Tuesday 10th of February 2026

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अंतरराष्ट्रीय मातेश्वरी महाधाम के तत्वावधान में आयोजित नौ दिवसीय सप्तम अश्वमेघ महायज्ञ का छाया उल्लास

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भगवान श्रीराम के आदर्शों को जीवन में उतारना होगा:सद्गुरु जी महाराज : अंतरराष्ट्रीय मातेश्वरी महाधाम के तत्वावधान में आयोजित नौ दिवसीय सप्तम अश्वमेघ महायज्ञ का छाया उल्लास

भगवान श्रीराम के आदर्शों को जीवन में उतारना होगा:सद्गुरु जी महाराज

अंतरराष्ट्रीय मातेश्वरी महाधाम के तत्वावधान में आयोजित नौ दिवसीय सप्तम अश्वमेघ महायज्ञ का छाया उल्लास

महायज्ञ स्थल पर श्रद्धा, भक्ति और अनुशासन का अद्भुत संगम देखने को मिल रहा है

अयोध्या। पतित पावनी मां सरयू नदी के तट स्थित बालू घाट पर अंतरराष्ट्रीय मातेश्वरी महाधाम के तत्वावधान में आयोजित नौ दिवसीय सप्तम अश्वमेघ महायज्ञ में देश-विदेश से आए मातृ भक्तों की भारी भीड़ उमड़ रही है। दिल्ली, मुंबई, बिहार, उत्तर प्रदेश सहित थाईलैंड की धरती से लगभग दस हजार मातृ भक्त इस महायज्ञ में सहभागिता कर रहे हैं।महायज्ञ के दौरान मातेश्वरी परिवार के संस्थापक श्री सद्गुरु जी महाराज ने भक्तों को संबोधित करते हुए कहा कि यदि संपूर्ण धरती पर आदर्शवादी बनना है तो भगवान श्रीराम के आदर्शों को जीवन में उतारना होगा। उन्होंने कहा कि भगवान राम जैसा आदर्शवादी न कोई हुआ है और न होगा। धन्य है यह धरती, जिसे भगवान राम ने अपने अवतार के लिए चुना। उन्होंने अपने आदर्श स्थापित करने के लिए राज्य, वैभव और परिवार तक का त्याग कर वनवास स्वीकार किया।सद्गुरु जी महाराज ने अपने उपदेश में लक्ष्मण, माता सीता और भगवान राम के जीवन से प्रेरणा लेने पर बल दिया। उन्होंने कहा कि लक्ष्मण जैसा भ्रातृ धर्म, माता सीता जैसा पतिव्रत और त्याग तथा भगवान राम जैसा पुत्र धर्म आज के समाज के लिए मार्गदर्शक है। उन्होंने कहा कि आज हम थोड़ा सा कष्ट आते ही घबरा जाते हैं और धन के लिए अपने कर्तव्यों को भूल जाते हैं, जबकि हमें अपने जीवन में माता-पिता, भाई-बहन, पति-पत्नी और सास-बहू के आपसी कर्तव्यों को समझना चाहिए। सास और बहू को मां-बेटी का भाव रखकर प्रेमपूर्वक जीवन व्यतीत करना चाहिए।महायज्ञ के अंतर्गत प्रतिदिन सुबह 5 बजे से 6 बजे तक श्री सद्गुरु जी महाराज द्वारा ध्यान योग कराया जा रहा है, जिसमें मातृ भक्त बढ़-चढ़कर भाग ले रही हैं। उन्होंने सभी भक्तों को प्रतिदिन योग करने पर विशेष जोर दिया।सुबह 7 बजे से सामूहिक हवन कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है। यज्ञ परिसर में एक मुख्य हवन कुंड स्थापित किया गया है, जिसमें 24 घंटे अखंड हवन चल रहा है। मातेश्वरी के आचार्य बारी-बारी से हवन संपन्न करा रहे हैं। वहीं भक्तों के लिए भोजन प्रसाद की व्यवस्था हेतु भंडारा निरंतर चल रहा है।महायज्ञ स्थल पर श्रद्धा, भक्ति और अनुशासन का अद्भुत संगम देखने को मिल रहा है, जिससे संपूर्ण वातावरण आध्यात्मिक ऊर्जा से ओत-प्रोत बना हुआ है।

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