Thursday 9th of July 2026

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हनुमानगढ़ी के संतों ने पुष्पांजलि अर्पित कर किया नमन, श्रीराम जन्मभूमि आंदोलन और धर्म-संस्कृति के संरक्षण में योगदान को

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महंत संतरामदास महाराज को श्रद्धांजलि,तेरहवीं संस्कार में उमड़ा संतसमाज : हनुमानगढ़ी के संतों ने पुष्पांजलि अर्पित कर किया नमन, श्रीराम जन्मभूमि आंदोलन और धर्म-संस्कृति के संरक्षण में योगदान को

महंत संतरामदास महाराज को श्रद्धांजलि, तेरहवीं संस्कार में उमड़ा संत समाज

हनुमानगढ़ी के संतों ने पुष्पांजलि अर्पित कर किया नमन, श्रीराम जन्मभूमि आंदोलन और धर्म-संस्कृति के संरक्षण में योगदान को किया याद

अयोध्या। श्री हनुमानगढ़ी की उज्जैनिया पट्टी के प्रतिष्ठित महंत संतरामदास महाराज के साकेतवास के उपरांत गुरुवार को श्री हनुमत कथा मंडपम, इमली बगिया में तेरहवीं संस्कार एवं श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया। श्रद्धांजलि सभा में हनुमानगढ़ी के संत-महंतों के साथ विभिन्न धार्मिक संस्थाओं के प्रतिनिधि, जनप्रतिनिधि, गृहस्थ श्रद्धालु और बड़ी संख्या में भक्तगण उपस्थित रहे। सभी ने महंत संतरामदास महाराज के चित्र पर पुष्प अर्पित कर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी तथा उनके आध्यात्मिक और सामाजिक योगदान का स्मरण किया। महंत संतरामदास महाराज के शिष्यों एवं अखाड़े के महासचिव महंत नंदरामदास महाराज, उमारामदास महाराज तथा राजूदास महाराज ने आगंतुक संतों, अतिथियों और श्रद्धालुओं का स्वागत एवं अभिनंदन किया। उन्होंने कहा कि गुरुदेव का संपूर्ण जीवन भगवान श्रीराम और बजरंगबली की भक्ति, संत सेवा तथा समाज के कल्याण के लिए समर्पित रहा। उनके आदर्श और संस्कार सदैव सभी को प्रेरणा देते रहेंगे।

श्रद्धांजलि सभा में भावांजलि प्रकट करते हुए संतों ने बताया कि महंत संतरामदास महाराज केवल एक संत ही नहीं, बल्कि धर्म, संस्कृति और राष्ट्र के प्रति समर्पित व्यक्तित्व थे। उन्होंने जीवनभर हनुमानगढ़ी की परंपराओं का संरक्षण किया और श्रीहनुमानजी व प्रभु श्रीराम की सेवा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी। संतों ने कहा कि अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि आंदोलन के दौरान भी महंत संतरामदास महाराज ने भारतीय जनता पार्टी, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ तथा विश्व हिंदू परिषद के साथ सक्रिय भूमिका निभाई। आंदोलन के विभिन्न चरणों में उनका मार्गदर्शन और सहयोग संत समाज के लिए महत्वपूर्ण रहा।वक्ताओं ने कहा कि महंत संतरामदास महाराज का जीवन सादगी, अनुशासन, सेवा और समर्पण का अनुपम उदाहरण था। उन्होंने सदैव संत समाज को एकजुट रखने का प्रयास किया और धार्मिक परंपराओं के संरक्षण के साथ समाज में सद्भाव और आध्यात्मिक चेतना का संदेश दिया। उनके साकेतवास से संत समाज ने एक अनुभवी मार्गदर्शक और आध्यात्मिक नेतृत्वकर्ता को खो दिया है, जिसकी कमी लंबे समय तक महसूस की जाएगी। इस अवसर पर निर्वाणी अनिल अखाड़ा के श्रीमहंत मुरली दास, तीनों अनिल अखाड़ा के पूर्व प्रधानमंत्री महंत माधव दास, अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के राष्ट्रीय प्रवक्ता महंत संजय दास, महंत रामकुमार दास,रसिक पीठाधीश्वर महंत जन्मेजय शरण, महंत गौरीशंकर दास, महंत राजेश दास पहलवान, महंत डा महेश दास,महंत सत्यदेव दास, महंत बलराम दास, उपेन्द्र दास, मामा दास, सूर्य भान दास सहित हनुमानगढ़ी के समस्त नागा साधु संत मौजूद रहें।

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