: चलते-फिरते तीर्थंकर होते हैं संत महात्मा: प्रभंजनानन्द शरण
Sun, Dec 11, 2022
सियारामकिला झुनकी घाट में आयोजित श्रीमद् भागवत कथा का हुआ समापन
अयोध्या। रामनगरी को संतो की सराह भी कही जाती है यहां अनेक भजनानंदी संत हुये है जिनकी त्याग तपस्या साधना उच्च कोटि की रही। उन्हीं संतों में एक थे परमपूज्य झुनझुनियां बाबा जी महाराज। झुनझुनियां बाबा की तपोस्थली के रुप मे सुविख्यात श्री सियारामकिला झुनकी घाट पर चल रहे श्रीमद् भागवत कथा महोत्सव का आज समापन हो गया। कथा के विश्राम दिवस पर प्रख्यात कथावाचक प्रेममूर्ति स्वामी प्रभंजनानन्द शरण जी महाराज ने कहा कि संत-महात्माओं का आगमन सदैव मंगलकारी होता है, संतों से कभी कार्य की हानि नहीं होती, अपितु उनसे कार्य की सिद्धि होती है। उन्होंने कहा कि संतों के चरणों में समस्त तीर्थों का निवास होता है, क्योंकि संत के चरण तीर्थों में घूमते-रहते हैं, वो सभी जगह जाते हैं, इसलिए जब कभी भी संत आएं तो उनके चरणों को धो लेना चाहिए, क्योंकि उनके चरणों में सारे तीर्थों का स्पर्श पहले से ही विद्यमान रहता है। इसीलिए संतों को तीर्थंकर कहा जाता है। प्रभंजनानन्द जी ने कहा कि तीर्थ तभी तीर्थ बनता है जब वहां संतों के चरण पड़ जाते हैं, अगर तीर्थों में संत ना जाएं, केवल सामान्य लोग ही जाएं तो वो तीर्थ, तीर्थ नहीं होता। भागवत में गंगाजी की महिमा का वर्णन है, जिसमें गंगाजी कहती हैं मेरे अंदर बडे़-बड़े संत महात्माओं के डुबकी लगाने से लाखों लोगों को पवित्र करने का सामर्थ्य पैदा हो जाता है। इसीलिए आज भी कुंभ में संत-महात्माओं पहले शाही स्नान इसलिए करते हैं, ताकि संतो के नहाने से उस गंगा में लाखों लोगों को पवित्र करने का सामर्थ्य पैदा हो जाए। ये भागवत शास्त्र में लिखा प्रमाण है। उन्होंने कहा कि शास्त्रों में वर्णित है कि जिसके घर के दरवाजे पर संतों के चरण नहीं धोये जाते हों और संतों के चरण के धोने से वहां की जमीन ना भीगती हो, द्वार पर संतों का चरण प्रक्षालन नहीं होता है वो घर शमशान के समान है। संत महात्मा और विद्वान पुरूषों का सबसे बड़ा सम्मान विनम्रतापूर्व उनको प्रमाण करना ही उनके लिए सबसे बड़ा सम्मान है। प्रमाण से बड़ा कोई सम्मान नहीं होता। लेकिन वो प्रणाम बनावटी नहीं यथार्थ हो। नमस्कार पद की न्याय शास्त्र में व्याख्या है कि जिसको हम प्रणाम कर रहे हैं उसके सामने मेरा अपकर्ष और जिसको प्रणाम कर रहे हैं उसका उत्कर्ष। हमारी गतिविधि, क्रिया के द्वारा परिलक्षित हो। उसका नाम नमस्कार है। ये नमस्कार प्रणाम ये अंजली मुद्रा इतनी अद्भुत मुद्रा है, जिसके लिए शास्त्रो में कहा गया है कि ये मुद्रा ऐसी विलक्षण मुद्रा है कि एक क्षण मे देवता को प्रसन्न कर देती है, लेकिन वो सच्चे मन से हो। कथा की अध्यक्षता श्रीमहंत करुणानिधान शरण जी महाराज कर रहे है। कथा से पूर्व व्यासपीठ का पूजन आयोजक विकास कुमार हथदह पटना ने किया। यह कथा महोत्सव स्व मुरारी सिंह जी की पावन स्मृति में हो रहा है। इस मौके पर सियारामकिला झुनकी घाट के संत साधक व शिष्य परिकर मौजूद रहें।
: कृषि मंत्री ने निकाय चुनाव की रणनीति व तैयारियों की ली जानकारी
Sun, Dec 11, 2022
नगर निगम चुनाव संचालन समिति के साथ की बैठक
अयोध्या। प्रदेश सरकार में कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने सहादतगंज स्थित भाजपा कार्यालय में पार्टी की नगर निगम चुनाव संचालन समिति के साथ बैठक किया। बैठक के दौरान उन्होने महानगर की संगठनात्मक स्थिति, चुनाव को लेकर बनायी गयी रणनीति व तैयारियों के बारे में जानकारी हासिल की। इससे पहले पार्टी कार्यालय पहुंचने पर पदाधिकारियों व कार्यकर्ताओं ने कृषि मंत्री का स्वागत किया। कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही नगर निगम चुनाव के प्रभारी भी है।
कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने कहा कि प्रत्येक पदाधिकारी व कार्यकर्ताओं को सम्पर्क और संवाद की प्रक्रिया को और बढ़ाना है। संचालन समिति लगातार चुनाव को लेकर पार्टी की तैयारियों व उसके क्रियान्वयन की समीक्षा करें। प्रत्येक पदाधिकारी को मिली जिम्मेदारियों का निर्वाहन पूरे सामथ्य से करना चाहिए। महानगर जिलाध्यक्ष अभिषेक मिश्रा ने बताया कि चुनाव संचालन समिति की बैठक के दौरान विभिन्न विषयों पर गम्भीरता से चर्चा हुई। कृषि मंत्री संचालन समिति के सदस्यों से तैयारियों के बारें में सवाल भी पूछे। केन्द्र व प्रदेश सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं के सफल क्रियान्वयन की वजह से आम जनता में उत्साह का माहौल है। इस अवसर पर नगर निगम चुनाव संयोजक कमलेश श्रीवास्तव, अरविंद सिंह, प्रतीक श्रीवास्तव, देवेश तिवारी, प्रमोद साहू, राम कुमार सिंह राजू उपस्थित रहे।
: रामकथा भगवान के लीला, चरित्र, गुणों की गाथा है: रामानन्दाचार्य
Sun, Dec 11, 2022
नन्दीग्राम भरत कुंड में श्री रामकथा महोत्सव का उल्लास चरम पर
हमेशा भगवान की कथा सुननी चाहिए, हर घर में रामचरित मानस हो: बिंदुगाद्याचार्य
अयोध्या। अयोध्या के नन्दीग्राम भरत कुंड जहां पर भरत जी ने 14 साल भगवान राम के लिए तपस्या करते हुए अयोध्या का देखभाल किया उसी नन्दीग्राम भरत कुंड के श्रीराम जानकी मंदिर में श्री रामकथा महोत्सव का उल्लास अपने चरम पर है। व्यासपीठ से श्री रामकथा की अमृत वर्षा जगद्गुरु रामानन्दाचार्य स्वामी रामदिनेशाचार्य जी के श्री मुख से हो रहा है। कथा के द्धितीय दिवस में रामानन्दाचार्य स्वामी रामदिनेशाचार्य जी महाराज ने कहा कि राम कथा तन-मन को पवित्र कर उज्ज्वल करने के साथ-साथ जीवन शैली और आत्मा को नया रूप देती है। श्री रामकथा का महत्व हमेशा से है और आगे भी रहेगा। यह भगवान के लीला चरित्र गुणों की गाथा है। इसके श्रवण और कथन के प्रति हमेशा एक नवीनता का भाव बना रहता है। पूज्य महाराज जी ने कहा कि किसी आम व्यक्ति के जीवन चरित्र को एक दो या चार बार सुनने के बाद उसके प्रति उबन पैदा हो जाता है लेकिन यह भगवान की कथा है सत्य की कथा है इस नाते हमेशा कुछ न कुछ नया लगता है। इसे बार-बार कहने एवं सुनने की इच्छा हमेशा बनी रहती है।
महोत्सव की अध्यक्षता करते हुए दशरथ राजमहल बड़ा स्थान के पीठाधीश्वर बिंदुगाद्याचार्य स्वामी देवेंद्रप्रसादाचार्य जी ने कहा कि भगवान राम लक्ष्मण भरत और शत्रुघन के चरित्र में प्रदर्शित त्याग और तपस्या की बातों को निरंतर श्रवण करते रहने से सुनने वाले के अंदर भी ऐसे ही महान गुणों का समावेश हो जाता है। हमेशा भगवान की कथा सुननी चाहिए हर घर में रामचरित मानस हो तथा नित्यदिन इसको पढ़े व लोगों को श्रवण कराएं। इस दिव्य महोत्सव का संयोजन करते हुए दशरथ राज महल बड़ा स्थान के बिंदुगाद्याचार्य महंत देवेन्द्र प्रसादाचार्य के उत्ताराधिकारी मंगल भवन पीठाधीश्वर महंत कृपालु रामभूषण दास जी ने कहा कि हनुमान जी को रामनाम प्रिय है जहां भी रामकथा होती है वहां वे कथा सुनने आते हैं। हनुमान जी के हृदय में श्रीराम का निवास है। भगवान कभी जन्म नही लेते है हमेशा अवतार होता है। व्यासपीठ का पूजन संतों ने किया।व्यवस्थापक में गौरव दास शास्त्री शिवेंद्र दास शास्त्री रहे। इस मौके पर सैकड़ों संत महंत एवं राम कथा के रसिक गण उपस्थित रहे।