: संकट मोचन सेना के कार्यवाहक अध्यक्ष पुजारी हेमंत दास ने महाप्रबंधक को गदा व स्मृति चिन्ह भेंट कर स्वागत किया
Fri, Jun 10, 2022
महाप्रबंधक ने अयोध्या व कैंट स्टेशनों पर निर्माणाधीन कामों का किया निरीक्षण व बैठक कर निर्माण कार्यों की समीक्षा की
अयोध्या रेलवे स्टेशन के सौन्दर्यीकरण एवं विस्तारीकरण परियोजना के पहले चरण का काम अंतिम दौर में है। इस बीच दूसरे चरण की योजना को भी लेकर भी दस्तावेजी तैयारियां शुरू हो गयी है। इसी सिलसिले में गुरुवार को नार्दन रेलवे के महाप्रबंधक आशुतोष गंगल अयोध्या पहुंचे। यहां आने से पहले उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से शिष्टाचार भेंट की। इस मौके पर रेलवे महाप्रबंधक गंगल ने अयोध्या रेलवे स्टेशन पर दूसरे चरण के प्रस्तावित विकास योजनाओं की जानकारी मुख्यमंत्री को दी।
इसके साथ रेलवे स्टेशन पर दो अतिरिक्त प्लेटफार्म के विस्तार के लिए चिह्नित नजूल भूमि व विस्तार के मार्ग में पड़ने वाले निजी भूमि के काश्तकारों की जमीन का अधिग्रहण कर रेलवे को उपलब्ध कराने का आग्रह किया। इसी कड़ी में उन्होंने प्रदेश के मुख्य सचिव दुर्गा शंकर मिश्र से भी मुलाकात कर जमीन की उपलब्धता शीघ्र सुनिश्चित कराने की मांग रखी। महाप्रबंधक गंगल ने यह जानकारी खुद मीडिया कर्मियों से साझा की।
उन्होंने अयोध्या रेलवे स्टेशन पर आयोजित संवाददाता सम्मेलन में बताया कि यहां से लौटकर लखनऊ में चीफ सेक्रेट्री के साथ दोबारा मीटिंग तय है जिसमें जमीन सहित कई विषयों पर विमर्श होना है। उन्होंने बताया कि यद्यपि मुख्यमंत्री व चीफ सेक्रेट्री पहले ही जमीन शीघ्रातिशीघ्र उपलब्ध कराने का आश्वासन दे चुके हैं।
उन्होंने बताया कि यह जमीन उपलब्ध होने पर दो अतिरिक्त प्लेटफार्म के विस्तार के अलावा प्रवेश द्वार व अन्य यात्री सुविधाएं विकसित की जाएंगी। निरीक्षण के पहले महाप्रबंधक ने भगवान रामलला व हनुमानगढ़ी का दर्शन पूजन किया। हनुमानगढ़ी पर संकट मोचन सेना के कार्यवाहक अध्यक्ष पुजारी हेमंत दास ने महाप्रबंधक को गदा व स्मृति चिन्ह भेंट कर स्वागत किया। महाप्रबंधक सपरिवार पुजारी हेमंत दास से आशीर्वाद लिये।
: गंगा दशहरा पर पंचाग्नि हठ योग का संतो ने किया विश्राम
Fri, Jun 10, 2022
धूनी विसर्जित व गंगा दशहरा पर त्यागी संतों ने मां सरयू को सवा कुंटल दूध का अभिषेक कर 7 सौ मीटर की चुनरी मां सरयू को चढ़ाई
अयोध्या। अयोध्या तपस्या की भूमि है यहां पर अनेक साधु संत हुए है। जिन्होंने अपने जप तप के बल पर पूरी दुनिया में अपने प्रभुत्व को स्थापित किया है। वैष्णो त्यागी संतो महात्माओं में पंचाग्नि में बैठकर साधना करने का बहुत महत्व है। पंचाग्नि साधना में महात्यागी संत अपने चारों तरफ गौ माता के गोबर के कंडे का गोला बनाकर ख्पर में अग्नि रखकर सर पर रख लेते हैं और खुले आसमान सूर्य के धूप में घंटों बैठकर जप तक करते है।यह साधना बसंत पंचमी से प्रारंभ होकर गंगा दशहरा तक चलती है।जो महात्मा पंचाग्नि तपस्या का संकल्प लेता है, उसे यह तपस्या 18 वर्षों तक लगातार करनी होती है। किसी कारण बस एक भी दिन खंडित होने पर पुनः यह प्रक्रिया एक से प्रारंभ होकर 18 वर्षों तक चलेगी। यह साधना खुले आसमान में होती है इसमें अपने चारों तरफ आग का गोला बनाकर सर पर अग्नि रखकर जपतप अनुष्ठान करना होता है। इसी क्रम में गंगा दशहरा पर्व पर रामनगरी में विभिन्न धार्मिक अनुष्ठान होते है। इस अवसर पर पंचाग्नि साधना का विश्राम भी होता है। बसंत पंचमी से शुरू होने वाली है तपस्या गंगा दशहरा को समाप्त होती है और पुनः अगले वर्ष बसंत पंचमी से ही प्रारंभ होती है। इस अवसर पर अवध उत्थान समिति के तत्वाधान में गंगा दशहरा के अवसर पर पंचाग्नि का विश्राम हवन पूजन के साथ किया गया और रुदौली के भाजपा विधायक रामचंद्र यादव के नेतृत्व में मां सरयू का अभिषेक जी किया गया।धूनी विसर्जित व गंगा दशहरा के अवसर पर तपस्या संतों ने मां सरयू को सवा कुंटल दूध का अभिषेक कर 7 सौ मीटर की मां को चुनरी चढ़ाई। वैदिक आचार्यों द्वारा 4 महीने से चल रही अनवरत तपस्या का पूजन अर्चन कर संकल्प द्वारा विसर्जन कराया गया।अवध उत्थान समिति के अध्यक्ष पंचाग्नि साधक महंत परशुरामदास ने बताया कि पंचाग्नि साधना विश्राम के अवसर पर मां सरयू का अभिषेक किया गया और हवन पूजन कर लगभग दर्जनभर संतों ने अपने इस साधना का विश्राम दिया फिर अगले वर्ष यह साधना बसंत पंचमी को प्रारंभ होगी। पंचाग्नि साधना विश्राम के अवसर पर ब्राह्मणों और संतों को प्रसाद भी पवाया गया। कार्यक्रम के यजमान समाजसेवी आशीष मौर्या सोनू जी ने कहा कि अयोध्या संतो और साधको की धरती है। भगवान श्री राम सबके है। आज अयोध्या विकास के मार्ग पर आगे बढ़ रही है। मेरा व मेरे परिवार का सौभाग्य है जो त्यागी संतों के दर्शन हुए आज हम सपरिवार मां सरयू का पूजन अर्चन कर अपने को धन्य मान रहे है। इस अवसर पर महंत धर्मदास, महंत विजय रामदास, महंत राम कुमार दास, श्री राम कथा के मर्मज्ञ चंद्रांशु जी महाराज, हनुमानगढ़ी के पुजारी रमेश दास, महंत राम बालक दास, रुदौली विधायक रामचंद्र यादव, टांडा की पूर्व विधायक संजू देवी, समाजसेवी आशीष मौर्या उर्फ सोनू, नंदकिशोर जयसवाल, विकास सिंह, अमर सिंह, भाजपा के जिला मंत्री विपिन सिंह बबलू, सियाराम यादव, मस्तराम यादव, धर्मवीर वर्मा सहित सैकड़ों संत महंत भक्त वृंद उपस्थित रहे।
: महंत रामबचन दास महाराज को संतो ने किया नमन
Fri, Jun 10, 2022
श्रीरामकृष्ण मंदिर सेवा ट्रस्ट के संस्थापक की 15 वीं पुण्यतिथि श्रद्धा पूर्वक मनाई गई
अयाेध्या। श्रीरामकृष्ण मंदिर सेवा ट्रस्ट, रामकाेट के संस्थापक महंत रामबचन दास महाराज काे 15 वीं पुण्यतिथि पर संताें ने भावभीनी श्रद्धांजलि दी। इस माैके पर गुरूवार को मंदिर परिसर में श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया। सभा में रामनगरी के संत-महंत व विशिष्टजनाें ने साकेतवासी महंत के चित्रपट पर श्रद्धासुमन अर्पित किया। संताें ने उनके कृतित्व-व्यक्तित्व पर प्रकाश डाला। श्रीरामकृष्ण मंदिर के अधिकारी महामंडलेश्वर महंत गणेशानंद दास महाराज ने कहा कि उनके गुरूदेव विलक्षण प्रतिभा के धनी संत थे। उनकी गणना सिद्ध संताें में हाेती रही है। वह भजन-साधना में तल्लीन रहा करते थे। साधुता ताे उनमें देखते ही झलकती थी। बहुत ही विनम्र स्वभाव के संत रहे। उन्होंने अयाेध्यानगरी में एक विशाल और भव्य आश्रम की स्थापना किया, जिसके वह संस्थापक हुए। जीवन पर्यन्त मठ के सर्वांगीण विकास में लगे रहे। वर्तमान में आश्रम नित्य नई ऊंचाइयों पर पहुंच रहा है। मठ में गाै, संत, विद्यार्थी एवं आगंतुक सेवा सुचारू रूप से चल रही है। उन्होंने कहा कि गुरूदेव ने दीन-दुखियों व निराश्रितों की हमेशा मदद किया। सेवा काे ही अपना धर्म बनाया। वह अनेकाें सेवा प्रकल्प के कार्याें से जुड़े रहे। आश्रम में आए व्यक्ति काे कभी भूखा नही जाने देते थे और न ही कभी कोई व्यक्ति मंदिर से भूखा गया है। मठ में उत्सव, समैया, त्याैहार मनाने की परंपरा गुरूदेव के समय से चली आ रही है। जिसे अब मैं आगे बढ़ा रहा हूं। इस अवसर पर बड़ी संख्या में संत-महंत एवं भक्तगणों ने प्रसाद ग्रहण किया। प्रख्यात कथावाचिका महंत रामायणी शीतल दीदी के संयाेजन में पुण्यतिथि महाेत्सव मनाया गया। वर्तमान महंत ने आए हुए संत-महंताें का स्वागत-सम्मान किया। इस माैके दिगंबर अखाड़ा के महंत सुरेश दास, रंगवाटिका महंत हरिसिद्धि शरण, श्रीरामप्रिया कुंज महंत उद्धव शरण, महंत राममिलन शरण, महंत आनंद दास हनुमानगढ़ी आदि संत-महंत और भक्तगण उपस्थित रहे।