: रामचरितमानस सिखाती है जीवन जीने की कला : महंत जगदीश दास
बमबम यादव
Sat, Apr 13, 2024
हनुमान बाग में चल रहा विशाल अन्नक्षेत्र, रामभक्तों की सेवा में लस्सी,पूड़ी सब्जी, दाल चावल, खीर आदि भक्तोंहै समर्पित
हनुमान बाग सेवा संस्थान के तत्वावधान में धूमधाम से मनाया जा रहा भगवान रामलला का जन्मोत्सव, मंदिर सजा दुल्हन की तरह,बज रही बधाईयाँ

अयोध्या।श्रीरामजन्मोत्सव के पावन अवसर पर सुप्रसिद्ध पीठ हनुमान बाग मंदिर वासुदेव घाट में श्रीमहंत से जगदीश दास महाराज के सानिध्य में नव दिवसीय श्रीरामकथा, 151 वैदिक आचार्य नवाह पारायण पाठ, विशाल अन्नक्षेत्र का दिव्य आयोजन किया गया है। व्यासपीठ से अमृतमयी श्रीरामकथा कथा ख्यातिलब्ध कथावाचिका सुरभि जी ने उपस्थित साधु-संत एवं। भक्तगणों को रसास्वादन कराते हुए कहा कि रामचरित मानस का पाठ कोई भी, कभी करे उसका फल अवश्य प्राप्त होगा। वह भी अगर हम चैत्र नवरात्रि में नौ दिनों तक मानस का पाठ करते हैं। तो स्वाभाविक तौर पर हमारे जीवन में रामलला का प्राकट्य जरूर होगा। इस धराधाम पर अगर कहीं भी कोई अमृत है। तो वह कथारूपी अमृत है, जिसके पान से हम लोगों का सदा-सदा के लिए की कल्याण हो जाता है। इस कथारूपी अमृत का पान करने के लिए हम सब एकत्रित हुए हैं। वह भी भगवान श्रीरामलला के धाम में। तो यह सोने में सुहागा है। इस कथामृत का पान हम अवश्य करें। हमारा उद्धार हो जायेगा। यह पावन पुनीत अवध धाम है, जिसकी बड़ी ही महिमा है। यहां कथा श्रवण का बड़ा ही महत्व है। कथा सुनने और कथा सुनाने वाले दोनों का कल्याण होता है। रामचरित मानस बहुत ही पवित्र एवं पावन ग्रंथ है। यह एक ऐसा ग्रंथ है जो वानर से नर बना सकता है, जिसका कथाव्यास ने विस्तार पूर्वक वर्णन किया।
हनुमान बाग के महंत जगदीश दास महाराज ने कहा अयोध्या जी बड़ी ही पवित्र भूमि है। यहां पर किया गया पुण्य जीवन सवार देता है। हनुमान बाग मंदिर में रामभक्तों के लिए विविध प्रकार के पकवान प्रसाद रुप में भक्तों को खिला रहे है,जिसमें लस्सी, पूड़ी सब्जी, दाल चावल, खीर आदि भक्तों की सेवा में समर्पित है। यह अन्नक्षेत्र हनुमान बाग के भक्तों द्धारा चलाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि हमारा जीवन बहुत महत्वपूर्ण है। इसमें सुख और दुख दोनों है। हमारे जन्म-मृत्यु के बीच जो समय है उसमें सुख-दुख दोनों है। जन्म-मृत्यु के बीच हमारा जीवन सेतु है। बड़े भाग से हमें मानुष तन मिला है। इसका हम सही जगह सदपयोग करें। गोस्वामी कहते तुलसीदास हैं कि रामचरितमानस हमें जीवन जीने की कला सिखाता है। हम रामचरितमानस पान अवश्य करें। हमारा जीवन अपने आप सुधर जायेगा। हम नित्य तरक्की के पथ पर अग्रसर होंगे। कथा की अध्यक्षता स्वामी नारायणाचार्य जी कर रहें। कार्यक्रम की व्यवस्था में सुनील दास,पुजारी योगेंद्र दास, रोहित शास्त्री, नितेश शास्त्री लगे है। इस मौके पर संत-महंत और भक्तगण मंगलमयी श्रीरामकथा का रसपान कर अपना जीवन कृतार्थ कर रहे थे।
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