लोकप्रियता के चरम पर पंहुचे और दोबार प्रचंड बहुमत से देश ने मोदी को प्रधानमंत्री बनाया।
राहुल गांधी वाकई चांदी का चम्मच लेकर पैदा हुए थे। बल्कि चांदी का चम्मच लेकर पैदा होने वालों के तसव्वुर में राहुल से बड़ा कोई चेहरा ही नहीं है। इस देश में राहुल के परिवार से बड़ा परिवार किसका था ? किसी का नहीं। आजादी की लड़ाई से लेकर भारत की लोकतांत्रिक व्यवस्था मे चुनी गई हुकुमतों के तख्त-ओ-ताज वालों के घराने के चश्मों चिराग हैं राहुल। प्रधानमंत्रियों की फसल देने वाली हिन्दुस्तान की सियासत की खानदानी जमीन में राहुल गांधी ने जन्म लिया। वो गांधी/नेहरू परिवार के वारिस हैं। भारत के प्रधानमंत्रियों की गोद में पला-बढ़ा ये शख्स अपनी जवानी की पहली अंगड़ाई प्रधानमंत्री की कुर्सी पर ले सकता था। तीस से चालीस वर्ष की मुद्दत तक किसी भी युवक का कैरियर तय हो चुका होता है। इस उम्र में वो मंत्री से लेकर प्रधानमंत्री तक बन सकते थे। लेकिन उन्होंने वो मिसाल गलत साबित कर दी कि मछली के बच्चे को तैरने की प्रक्टिस नहीं करनी होती है। उन्होने वक्त से खूब सीखा। दादी इंदिरा गांधी के खून के अक्स में सियासत का सियाह चेहरा देखा। पिता राजीव गांधी के टुकड़े टुकड़े हो चुके जनाजे में देश पर कुर्बान होने का जज्बा देखा। मां सोनिया गांधी के उपदेश को महसूस किया जिसमें उन्होंने कहा था कि सत्ता ज़हर है। राहुल के लिए सत्ता की डोर पकड़ना इतनी आसान थी जितना आसान एक बच्चे के लिए झुनझुना पकड़ना होता है। लेकिन उन्हें मंझना था, तपना था, आलोचनाएं सहनी थी और खूब संघर्ष करने का जुनून था। इसीलिए कांग्रेस की सत्ता में भी वो विपक्षी तेवरों में दिखे। एक अध्यादेश उन्हें जनहित मे नहीं लगा तो किसी विपक्षी नेता की तरह कांग्रेस सरकार का तैयार किया हुआ अध्यादेश उन्होंने फाड़ कर अपना विरोध प्रकट किया था। पिछले आठ-नौ साल से एक दौलतमंद और ताकतवर प्रचारतंत्र उन्हें पप्पू साबित कर के कभी मजाक उड़ाता है, कभी गालियां देता है, कही कटु आलोचना करता है। नकारात्मक छवि तैयार करने वाला ऐसा विष तेज़ाब की सूरत में राहुल गांधी के चांदी के चम्मच की छवि को गला चुका है। चुनावी पराजय ने उन्हें कभी हताश नहीं होने दिया। विपक्ष की सक्रिय भूमिका में वो जमीनी नेता बनते जा रहे हैं। गांधी परिवार का कोई एक भी नेता इतनी लम्बी विपक्षी भूमिका मे नहीं रहा जितना वो रहे। दूध खप रहा है, सोना आग मे तप कर कुंदन बन रहा है। एक कमजोर युवक दौड़-दौड़ कर विश्व विजेता मिल्खा बनने जा रहा है। एक जमाने में नरेंद्र मोदी की छवि को नकारात्मक बनाने, उनकी आलोचना करने वालों ने भी ये नहीं सोचा होगा कि गालियां और कटु आलोचनाएं आर्शीवाद बन जाती हैं। जहर नीलकंठ बना जाता है, अमृत बना देता है।
इसलिए ये भी हो हो सकता है कि संघर्षों, पराजय और आलोचनाओं की पराकाष्ठा सहने वाले राहुल गांधी को समय का चक्र नेहरू,इंदिरा,राजीव,अटल और मोदी से भी अधिक लोकप्रियता नेता बना दे! उनके विरोधियों ने जो उन्हें पप्पू का खिताब दिया है ये खिताब ही रंग ला सकता है। पप्पू नाम भारत की आम जनता का प्रतीक है। एक रिसर्च के मुताबिक ये नाम सबसे ज्यादा उपयोग होने वाला भारतीय नाम है।
कांगेस के युवराज का ताना खाने वाले राहुल गांधी का रविवार को जन्म दिन था। दिन, महीने और साल गुजर रहे हैं। विपक्षी राजनीति में सबसे अधिक सक्रिय और चर्चा मे रहने वाला कांग्रेस का ये नेता थक नहीं रहा, हार नहीं रहा और हताश नहीं हो रहा, बल्कि परिपक्व होता जा रहा है। ताजुब नहीं कि आलोचनाओं का गुबार छंटने के बाद राहुल गांधी भारत की आम जनता के सबसे बड़े लोकप्रिय नेता साबित हों।