शिद्दत से शिरोधार्य हुए हनुमत निवास के पूर्वाचार्य : हनुमत निवास में उमड़ा श्रद्धा का सागर, बाबा गोमती दास व रघुनन्दन शरण की पुण्यतिथि पर भाव-विभोर हुआ अयोध्या
admin
Tue, Mar 17, 2026
शिद्दत से शिरोधार्य हुए हनुमत निवास के पूर्वाचार्य
हनुमत निवास में उमड़ा श्रद्धा का सागर, बाबा गोमती दास व रघुनन्दन शरण की पुण्यतिथि पर भाव-विभोर हुआ अयोध्या
भक्ति, वैराग्य और गुरु-परंपरा की अविरल धारा का स्मरण, संतों ने बताया—सेवा और साधना ही सच्चा मार्ग
अयोध्या। प्रभु श्रीराम की दिव्य नगरी अयोध्या में स्थित सिद्धपीठ हनुमत निवास एक बार फिर भक्ति, श्रद्धा और गुरु-स्मरण के पावन भावों से आलोकित हो उठा। आश्रम के संस्थापक अनंत विभूषित बाबा गोमती दास जी महाराज एवं पूज्य श्री रघुनन्दन शरण जी की पुण्यतिथि महोत्सव आचार्य महंत डॉ. मिथलेश नन्दनी शरण जी महाराज के संयोजन में अत्यंत श्रद्धा, गरिमा और हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। इस अवसर पर संत-महात्माओं और श्रद्धालुओं की उपस्थिति ने पूरे आश्रम को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया।
संत परंपरा के उज्ज्वल ध्रुवतारे बाबा गोमती दास जी महाराज का जीवन त्याग, तप और वैराग्य की अनुपम मिसाल रहा। पंजाब की पुण्यभूमि में ब्राह्मण परिवार में जन्मे इस महान संत ने बाल्यावस्था में ही संसारिक बंधनों का त्याग कर आध्यात्मिक पथ को अपना लिया। मात्र दस वर्ष की आयु में ही उन्होंने संत जीवन का वरण कर लिया, जो उनके अद्भुत वैराग्य और ईश्वर के प्रति समर्पण का परिचायक है।
अमृतसर स्थित दुर्ग्याना मंदिर में महंत सरयू दास जी से वैराग्य दीक्षा प्राप्त करने के बाद उनकी साधना यात्रा और भी प्रगाढ़ होती चली गई। जनश्रुति है कि काशी विश्वनाथ मंदिर के दिव्य स्वप्नादेश के पश्चात वे चित्रकूट की पवित्र भूमि में स्थित बांके सिद्ध गुफा में लीन होकर भजन-साधना करने लगे। वहां से उन्होंने अनेक तीर्थों का भ्रमण किया और अंततः हनुमान जी की कृपा और आदेश से अयोध्या की पावन धरती पर पदार्पण किया।
अयोध्या आगमन के पश्चात लक्ष्मण किला के समीप उन्होंने प्रभु श्रीसीताराम की भक्ति में स्वयं को पूर्णतः समर्पित कर दिया। जानकी वरण की करुणामयी सत्संग परंपरा में लीन होकर वे प्रभु चरणों के अनुराग में ऐसे डूबे कि उनका संपूर्ण जीवन भजन, सेवा और साधना का पर्याय बन गया। इसी क्रम में उन्होंने “हनुमत निवास” की स्थापना की, जो आज भी उनकी साधना और सेवा की परंपरा का जीवंत केंद्र बना हुआ है।
आश्रम के महंत एवं प्रख्यात साहित्यकार आचार्य स्वामी महंत मिथलेशनन्दनी शरण जी ने बताया कि गुरुदेव के आशीर्वाद से आज भी हनुमत निवास में नित्य भजन, सेवा और सत्संग की परंपरा अखंड रूप से चल रही है। बाबा गोमती दास जी द्वारा स्थापित नियम और अनुशासन आज भी श्रद्धालुओं के जीवन को दिशा दे रहे हैं।
पुण्यतिथि के इस पावन अवसर पर संतों ने गुरुजनों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उनके आदर्शों को जीवन में उतारने का संदेश दिया। इस प्रकार यह आयोजन केवल एक स्मरण नहीं, बल्कि भक्ति, सेवा और समर्पण की उस दिव्य धारा का पुनः अनुभव बन गया, जो अयोध्या की आत्मा में सदैव प्रवाहित होती रहती है। आयें हुए अतिथियों का स्वागत आश्रम के महंत एवं प्रख्यात साहित्यकार आचार्य स्वामी महंत मिथलेशनन्दनी शरण जी महाराज ने किया।इस अवसर पर जगद्गुरु रामानन्दाचार्य स्वामी रामदिनेशाचार्य, मणिराम दास छावनी के उत्तराधिकारी महंत कमल नयन दास जी महाराज, आचार्य पीठ श्रीलक्ष्मण किलाधीश महंत मैथिली रमण शरण जी महाराज, श्रीरामबल्भाकुंज के अधिकारी राजकुमार दास, महंत राम कुमार दास, महंत वैदेही बल्लभ शरण, महंत गौरीशंकर दास, महंत बलराम दास, हनुमानगढ़ी के पुजारी पार्षद रमेश दास, महंत डा जयराम दास,महापौर महंत गिरीश पति त्रिपाठी, महंत छोटू शरण जी, प्रियेश दास, महेंद्र त्रिपाठी सहित सैकड़ों संत आचार्य श्री महाराज जी की पुण्यतिथि महोत्सव पर श्री महाराज जी को श्रद्धांजलि अर्पित की और प्रसाद ग्रहण किए।
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