: रघुवंश अभिराम अमृत महोत्सव का हुआ शुभारंभ
Wed, Jan 17, 2024
सवा लाख पार्थिक पूजन के साथ मनाया जाएगा महा महोत्सव
22 जनवरी को देसी गाय के गोबर से बने 11 हजार दीपों से होगा दीपोत्सव: महंत दिलीप दास
अयोध्या। रामनगरी में श्री राम लला प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव के उपलक्ष में रघुवंश अभिराम अमृत महोत्सव एवं श्री राम जन्मभूमि उद्धारक नवरत्न पुरस्कार महोत्सव का भव्य शुभारंभ मंगलवार 17 जनवरी से होगा। महोत्सव बाबा अभिराम दास वेद विद्यालय मां सरयू के तट राजघाट में अखिल भारतीय श्रीपंचनिर्वाणी अनि अखाड़ा हनुमानगढ़ी के अध्यक्ष महंत धर्मदास महाराज के अध्यक्षता एवं रघुवंश संकल्प सेवा ट्रस्ट के संयोजक स्वामी दिलीप दास त्यागी महाराज कर रहे है।जिसमें सवा लाख पार्थिव पूजन के साथ श्री राम कथा का आयोजन होगा और 22 जनवरी को देसी गाय के गोबर से बने 11 हजार दीपों से दीपोत्सव कार्यक्रम होगा।
कार्यक्रम में सवा लाख पार्थिक पूजन के साथ महा महोत्सव मनाया जाएगा। कार्यक्रम के संयोजक स्वामी दिलीप दास महाराज ने बताया कि 500 वर्षों के संघर्ष के बाद प्रभु श्री राम लाल नव्य भवन में विराजमान हो रहे हैं उन्हीं के उपलक्ष में सवा लाख पार्थिव पूजन एवं श्री रामकथा का भव्य आयोजन किया गया है। उन्होंने बताया कि फैसला आने के पहले 2018 में मंदिर निर्माण के लिए सवा करोड़ पार्थिव पूजन किया गया था। अब जब रामलला अपने जन्म स्थान पर विराजमान हो रहे हैं यह आयोजन पुनः किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि 17 से 22 जनवरी तक प्रतिदिन 11 हजार पार्थिव पूजन होगा। और 22 को 11 हजार दीप जला करके दीपोत्सव मनायेंगे।
: हनुमानजी को विशेष भव्य चांदी का मुकुट किया समर्पित: महंत आशुतोष दास
Wed, Jan 17, 2024
मेवाड़ भीलवाड़ा राजस्थान पूरन दास जी की बगीची की धरती से आये महंत ने रामजन्मभूमि में भगवान रामलला को 4 किलो चांदी का थाल किया समर्पित
कहा, भगवान राम जी के दिव्य भव्य मंदिर का सपना देश के जन-जन का सपना
अयोध्या। भगवान राम की मूर्ति के प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव से पूर्व अयोध्या नगरी उत्सव का केंद्र बन चुकी है। प्रतिदिन अयोध्या में तमाम ऐसे धार्मिक और पारंपरिक आयोजन हो रहे हैं जो अयोध्या की गरिमा और संस्कृति का परिचय कराती हैं।राम मंदिर का उद्घाटन 22 जनवरी को होने जा रहा है। यह दुनियाभर के लोगों के लिए एक ऐतिहासिक और शुभ अवसर है। भक्त अपने भगवान की सेवा में दिल खोलकर दान कर रहें है,तो कुछ लोग विशेष उपहार लेकर रामनगरी आ रहें है। ऐसे में इस खास मौके पर देशभर से भक्त अनोखे उपहार भेज रहे हैं। ऐसे भी एक भक्त मेवाड़ भीलवाड़ा राजस्थान पूरन दास जी की बगीची के महंत श्री आशुतोष दास जी महाराज अपने तमाम शिष्य परिकरों के साथ भगवान की सेवा में विशेष उपहार लेकर आये। महंत श्री आशुतोष दास जी महाराज प्रसिद्ध पीठ श्री हनुमानगढ़ी में हनुमानजी की सेवा में विशेष कारीगरों से निर्मित दिव्य भव्य करीब 2 किलो चांदी का बेहतरीन मुकुट आज हनुमानगढ़ी के गद्दीनशीन श्रीमहंत प्रेमदास जी महाराज के हाथों समर्पित किया। महंत श्री आशुतोष दास ने बताया कि ये मुकुट राजस्थान के विशेष कारीगरों द्धारा निर्मित कराया गया था। जो आज श्री हनुमानजी की सेवा में समर्पित किया है। उन्होंने कहा कि सोमवार को करीब 4 किलो चांदी का भव्य विशेष थाल भगवान रामलला सरकार को समर्पित किया है। उन्होंने कहा कि 2019 में जब भगवान रामलला का भव्य शिलान्यास हुआ था तब वे अपने भक्तों के साथ चांदी की 5 ईटें जो करीब 5 किलों की रही उसे भगवान रामलला की सेवा में समर्पित किया था। महंत आशुतोष दास जी ने कहा भगवान राम जी के दिव्य भव्य मंदिर का सपना देश के जन-जन का सपना था। यह मूर्त रूप ले रहा है। जितना आनंद हमें है, सभी सनातनियों को भी है। देश के कोने-कोने से आने वाले लोग सबकुछ न्योछावर करने को तैयार हैं। अपने स्तर पर हर कोई मूल्यवान से मूल्यवान उपहार भगवान को भेंट कर रहा है। भगवान अपने घर पहुंच रहे, इससे बड़ा और क्या हो सकता है। इस मौके पर गद्दीनशीन जी के शिष्य समाजसेवी संत मामा दास, पहलवान नितिन दास, आचार्य विमलेश,सुरेश उपाध्याय सहित तमाम भक्त मौजूद रहें।
: गुरु गोविंद सिंह जी ने सदा प्रेम, एकता, भाईचारे का संदेश दिया: जत्थेदार बाबा महेंद्र सिंह
Wed, Jan 17, 2024
नजरबाग गुरूद्वारा में मनाया गया गुरू गाेविंद सिंह का प्रकाश पर्व
अयोध्या। हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी रामनगरी के श्रीगुरूनानक गाेविंद धाम गुरूद्वारा, नजरबाग में सिख धर्म के 10वें गुरू गाेविंद सिंह का प्रकाश पर्व धूमधाम से मनाया गया। पर्व पर पूरे गुरूद्वारा प्रांगण में अनुपम छटा निखर रही थी। इस अवसर पर गुरूदेव काे समर्पित कीर्तन, दीवान आदि का कार्यक्रम हुआ, जिसमें विशेष हाजिरी बाबा फतेह सिंह रूहानी कीर्तनी जत्थे की रही। कीर्तन, पाठ समाप्ति उपरांत लंगर का आयाेजन किया गया। लंगर में काफी संख्या में भक्तगणाें ने प्रसाद छका। इस माैके पर अयोध्या, फैजाबाद, साेहावल, नवाबगंज, मनकापुर की समस्त समूह साध-संगत उपस्थित रही। प्रकाश पर्व काे नजरबाग गुरूद्वारा के जत्थेदार बाबा महेंद्र सिंह महाराज ने सानिध्यता प्रदान करते हुए कहा कि गुरु गोविद सिंह सिख धर्म के 10वें गुरु थे। उनके बचपन का नाम गोविंद राय रहा। वह एक महान योद्धा, कवि, भक्त एवं आध्यात्मिक नेता थे। 1699 बैसाखी के दिन गुरु गोविद सिंह ने खालसा पंथ की स्थापना किया। यह दिन सिखों के इतिहास का सबसे महत्वपूर्ण दिन माना जाता है। गुरू ने अपना पूरा जीवन लोगों की सेवा और सच्चाई की राह पर चलते हुए ही गुजार दी। उनका उदाहरण और शिक्षाएं आज भी लोगों को प्रेरित करती है। उन्हें 10 वर्ष की आयु से ही दसवें सिख गुरु के रूप में जाना जाने लगा था। पिता के निधन के बाद वह कश्मीरी हिंदुओं की रक्षा के लिए गद्दी पर बैठे। यहीं नहीं उन्होंने बचपन में संस्कृत, उर्दू, हिंदी, ब्रज, गुरुमुखी और फारसी जैसी भाषाएं भी सीखीं। गुरु गोविंद सिंह ने ‘खालसा पंथ’ में जीवन के पांच सिद्धांत दिए हैं, जिन्हें ‘पंच ककार’ के नाम से जाना जाता है। इसका मतलब ‘क’ शब्द से शुरु होने वाले पांच सिद्धांत हैं, जिनका अनुसरण करना हर खालसा सिख के लिए अनिवार्य है। उन्होंने सिखों के पवित्र ग्रन्थ गुरु ग्रंथ साहिब को पूरा कर गुरु रूप में सुशोभित किया। उन्होंने धर्म के लिए समस्त परिवार का बलिदान किया, जिसके लिए उन्हें सर्ववंशदानी भी कहा जाता है। गुरु गोविंद सिंह जी ने सदा प्रेम, एकता, भाईचारे का संदेश दिया। उनकी मान्यता थी कि मनुष्य को न किसी से डरना और डराना चाहिए। उनकी वाणी में मधुरता, सादगी, सौजन्यता एवं वैराग्य की भावना कूट-कूटकर भरी थी। उनके जीवन का प्रथम दर्शन ही था कि धर्म का मार्ग सत्य का मार्ग है और सत्य की सदैव विजय होती है। उन्हाेंने अपना पूरा जीवन लोगों की सेवा और सच्चाई की राह पर चलते हुए ही गुजार दी। सेवादार नवनीत सिंह निशु ने बताया कि गुरूद्वारा में लाेहड़ी पर्व भी हर्षोल्लास पूर्वक मनाया गया, जिसका आयोजन देररात्रि तक चलता रहा।