भगवदाचार्य स्मारक सदन की रामलीला में सीताराम विवाहोत्सव ने मोहा मन : पंचम दिवस पर श्रीराम कलेवा का हुआ सजीव मंचन, संत-महंतों और श्रद्धालुओं की उपस्थिति में राममय हुआ परिसर
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Mon, Oct 12, 2026
भगवदाचार्य स्मारक सदन की रामलीला में सीताराम विवाहोत्सव ने मोहा मन
पंचम दिवस पर श्रीराम कलेवा का हुआ सजीव मंचन, संत-महंतों और श्रद्धालुओं की उपस्थिति में राममय हुआ परिसर
अयोध्या। रामनगरी के भगवदाचार्य स्मारक सदन में आयोजित पौराणिक एवं ऐतिहासिक श्रीरामलीला के पंचम दिवस पर श्रीसीताराम विवाहोत्सव और श्रीराम कलेवा की लीला का भावपूर्ण एवं सजीव मंचन किया गया। प्रभु श्रीराम और माता सीता के विवाह प्रसंग ने श्रद्धालुओं को त्रेतायुग की दिव्य स्मृतियों से जोड़ दिया। मंचन के दौरान विवाह की पारंपरिक रस्मों, मंगलगीतों और भक्तिमय वातावरण ने परिसर को राममय बना दिया। उपस्थित श्रद्धालु भक्ति और श्रद्धा के भाव में डूबे नजर आए।
संत श्री तुलसीदास रामलीला समिति के तत्वावधान में आयोजित रामलीला में कलाकारों ने श्रीराम और माता सीता के विवाह से जुड़े प्रसंगों को जीवंत रूप में प्रस्तुत किया। विवाहोत्सव की लीलाओं के माध्यम से भारतीय संस्कृति, पारिवारिक परंपराओं और मर्यादित जीवन-मूल्यों का संदेश दिया गया। श्रीराम कलेवा के प्रसंग ने आयोजन में लोकपरंपराओं और धार्मिक आस्था का सुंदर समन्वय प्रस्तुत किया। मंचन के दौरान श्रद्धालुओं ने जय श्रीराम के जयघोष के साथ अपनी श्रद्धा व्यक्त की।
श्रीसीताराम विवाहोत्सव रामकथा का ऐसा प्रसंग है, जिसमें मर्यादा, प्रेम, समर्पण और पारिवारिक संस्कारों की झलक मिलती है। रामलीला के माध्यम से इन आदर्शों को जन-जन तक पहुंचाने का प्रयास किया गया। पारंपरिक धार्मिक प्रस्तुतियों के बीच श्रद्धालुओं ने प्रभु श्रीराम और माता सीता के स्वरूपों के दर्शन कर पुण्य लाभ प्राप्त किया। आयोजन ने अयोध्या की समृद्ध रामलीला परंपरा और सांस्कृतिक विरासत की महत्ता को भी रेखांकित किया।
इस अवसर पर संत श्री तुलसीदास रामलीला समिति के महामंत्री व अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के राष्ट्रीय प्रवक्ता महंत संजय दास महाराज, श्रृंगी ऋषि पीठाधीश्वर महंत हेमंत दास महाराज, महंत विवेक दास महाराज, महंत शशिकांत दास महाराज, महंत धनुषधारी शुक्ला, बाबा अभिषेक दास, पुजारी अंकित दास , अंबिका दास, घनश्याम दास, तन्मय दास एवं शिवम श्रीवास्तव सहित बड़ी संख्या में संत-महंत एवं श्रद्धालु उपस्थित रहे।
भगवदाचार्य स्मारक सदन की यह रामलीला अयोध्या की धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं को जीवंत बनाए रखने के साथ नई पीढ़ी को भगवान श्रीराम के आदर्शों से परिचित कराने का माध्यम बन रही है। पंचम दिवस की लीला ने श्रद्धालुओं के मन में भक्ति, आस्था और उल्लास का संचार किया।
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