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: विवाह के बाद मनाया गया कलेवा, गीतों पर झूमते रहे श्रद्धालु

बमबम यादव

Tue, Nov 29, 2022

श्री हनुमान बाग में कुवर कलेवा छप्पन भोग के साथ श्रीसीताराम विवाह महोत्सव का हुआ समापन

श्रीरामचरित मानस का पारायण भी विवाह प्रसंग तक करने की परम्परा कोहबर में ही विराजते हैं प्रेम में बंधे दूल्हा सरकार

अयोध्या। वैष्णव नगरी अयोध्या में उपासना की दो अलग-अलग शाखाएं हैं। इन शाखाओं में दास परम्परा और सख्य परम्परा शामिल है। मिथिला धाम से अपना रिश्ता जोड़ने वाले मधुरोपासक कहलाते हैं और सख्य भाव से राम व सीता के रूप में दूल्हा-दुलहिन सरकार की उपासना करते हैं। इन दोनों ही परम्पराओं के उपासक संत रामानंद सम्प्रदाय के प्रथम आचार्य के रूप में देवी सीता जी को ही स्वीकारते हैं। गुरु वंदना में सीतानाथ समारम्भाम् रामानंदार्य मध्यमाम अस्मादचार्य पर्यन्ताम वंदे श्रीगुरु परम्पराम् इसी श्लोक का वाचन किया जाता है। फिर भी दास परम्परा के उपासक राजा राम व हनुमान जी की उपासना दास यानी कि सेवक भाव से करते हैं। इसके समानान्तर सख्य भाव के उपासक सखी भाव की गुप्त उपासना करते हैं। इन संतों की मान्यता है कि जनकपुर में विवाह के बाद भगवान दुलहिन सरकार के साथ दूल्हा सरकार के रूप में ही विराजते हैं। यही कारण है कि ये उपासक श्रीरामचरित मानस के पारायण के दौरान विवाह प्रसंग तक का ही पारायण करते हैं। पूजन-अर्चन के दौरान सिर पर पल्लू रखकर त्रिरयोचित भाव से ही आराध्य को रिझाते हुए उनसे अनुनय-विनयपूर्वक प्रत्येक क्रिया करते हैं। 
रामनगरी में पिछले पांच दिनों से चल रहे राम विवाह महोत्सव में आज आखरी दिन कलेवा का कार्यक्रम किया गया। जिसमे भगवान राम और तीनो भाइयो को उपहार देकर विदाई के समय गाली देकर विदा किए जाने का कार्यक्रम किया गया। भगवान की जनक पूरी से विदाई के लिए महिलाएं भगवान राम के अचर धराई किया गया जिसमें दूरदराज से अयोध्या पहुंचे श्रद्धालुओं ने भगवान राम सभी भाइयो को विभिन्न प्रकार के उपहार दिया गया। इसके साथ ही विदाई कार्यक्रम के दौरान भगवान के भजनों पर श्रद्धालुु झूमते नाचते रहे।
नगरी के प्रसिद्ध मंदिरों में शुमार श्री हनुमान बाग में राम विवाह बड़े ही ठाठ बाट से मनाया गया। विवाह की बागडोर खुद महंत जगदीश दास अपने हाथों में ले रखें थे। जिसमे हनुमानगढ़ी के नागा साधुओं ने बढ़ चढ़ कर हिस्सा लिया। आज उसी हावभाव से कुवर कलेवा मनाया गया।जिसमें छप्पन प्रकार का व्यजंन बनाकर भगवान को भोग लगाया गया।

महंत जगदीश दास बताते हैं कि, ठाकुर जी के कलेवा में जो लोक रीति है। उस तरीके से भगवान कलेवा करते हैं और मौजूदा समाज को सनातन परंपरा की शिक्षा देते हैं। भगवान राम का पांव पूजा गया मां जानकी के साथ अग्नि को साक्षी मानकर भगवान राम ने सात फेरे लिए। इस दरमियान भगवान को मां जानकी के पक्ष के लोगों ने गाली सुनाया और कुंवर कलेवा के दरमियान भगवान ने अपनी जिद पूरी कराई। फिर चाहे वह हाथी घोड़ों की मांग हो या फिर मोटर गाड़ी की हर मांग को कन्या पक्ष ने पूरा किया। इन सब के साथ ही संपूर्ण रामनगरी भगवान राम के विवाह की साक्षी बनी। कार्यक्रम में मुख्य रुप से जगद्गुरू रामानन्दाचार्य स्वामी रामाचार्य जी महाराज, श्रृंगार कुंज के महंत हरिभजन दास, हनुमानगढ़ी से महंत नंदरामदास, नागा मामा दास, राजेश पहलवान समेत बड़ी संख्या में नागा साधु संत मौजूद रहे। आये हुए अथितियों का स्वागत सुनील दास, पुजारी योगेंद्र दास, रोहित शास्त्री, नितेश शास्त्री सहित हनुमान बाग परिवार ने किया।

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