Wednesday 19th of August 2026

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प्राकट्योत्सव पर फूल-बंगला में विराजे जानकी-जीवन : लीला संवरण के 11 वर्ष बाद भी पूज्य गुरुदेव हम सबकी स्मृति में जीवंत हैं:महंत डा. ममता शास्त्री

प्राकट्योत्सव पर फूल-बंगला में विराजे जानकी-जीवन

जयपुर की बनी चुनरी मां सरयू को किया गया समर्पित 

लीला संवरण के 11 वर्ष बाद भी पूज्य गुरुदेव हम सबकी स्मृति में जीवंत हैं:महंत डा. ममता शास्त्री

 दर्शनभवन का विशाल आध्यात्मिक परिकर जानकी जीवन के प्रतिष्ठा पर्व के अवसर पर आस्था से अनुप्राणित रहा

अयोध्या। जानकी जीवन के साथ दिग्गज संत की स्मृति जीवंत हो उठी। आदि रामानंदाचार्य की प्राचीन पीठ दर्शन भवन में 18 वर्ष पूर्व जानकी जीवन के नाम से स्थापित माता सीता के साथ श्रीराम का युगल विग्रह आस्था के नवोन्मेष का परिचायक है। जानकी जीवन की स्थापना प्रख्यात धर्म प्रचारक व लोकसभा सदस्य रहे महंत डा. विश्वनाथदास ने की थी।

उन्हें प्रखर राजनीतिज्ञ, सरल संत एवं मर्मज्ञ कथाव्यास के रूप में याद किया जाता है। यद्यपि 11 वर्ष पूर्व वह चिर निद्रा में लीन हो गए, लेकिन जानकी जीवन से अनुप्राणित दर्शन भवन नित्य निरंतर प्रतिष्ठित हो रहा है। इसी के साथ शास्त्री जी की भी स्मृति निरंतर प्रतिष्ठित हो रही है। इसके मूल में आराध्य के प्रति उनका बेजोड़ समर्पण था। 

उनकी शिष्या एवं उत्तराधिकारी महंत डा. ममता शास्त्री जी कहती हैं कि लीला संवरण के 11 वर्ष बाद भी पूज्य गुरुदेव हम सबकी स्मृति में जीवंत हैं और उन्हीं की प्रेरणा से दर्शनभवन का विशाल आध्यात्मिक परिकर जानकी जीवन के प्रतिष्ठा पर्व के अवसर पर आस्था से अनुप्राणित है।

श्री जानकी जीवन सरकार के 18वें प्रकाशोत्सव के उपलक्ष्य में आज गाजे-बाजे, हाथी-घोड़ों और आकर्षक झांकियों के साथ भव्य शोभायात्रा निकाली गई। पीठाधीश्वर महंत डॉ. ममता शास्त्री के संयोजन में निकली इस शोभायात्रा ने नगर के प्रमुख मार्गों से होते हुए श्रद्धालुओं का मन मोह लिया।शोभायात्रा श्री राम पथ से गुजरते हुए पावन सरयू तट पहुंची, जहां मोक्षदायिनी मां सरयू की विधिवत आरती उतारी गई और चुनरी अर्पित की गई। वैदिक मंत्रोच्चार के बीच पूजन-अर्चन संपन्न हुआ। इसके पश्चात शोभायात्रा पुनः दर्शन भवन आश्रम लौटी, जहां विविध धार्मिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रमों की शुरुआत हुई।

   मार्गों पर श्रद्धालुओं ने पुष्पवर्षा कर शोभायात्रा का स्वागत किया। डमरू वादन और मोर पंख धारण किए कलाकारों के मनोहारी नृत्य ने उपस्थित जनसमूह को मंत्रमुग्ध कर दिया। बाहर से आए श्रद्धालु भी आयोजन की भव्यता देख भावविभोर नजर आए।शाम के सत्र में श्री जानकी जीवन सरकार फूल बंगले में विराजमान हुए। इस अवसर पर फूलों की होली खेली गई और शास्त्रीय संगीत की मधुर प्रस्तुतियों ने भक्तिमय वातावरण को और भी सजीव बना दिया।22 फरवरी को प्रातः श्री नर्मदेश्वर भगवान शंकर के रुद्राभिषेक से कार्यक्रम का शुभारंभ होगा। प्रातः 10 बजे श्री विश्वनाथ गौ सेवा दर्शन मंदिर में गौ माता का विशेष पूजन एवं आरती की जाएगी। इसके उपरांत 11 बजे ठाकुर श्री जानकी जीवन सरकार के दरबार में छप्पन भोग अर्पित कर जेवनार एवं संतों का वृहद भंडारा आयोजित होगा।

    डॉ. ममता शास्त्री ने बताया कि यह समस्त आयोजन अनंत श्री विभूषित ब्रह्मलीन ब्रह्मचारी महंत विश्वनाथ दास शास्त्री गुरुदेव के आशीर्वाद से संपन्न हो रहा है। कार्यक्रम का समापन नर्मदेश्वर भगवान के पूजन और जेवनार गायन के साथ होगा। उन्होंने बताया कि मां सरयू की चुनरी जयपुर में विशेष रूप से तैयार करवाई गई है। रविवार को ठाकुर जी को छप्पन भोग अर्पित किया जाएगा जिसका प्रसाद अयोध्या के साधु, संत, आश्रम से जुड़े नेमी प्रेमी पाएंगे।कार्यक्रम में शुकदेव दास, विजय कुमार, अशोक कुमार मिश्र (एडवोकेट, सुप्रीम कोर्ट), राघवजी, अनन्या, वैदेही बाबू, शाश्वत बाबू सहित देश के विभिन्न प्रांतों से जुड़े श्रद्धालु उपस्थित होकर उत्सव में सहभागिता कर रहे हैं।

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