: मंहगाई,बेरोजगारी और नफरत के खिलाफ बदलाव का प्रतीक बन गये हैं अखिलेश: शिवपाल
Sat, Feb 12, 2022
इटवा। प्रसपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष शिवपाल यादव ने करहल में सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के पक्ष में जनसम्पर्क व सभाएं की। सभा में उन्होंने कहा कि मंहगाई,बेरोजगारी और नफरत के खिलाफ बदलाव का प्रतीक बन गये हैं अखिलेश। वे करोडों दिलों की उम्मीद हैं। करहल के मेरे प्यारे भाइयो-बहनो,उन्हें इतना प्यार, आशीर्वाद और समर्थन दें, कि उसकी गूंज पूरे देश में हो। प्रसपा अध्यक्ष शिवपाल यादव ने इटावा सदर से सपा प्रत्याशी सर्वेश शाक्य के पक्ष में प्रचार किया।कहा इन्हें भारी मतों से विजयी बनाएं। उन्होंने कहा कि
सम्पूर्ण प्रदेश की यह आकांक्षा है कि अखिलेश यादव के नेतृत्व में सपा को मंहगाई,बेरोजगारी व नफरत के विरुद्ध स्पष्ट जनादेश मिले।
: समाजवादी इत्र करोबारी के घर रेड, पकड़ा गया अवैध 150 करोड़
Fri, Dec 24, 2021
अखिलेश यादव की फोटो के साथ लॉन्च किया था समाजवादी इत्र,तिजोरियाें में मिले नोटों के बंडल
इत्र, खुशबुओं का ‘कारोबार’ है. गुलाब, केवड़ा, बेला, केसर, कस्तूरी, चमेली, मेहंदी, कदम और ना जाने कितनी खुशबुएं. ज़रा सा लगा लिया तो रूह तक महक उठती है। यूपी का एक छोटा सा जिला कन्नौज, अरब से लेकर अमेरिका तक यूं ही नहीं दुनिया भर में महकता रहता है। लेकिन ये सब तो फिल्मी लफ्फाजी हैं। मुद्दे की बात ये है कि है तो असल में सब कारोबार ही ना। अब कारोबार है तो पैसा भी है। और पैसा इतना है कि आप बस इत्र की खुशबू में मस्त रहिए, अगला वहां नोटों से संदूकें भर रहा है। और इतनी ज्यादा भर रहा है कि आदमी छोड़ ही दीजिए, मशीने नहीं गिन पा रहीं।
लोग गुटखे के नाम पर कानपुर का मज़ाक उड़ाते रहते हैं। कहते हैं यहां के लोगों की जेबों में पैसे हों ना हों, गुटखे के पैकेट जरूर भर रहते हैं। लेकिन सर, सबके साथ ऐसा नहीं है। यहां एक इत्र कारोबारी भी है, जिसकी जेब क्या घर की तिजोरी, अलमारी, बिस्तर, दीवार और पता नहीं कहां-कहां नोटों की गड्डियां ही गड्डियां दबी पड़ी थीं। जनाब का नाम है पीयूष जैन।
अहमदाबद के जीएसटी इंटेलिजेंस महानिदेशालय की टीम ने पीयूष जैन के कानपुर स्थित घर पर छापा मारा। उन्होंने सोचा होगा कि कितना माल निकलेगा, निपटा कर शाम तक घर लौट आएंगे। लेकिन जब नोटों की गिनती शुरू हुई तो तब समझ में आया कि भईया, ये अकेले हमारे बस का मामला नहीं है।
पीयूष जैन के घर से नोटों की गड्डियों का अंबार निकला तो आनन फानन में DGGI वालों ने इनकम टैक्स वालों को बुलाया। अब दोनों मिल कर नोट गिन रहे हैं। लेकिन इतनी गड्डियां हैं कि खत्म होने का नाम ही नहीं ले रहीं। चार-चार नोट गिनने की मशीने मंगानी पड़ीं। चौबीस घंटे से नोटों की गिनाई चल रही है करीब 150 करोड़ रुपये कैश मिला है। खबर लिखे जाने तक 6 बड़े बक्से भर के नोट निकाले जा चुके थे। और घर के बाहर सुरक्षा के लिए पीएससी तैनात कर दी गई है।
अब इत्र का कारोबार है तो कन्नौज के ही होंगे। पीयूष जैन कन्नौज की इत्र वाली गली में अपना इत्र का कारोबार करते हैं। इनके मुंबई में भी आफिस हैं। इनकम टैक्स को इनकी लगभग चालीस से ज्यादा ऐसी कंपनिया मिली हैं जिनके माध्यम से पीयूष अपना इत्र कारोबार चला रहे थे।
लेकिन यार, अगर कोई कानपुर में रह रहा तो गुटखे से थोड़ा इश्क होना तो बनता है। पीयूष जैन को भी हो गया। लेकिन इतने पैसे वाला आदमी गुटखा खाकर अगर कानपुर की सड़कों पर थूकता दिखेगा तो इमेज नहीं खराब हो जाएगी! तो इन्होंने कहा हम गुटखा खाएं चाहे ना खाएं, बेचेंगे तो हम ही। तो मामला ये है कि पीयूष जैन इत्र के साथ पान मसाला बिजनेस पर भी फोकस करते हैं। कानपुर की ज्यादातर पान मसाला यूनिट्स पीयूष जैन की ही ग्राहक हैं। इसी चक्कर में इनको कन्नौज छोड़ कानपुर आना पड़ गया।
अहमदाबाद टीम को पुख्ता जानकारी मिली थी कि कानपुर में एक ट्रांसपोर्ट बिज़नेसमैन बिना Eway Bill जनरेट किए फर्जी रसीद बनाता है और टैक्स चोरी करता है। इसके बाद DGGI की टीम ने ट्रांसपोर्टर के घर और दफ्तर पर छापा मारा। इसी दौरान इस ट्रांसपोर्टर के एक और सप्लायर के ठिकानों और घर पर छापा मारा गया। ये शख्स निकले पीयूष जैन और फिर शुरू हुई नोटों की बारिश जो खत्म होने का नाम नहीं ले रही है।
अभी कुछ दिन पहले की ही बात है समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव टीवी पर ‘समाजवादी इत्र’ लॉन्च कर रहे थे। इसे लॉन्च कराया था समाजवादी पार्टी के पम्पी जैन ने। अब इस समाजवादी इत्र को इत्र कारोबारी पीयूष जैन से जोड़ बीजेपी एक के बाद एक हमले कर रही है।
दरअसल सुबह से ये खबरें छप गईं कि समाजवादी पार्टी के MLC पम्पी जैन पीयूष जैन के भाई हैं लेकिन ये बात सही नहीं है। पीयूष जैन और पम्पी जैन के बीच सिर्फ इतना संबंध है कि दोनों कन्नौज में एक ही मोहल्ले के रहने वाले हैं। पम्पी जैन से बात की तो उन्होंने अपने और पीयूष जैन के किसी प्रकार के संबंध होने की बात को नकार दिया. उन्होंने कहा-
हम लोग एक ही मोहल्ले में रहते हैं, जैन हैं और कारोबारी हैं. बस इतना ही संबंध है।
वहीं समाजवादी इत्र के बारे में जब उनसे पूछा गया तो उन्होंने स्पष्ट कहा कि उससे पीयूष जैन का कोई संबंध नहीं है।