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: रामलला देवस्थानम् में निष्क्रमण संस्कार महोत्सव का हुआ शुभारंभ

बमबम यादव

Wed, Jul 20, 2022

दाक्षिणात्य आचार्यों द्धारा कलश स्थापना, सुदर्शन महायज्ञ अवभृत्य स्न्नान का हुआ आयोजन

बच्चों के नामकरण संस्कार के लिए प्रसिद्ध है रामलला सदन:पीठाधीश्वर जगतगुरु राघवाचार्य

अयोध्या। भगवान श्री रामलला की जन्मभूमि के निकट रामकोट क्षेत्र में दक्षिण भारतीय वास्तुशैली में निर्मित श्री रामलला सदन देवस्थानम मेंं तीन दिवसीय सहस्त्र घटाभिषेक महोत्सव निष्क्रमण संस्कार का समारोह पूर्वक शुभारंभ हुआ। जिसमें दाक्षिणात्य आचार्यों द्धारा आज कलश स्थापन, सुदर्शन महायज्ञ एवं अवभृत्य स्न्नान का कार्यक्रम हुआ। इस उत्सव के मुख्य अतिथि वृंदावन स्थित भगवान रंगनाथ मंदिर के पीठाधीश्वर जगद्गुरु रामानुजाचार्य स्वामी गोवर्धन रंगाचार्य महाराज रहें।

आज से 48 दिन पहले एक जून को मंदिर परिसर में स्थापित भगवान श्री राम भारत लक्ष्मण शत्रुघ्न माता सीता और हनुमान जी महाराज की की गई थी प्राण प्रतिष्ठा। निष्क्रमण संस्कार 16 संस्कारों में से एक संस्कार है जिसको जन्म सवा महीने के बाद किया जाता है। ऐसी शास्त्रीय मान्यता है कि जिस दिन भगवान की प्राण प्रतिष्ठा की जाती है उसके सवा महीने बाद निष्क्रमण संस्कार मनाया जाता है। दक्षिण भारत से आए 21 वैदिक विद्वानों ने निष्क्रमण संस्कार के पहले दिन भगवान की पूजन अर्चन के साथ कलश स्थापन एंव सुदर्शन महायज्ञ अवभृत्य स्न्नान मृदा हरण और अंकुरापर्ण से हुआ प्रारंभ।

श्रीराम लला देवस्थानम के पीठाधीश्वर जगद्गुरु रामानुजाचार्य डॉ राघवाचार्य महाराज के संयोजन भगवान का तीन दिवसीय निष्क्रमण संस्कार मनाया जा रहा है जिसमें देश के विभिन्न कोने से आए हुए संत महंत व विद्वान सम्मिलित हो रहे हैं। यह वही मंदिर है जहां राजा दशरथ जी महाराज ने अपने चारों पुत्र राम भरत लक्ष्मण और शत्रुघ्न का नामकरण संस्कार किया था।रामलला सदन पीठाधीश्वर जगद्गुरु रामानुजाचार्य स्वामी डा. राघवाचार्य महाराज ने बताया कि निष्क्रमण संस्कार का अभिप्राय है बाहर निकलना। इस संस्कार में भगवान को सूर्य तथा चन्द्रमा की ज्योति दिखाने का विधान है। भगवान् भास्कर के तेज तथा चन्द्रमा की शीतलता से शिशु रूपी भगवान को बाह्य जगत से परिचित कराना ही इसका उद्देश्य है।

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