: श्री राम के जीवन चरित्र से समाज को नई दिशा की तरफ ले जा सकते है: संध्या
Sun, Jul 28, 2024
हनुमान बाग मंदिर का छाया रामकथा का उल्लास, संत साधक लगा रहें गोता, जलाना पूना महाराष्ट्र के भक्तों से पटा हनुमान बाग
अयोध्या। रामनगरी के हनुमान बाग में श्री रामकथा महोत्सव का उल्लास अपने चरम पर है। व्यासपीठ से श्री रामकथा की अमृत वर्षा जलाना पूना से पधारी प्रख्यात कथावाचिका संध्या जी कर रही है।कथा के चतुर्थ दिवस में संध्या जी ने सभी भक्तों को राम कथा का रसपान बड़े ही मार्मिक एवं विस्तार से प्रसंग एवं संजीव झांकियो द्वारा करवा रही। उन्होंने बताया कि भगवान की सहज अवस्था बाल लीला के रूप में पूरे विश्व को एक नया दिग्दर्शन देता है जब भक्ति के पराभूत परमात्मा होता है तब वह बालक बन करके आता है।उन्होंने कहा कि भगवान ज्ञानी राजा के बुलाने पर भोजन करने नहीं आते पर जब कोई भक्त परमात्मा को पुकारता है तो भगवान नाचते हुए भक्तों के पास चले आते हैं। ब्रह्मम परमात्मा और भगवान तीनों एक ही तत्व है।निर्गुण वादी जिन्हें ब्रह्म कहते है विद्वान पंडित इन्हें परमात्मा कहते हैं और भक्त उन्हें भगवान कहते है। यह तीनों बातें ऐसे ही है जैसे बादल जल और बर्फ। संध्या जी ने भगवान श्री राम के बाल लीलाओं का विस्तार से वर्णन किया और कथा सुनाते हुए कहा कि एक ही तत्व के रूप में तीन अलग-अलग स्थानों पर अनुभव में आता है कि भगवान भक्ति के आधीन हो नरोत्तम लीला के लिए शरीर धारण करते है। भगवान अपने लीला के माध्यम से प्रत्येक लीला को अनुकरणीय रूप में प्रस्तुत करते है। उन्होंने कहा बाल्यकाल से मनुष्य का जीवन वैसा होना चाहिए जैसे भगवान श्री राम हमें सिखाते है। भगवान श्रीराम ने अपने श्रेष्ठ जनों के प्रति वंदन का भाव रखते है। प्रातःकाल उठिए कै रघुनाथा मात पिता गुरु नावई माथा। वर्तमान समय में हमें अपने बच्चों को अपने आराध्य श्री राम की जीवन चरित्र को पढ़ाना चाहिए जिससे वह हमारी संस्कृति और धर्म को अनुकरण में ला सकें और समाज को नई दिशा की तरफ ले जा सके। माता पिता भाई बंधु गुरु और देश काल परिस्थितियों से प्रेम कर सकें। कथा से पूर्व व्यासपीठ का पूजन कार्यक्रम के संयोजक श्याम जी लाखोटिया व जलाना पूना महाराष्ट्र के भक्तों ने किया। यह महोत्सव हनुमान बाग पीठाधीश्वर महंत जगदीश दास महाराज के अध्यक्षता में हो रहा।महोत्सव की देखरेख सुनील दास व रोहित शास्त्री कर रहें।इस मौके पर मामा दास, लवकुश दास, महंत हरिभजन दास, पुजारी योगेंद्र दास, नितेश शास्त्री सहित सैकड़ों संत महंत एवं राम कथा के रसिक गण उपस्थित रहे।
: रामचरितमानस सिखाती है जीवन जीने की कला : महंत जगदीश दास
Sat, Apr 13, 2024
हनुमान बाग में चल रहा विशाल अन्नक्षेत्र, रामभक्तों की सेवा में लस्सी,पूड़ी सब्जी, दाल चावल, खीर आदि भक्तोंहै समर्पित
हनुमान बाग सेवा संस्थान के तत्वावधान में धूमधाम से मनाया जा रहा भगवान रामलला का जन्मोत्सव, मंदिर सजा दुल्हन की तरह,बज रही बधाईयाँ
अन्नक्षेत्र प्रसाद वितरण करते सुनील दास
अयोध्या।श्रीरामजन्मोत्सव के पावन अवसर पर सुप्रसिद्ध पीठ हनुमान बाग मंदिर वासुदेव घाट में श्रीमहंत से जगदीश दास महाराज के सानिध्य में नव दिवसीय श्रीरामकथा, 151 वैदिक आचार्य नवाह पारायण पाठ, विशाल अन्नक्षेत्र का दिव्य आयोजन किया गया है। व्यासपीठ से अमृतमयी श्रीरामकथा कथा ख्यातिलब्ध कथावाचिका सुरभि जी ने उपस्थित साधु-संत एवं। भक्तगणों को रसास्वादन कराते हुए कहा कि रामचरित मानस का पाठ कोई भी, कभी करे उसका फल अवश्य प्राप्त होगा। वह भी अगर हम चैत्र नवरात्रि में नौ दिनों तक मानस का पाठ करते हैं। तो स्वाभाविक तौर पर हमारे जीवन में रामलला का प्राकट्य जरूर होगा। इस धराधाम पर अगर कहीं भी कोई अमृत है। तो वह कथारूपी अमृत है, जिसके पान से हम लोगों का सदा-सदा के लिए की कल्याण हो जाता है। इस कथारूपी अमृत का पान करने के लिए हम सब एकत्रित हुए हैं। वह भी भगवान श्रीरामलला के धाम में। तो यह सोने में सुहागा है। इस कथामृत का पान हम अवश्य करें। हमारा उद्धार हो जायेगा। यह पावन पुनीत अवध धाम है, जिसकी बड़ी ही महिमा है। यहां कथा श्रवण का बड़ा ही महत्व है। कथा सुनने और कथा सुनाने वाले दोनों का कल्याण होता है। रामचरित मानस बहुत ही पवित्र एवं पावन ग्रंथ है। यह एक ऐसा ग्रंथ है जो वानर से नर बना सकता है, जिसका कथाव्यास ने विस्तार पूर्वक वर्णन किया।
हनुमान बाग के महंत जगदीश दास महाराज ने कहा अयोध्या जी बड़ी ही पवित्र भूमि है। यहां पर किया गया पुण्य जीवन सवार देता है। हनुमान बाग मंदिर में रामभक्तों के लिए विविध प्रकार के पकवान प्रसाद रुप में भक्तों को खिला रहे है,जिसमें लस्सी, पूड़ी सब्जी, दाल चावल, खीर आदि भक्तों की सेवा में समर्पित है। यह अन्नक्षेत्र हनुमान बाग के भक्तों द्धारा चलाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि हमारा जीवन बहुत महत्वपूर्ण है। इसमें सुख और दुख दोनों है। हमारे जन्म-मृत्यु के बीच जो समय है उसमें सुख-दुख दोनों है। जन्म-मृत्यु के बीच हमारा जीवन सेतु है। बड़े भाग से हमें मानुष तन मिला है। इसका हम सही जगह सदपयोग करें। गोस्वामी कहते तुलसीदास हैं कि रामचरितमानस हमें जीवन जीने की कला सिखाता है। हम रामचरितमानस पान अवश्य करें। हमारा जीवन अपने आप सुधर जायेगा। हम नित्य तरक्की के पथ पर अग्रसर होंगे। कथा की अध्यक्षता स्वामी नारायणाचार्य जी कर रहें। कार्यक्रम की व्यवस्था में सुनील दास,पुजारी योगेंद्र दास, रोहित शास्त्री, नितेश शास्त्री लगे है। इस मौके पर संत-महंत और भक्तगण मंगलमयी श्रीरामकथा का रसपान कर अपना जीवन कृतार्थ कर रहे थे।
: रामजन्मोत्सव पर सजा सिद्ध पीठ श्यामा सदन मंदिर
Sat, Apr 13, 2024
जन कल्याणार्थ श्री राम महायज्ञ महोत्सव का 41 वां वर्ष, श्यामा सदन में उत्सव का उल्लास
पूर्वाचार्यों की त्याग,तपस्या से अवलोकित है मंदिर परिसर
अयोध्या। रामनगरी अयोध्या के प्रसिद्ध पीठों में शुमार श्यामा सदन मंदिर जो त्याग, तपस्या साधना का केंद्र भी है। मंदिर में सभी उत्सव बड़े ही धूमधाम के साथ मनाया जाता है। लगातार 41वर्षों से मंदिर में श्रीराम महायज्ञ महोत्सव का दिव्य आयोजन जन कल्याणार्थ चैत्रराम नवमी पर होता आ रहा है। अपनी परम्पराओं का निर्वहन करते हुए श्यामा सदन पीठाधीश्वर महंत श्रीधर दास महाराज इस बार चैत्रराम नवमी पर 41वां जन कल्याणार्थ श्री राम महायज्ञ महोत्सव बड़े ही हावभाव से मना रहें है। जो जिसमें जन कल्याणार्थ आहुतियां डाली जा रही है। श्यामा सदन पीठाधीश्वर महंत श्रीधर दास महाराज ने बताया कि पूज्य परमहंस श्री रामकिंकर दास जी महाराज के कृपापात्र श्री लालसखे जी महाराज के कृपापात्र पूज्य गुरुदेव भगवान श्री संत गोपाल दास जी महाराज के आशीर्वाद से यह उत्सव मनाया जा रहा है। जिसमें प्रतिदिन श्रीमद् वाल्मीकि नवाह परायण पाठ हो रहा है। मुख्य उत्सव 17 अप्रैल बुधवार को श्रीराम नवमी पर भगवान का जन्म महोत्सव मनाया जाएगा। यह उत्सव श्री श्यामा सदन धर्मार्थ सेवा ट्रस्ट रामघाट के तत्वावधान में हो रहा है।