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धर्म सम्राट श्रीमहंत ज्ञानदास की अध्यक्षता में अयोध्या–गोवा के बीच आध्यात्मिक सेतु सुदृढ़

26 फरवरी से मुख्य प्राण प्रतिष्ठा अनुष्ठान, 28 फरवरी को विशाल भंडारा; देशभर से संत-धर्माचार्यों एवं श्रद्धालुओं का होगा

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गोवा के सागर तट पर सनातन चेतना का महोत्सव, 400 लोगों की घर वापसी : धर्म सम्राट श्रीमहंत ज्ञानदास की अध्यक्षता में अयोध्या–गोवा के बीच आध्यात्मिक सेतु सुदृढ़

बमबम यादव

Sat, Feb 21, 2026

गोवा के सागर तट पर सनातन चेतना का महोत्सव, 400 लोगों की घर वापसी

नाणीज धाम के जगद्गुरु रामानंदाचार्य नरेंद्राचार्य महाराज के सानिध्य में श्री गोवेश्वर महादेव मंदिर में शिवलिंग प्राण प्रतिष्ठा; धर्म सम्राट श्रीमहंत ज्ञानदास की अध्यक्षता में अयोध्या–गोवा के बीच आध्यात्मिक सेतु सुदृढ़

अयोध्या। अयोध्या की आध्यात्मिक चेतना आज केवल सरयू तट तक सीमित नहीं है, बल्कि उसका प्रभाव देश–विदेश तक स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है। इसी कड़ी में गोवा के सागर तट पर आयोजित एक भव्य संत समागम हिंदू चेतना के जागरण का सशक्त उदाहरण बना। नाणीज धाम के जगद्गुरु रामानंदाचार्य नरेंद्राचार्य महाराज के सानिध्य में गोवा स्थित श्री गोवेश्वर महादेव मंदिर में शिवलिंग प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव का आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लिया।

15 फरवरी को संपन्न इस भव्य समारोह के दौरान 40 परिवारों सहित लगभग 400 लोगों ने सनातन परंपरा में अपनी आस्था व्यक्त करते हुए पुनः हिंदू धर्म में दीक्षा ग्रहण की। वैदिक रीति-विधानों के मध्य उन्हें सनातन धर्म के प्रति समर्पण और आचरण का संकल्प दिलाया गया। यह घर वापसी कार्यक्रम श्रद्धा, विश्वास और सांस्कृतिक जुड़ाव का प्रतीक बनकर सामने आया।

कार्यक्रम की अध्यक्षता श्रीमहंत ज्ञानदास महाराज ने की, जो अखाड़ा परिषद के पूर्व अध्यक्ष और धर्मसम्राट के रूप में विख्यात रहे हैं। उनके नेतृत्व में संपन्न इस आयोजन ने अयोध्या और गोवा के बीच आध्यात्मिक सेतु का कार्य किया। श्रीमहंत ज्ञानदास महाराज ने अपने लगभग 12 वर्षों के कार्यकाल में सनातन संस्कृति के संरक्षण और संवर्धन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने संवाद और सुलह-समझौते के माध्यम से अयोध्या विवाद के समाधान हेतु भी प्रयास किए थे।

प्राण प्रतिष्ठा समारोह के दौरान वैदिक मंत्रोच्चार, रुद्राभिषेक और अग्निहोत्र के बीच शिवलिंग की विधिवत स्थापना की गई। पूरा वातावरण भक्तिमय ऊर्जा और आध्यात्मिक उल्लास से ओत-प्रोत रहा। इसी पावन अनुष्ठान के मध्य घर वापसी कार्यक्रम संपन्न कराया गया। आयोजन के दौरान सामाजिक उत्तरदायित्व का भी संदेश दिया गया—एक लाख से अधिक यूनिट रक्तदान तथा लगभग सौ देहदान के संकल्प भी समर्पित किए गए, जो सेवा और समर्पण की भावना को दर्शाते हैं।

श्रीमहंत ज्ञानदास के उत्तराधिकारी एवं संकट मोचन सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष महंत संजय दास ने बताया कि इस ऐतिहासिक आयोजन में रामानंदी परंपरा के प्रमुख वैष्णव अखाड़ों के श्रीमहंत, सचिवगण, महामंडलेश्वर, चतुर संप्रदाय के संत-महंत और देश के विभिन्न भागों से आए धर्माचार्यों की गरिमामयी उपस्थिति रही।

अयोध्या से भी बड़ी संख्या में संत-महंत गोवा पहुंचे। निर्वाणी अनी अखाड़ा के श्रीमहंत मुरली दास, तीनों अनिल के पूर्व प्रधानमंत्री महंत माधव दास, महंत डॉ. महेश दास, महंत रामकुमार दास, महंत सत्यदेव दास, महंत राजेश दास और महंत हेमंत दास सहित सैकड़ों धर्माचार्य इस आयोजन में प्रमुख रूप से शामिल हुए।

गोवा के सागर तट पर संपन्न यह महोत्सव केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं रहा, बल्कि यह सनातन संस्कृति के पुनर्जागरण, सामाजिक समरसता और आध्यात्मिक एकता का सशक्त संदेश लेकर आया। अयोध्या की पावन परंपरा और संतों के मार्गदर्शन में संपन्न यह आयोजन देशभर में हिंदू चेतना के विस्तार का प्रतीक बन गया।

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