Wednesday 19th of August 2026

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23वीं पुण्यतिथि के उपलक्ष्य में दिगंबर अखाड़ा में श्रद्धा, स्मृति और भक्ति का त्रिवेणी संगम हुआ

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संत परम्परा की अनमोल कड़ी थे रसिकाचार्य सीताराम शरण जी : draft title

संत परम्परा की अनमोल कड़ी थे रसिकाचार्य सीताराम शरण जी

आचार्य पीठ श्री लक्ष्मणकिला के पूर्वाचार्य की 28वीं पुण्यतिथि पर रामनगरी में शिद्दत से शिरोधार्य हुए

अयोध्या। त्याग और तपस्या की पावन भूमि अयोध्या के अनमोल रत्न, लक्ष्मण किलाधीश स्वामी सीताराम शरण जी महाराज की पुण्यतिथि श्रद्धा और भक्ति भाव के साथ मनाई गई। आचार्य पीठ श्रीलक्ष्मण किला के पूर्वाचार्य स्वामी सीताराम शरण जी महाराज की 28वीं पुण्यतिथि बड़े ही श्रद्धा भाव के साथ मनायी गई। तिथि पर लक्ष्मणकिला में आचार्य श्री को वाक्यमयी पुष्पांजलि अर्पित कर नमन किया। संतो ने नमन करते हुए कहा कि आचार्य श्री संत परम्परा की अनमोल कड़ी थे। भगवान श्री राम की नगरी अयोध्या में अंनको संत और साधक हुए हैं जिनकी गणना उच्च कोटि के साधकों मे होती है। इन्हीं सिद्ध साधकों में रसिकोपासना के विशिष्ट आचार्य स्वामी सीताराम शरण जी महाराज की गणना होती है। महंत सीताराम शरण लक्ष्मण किला के महंत बने और उसका वैभव हमेशा बढ़ाया और कथा व्यास के रूप में अपनी अमिट छाप समाज में छोड़ी। उनके अनन्य भक्तों में देश के कोने कोने से विद्वान नौकरशाह और राजनीतिक लोग जुड़े हुए थे। श्री महाराज जी हमेशा श्री सीताराम नाम जप और सेवा में विश्वास रखते थे। वह हमेशा लक्ष्मण किला में सेवा का संचालन करते रहते थे। लक्ष्मण किला इतना वैभवशाली मंदिर है कि यहां से जो भी व्यक्ति आता हुआ खाली हाथ नहीं जाता था गौ सेवा संत सेवा तो महाराज जी किस साधना का एक अंश था। महाराज जी की कथा पूरे देश में लाखों लाख श्रोता थे जो महाराज जी को अनन्य प्रेम करते थे। स्वामी सीताराम शरण जी महाराज की 28 पुण्यतिथि हर्षोल्लास के साथ 1 सप्ताह से लक्ष्मण किला धीश महंत मैथिली रमण शरण के संयोजन में मनाया जा रहा था जिसका आज वृहद भंडारे के साथ समापन हो गया। वर्तमान महंत मैथिली रमण शरण जी महाराज ने बताया कि 1 सप्ताह से गुरु महाराज की पुण्यतिथि मंदिर में मनाई जा रही थी जिसमें आचार्य श्री द्धारा रचित ग्रन्थों नाम महिमा व धाम महिमा सहित कई ग्रन्थों का सस्वर पाठ किया गया। पुण्यतिथि समारोह का समापन में रामनगरी के संत धर्माचार्य ने आचार्य श्री को नमन किया इसके बाद वृहद भंडारे के साथ संतो का परम्परागत तरीक़े किलाधीश महंत मैथलीरमण शरण व हनुमत निवास पीठाधीश्वर महंत डा. मिथलेश नन्दनी शरण व किला के अधिकारी सूर्य प्रकाश शरण ने किया। 

इस अवसर पर श्रीमहंत बिंदुगाद्याचार्य स्वामी देवेन्द्र प्रसादाचार्य, महंत कमलनयन दास, महंत रामकुमार दास, महंत अवधकिशोर शरण, महंत अवधेश दास, बिंदुगाद्याचार्य के कृपापात्र शिष्य जगतगुरु कृपालुराम भूषण दास, पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह,महापौर महंत गिरीश पति त्रिपाठी,नाका हनुमानगढ़ी के महंत रामदास, हनुमानगढ़ी के पुजारी पार्षद रमेश दास, महंत शशिकांत, महामंडलेश्वर महंत गिरिश दास, नागा रामलखन दास, पूर्व सांसद जी के प्रतिनिधि नीलेश सिंह, महेंद्र त्रिपाठी सहित हजारों संतों,महंतों सहित आमजनों ने अपनी श्रद्धांजलि अर्पित की।श्रद्धा और भक्ति से ओतप्रोत इस आयोजन में संत समाज ने स्वामी सीताराम शरण जी महाराज के आदर्शों को आत्मसात कर सेवा करने का संकल्प लिए।

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