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: भरत का चरित्र समुद्र की भाँति अगाध है: आचार्य शिवांश

बमबम यादव

Sun, Aug 11, 2024
प्रसिद्ध पीठ श्री हनुमान बाग में चल रहें श्रीरामकथा का समापन सोमवार को, मंदिर में झूलनोत्सव का छाया उल्लास अयोध्या। भगवच्चरित्र और भक्त चरित्र दोनों हमारे चरित्र को विशुद्ध करने के लिये ज़रूरी है।विचार,भाव और क्रिया का योग ही चरित्र है।मानव जीवन प्रभु के द्वारा दिया गया गीत है ।पर गुनगुनाने की कला आनी चाहिये।जीवन को भार नहीं प्रभु का उपहार समझ कर जीना है।उक्त बातें वृंदावन से पधारे प्रख्यात कथावाचक आचार्य शिवांश जी ने आयोजित श्री राम कथा के अष्टम दिवस में कही। शिवांश जी ने कहा कि व्यक्ति के जीवन में नेम और प्रेम का सम्यक निर्वाह एक साथ नहीं हो पाता।जहाँ प्रेम होता है वहाँ पर नेम को प्राय: त्याग दिया जाता है।भरत जी के चरित्र में प्रेम और नेम दोनों का एक साथ निर्वाह दिखाई देता है।नेम रहित प्रेम कभी-कभी समाज में उच्छृंखलता की सृष्टि करता है।भरत जी के चरित्र में लोकमंगल की भावना विद्यमान है।सिद्धि के साथ साधन तत्व की समग्रता ही भरत का चरित्र है। उन्होंने कहा कि कैकेयी राम कथा-रथ की धूरी हैं।वे इस कथा-रथ का संवहन भी करती हैं और गति भी देती हैं।जैसे सीधी रेखा में चलकर नदी प्रवाह खो देती है,एकरस होकर जीवन अपना अर्थ खो देता है,उसी तरह कैकेयी की अनुपस्थिति में रामकथा शुष्क और रसहीन हो जाती।कैकेयी का चरित्र उस दृष्टि से अत्यन्त महत्वपूर्ण है कि वह रामकथा को एक अत्यन्त अप्रत्याशित मोड़ देता है।इससे कैकेयी का व्यक्तित्व भले धूमिल होता हो,लेकिन राम का चरित्र अत्यन्त निखर कर उभरता है।भरत जैसे यशस्वी पुत्र को जन्म देने वाली कैकेयी भले निन्दनीय कही गयी पर भरत को सबसे वन्दनीय भी बना गयी। कथा की अध्यक्षता महंत जगदीश दास जी महाराज ने किया। कथा से पूर्व व्यासपीठ का पूजन यजमान ने किया। तो वही आज से मंदिर में भगवान का दिव्य भव्य झूलनोत्सव का उल्लास अपने चरम पर है। चांदी व सोने के बने भव्य हिंडोले में भगवान युगल सरकार झूला झूल रहें है। हनुमान बाग के मुख्य द्वार पर श्रद्धालुओं के भव्य प्रसाद वितरण किया जा रहा है। जिसमें पूढ़ी,सब्जी व मीठा तो चावल राजमा हलुवा आदि प्रसाद से भक्तों की सेवा हो रही है। कार्यक्रम में मुख्य रुप से आरडी खन्ना, बीरभान अरोड़ा, मनोहर लाल शर्मा, बीडी गुप्ता, बलदेव शर्मा,राजकुमार महाजन, रमेश गुप्ता, सुनील दास, पुजारी योगेंद्र दास, रोहित शास्त्री, नितेश शास्त्री आदि रहें।

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