: मतदाता सूची पुनरीक्षण के नाम पर किया जा रहा खिलवाड़ : श्याम कृष्ण
Tue, Nov 8, 2022
शिकायत के नाम पर बीएलओ बदले जाने का चल रहा खेल
अयोध्या। नगर निकाय चुनाव की तैयारियों पर समाजवादी पार्टी ने सरकार और प्रशासन पर मनमानी का आरोप लगाया है। पार्टी के महानगर अध्यक्ष श्याम कृष्ण श्रीवास्तव का आरोप है कि परिसीमन और मतदाता सूची पुनरीक्षण के नाम पर खिलवाड़ किया जा रहा है। आपत्तियों की सुनवाई नहीं हो रही और शिकायत के नाम पर बीएलओ बदले जाने का खेल चल रहा है। मंगलवार को वह शाने अवध सभागार में पत्रकारों से मुखातिब थे। उन्होंने कहा कि परिसीमन में नक्शा कुछ और बनाया गया तथा मतदाताओं को 2 से 4 किलोमीटर दूर के वार्ड में जोड़ दिया गया। सत्ताधारी दल की साजिश से चुनाव आयोग के फरमान को ठेंगा दिखाया जा रहा है। बीएलओ ना तो सत्यापन के लिए घर जा रहे हैं और ना ही बूथों पर मिल रहे। जीत की गुणा-गणित को सेट करने के लिए कहीं मतदाताओं का नाम ही कटवाया जा रहा है तो कहीं उनको दूर किसी वार्ड में जोड़ दिया जा रहा है।बिना चुनाव घोषित हुए अभी से प्रशासन की मिलीभगत से निकाय पर कब्जा करने की कोशिश शुरू हो गई है। जीयनपुर गांव परिसीमन में दर्शन नगर वार्ड में है, लेकिन यहां के मतदाताओं को सरदार पटेल वार्ड में सम्मिलित कर दिया गया। सरदार पटेल वार्ड से नंदा पुर गांव के वोटर गायब है। चौधरी चरण सिंह वार्ड के मिर्जापुर शमशुद्दीन पुर गांव के वोटरों को 2 किलोमीटर दूर गंजा में जोड़ दिया गया। हद तो यह है कि शहर के महात्मा गांधी वार्ड में 4 किलोमीटर दूर स्थित अयोध्या के नोनहटिया ,कनीगंज,विद्याकुंड के मतदाताओं का नाम दर्ज है, जबकि विद्या खुद वार्ड है। महानगर अध्यक्ष ने कहा कि आयोग के मानक एक वार्ड में 4500 से 5000 तक मतदाता होने चाहिये, लेकिन कहीं 2800-3000 तो कही 3-6 हजार मतदाता सची में है। झारखंडी वार्ड के मध्य स्थित बसंतहाता के मतदाताओं का नाम पुलिस लाइन वार्ड में शिफ्ट कर दिया गया। इतना ही नहीं एक ही मकान नंबर के मतदाताओं का नाम सूची में अलग-अलग क्रमांक पर दर्ज किया गया है। प्रशासन को ज्ञापन और शिकायत के बावजूद कोई सुनवाई नहीं हुई। बीएलओ को लेकर शिकायत पर प्रभारी अधिकारी उसको बदल लेते हैं लेकिन प्रक्रिया जस की तस है। सरकार और आयोग निष्पक्ष चुनाव के लिए अभिलंब कदम उठाए। इस मौके पर महानगर प्रवक्ता राकेश यादव, महासचिव हामिद जाफर मीसम, उपाध्यक्ष श्रीचंद यादव, पूर्व प्रमुख राम अचल यादव, मोहम्मद शाहबाज लकी मौजूद रहे।
: भले ही हमारे घर छाेटे हाें, लेकिन दिल बड़ा हाेना चाहिए: राष्ट्रीय संत असंग देव
Tue, Nov 8, 2022
अयाेध्या। संत कबीर के किसी बात में हिंसा नही है। एक बार अर्जुन ने भगवान श्रीकृष्ण से पूछा था कि अगर किसी काे सुख पाने की इच्छा हाे। ताे सुख कैसे मिलेगा। आज साधु-संयासी, गृहस्थ सुख ढूढ़ रहे हैं। सभी बचपन से बुढ़ापे तक सुख ही सुख ढूढ़ते हैं। ढूढ़ते-ढूढ़ते उनका जीवन बीत जाता है। लेकिन सुख नही मिलता है। उक्त सारगर्भित उद्गार राष्ट्रीय संत असंग देव महाराज ने व्यक्त किए। वे श्रीरामवल्लभाकुंज जानकीघाट प्रांगण में चल रहे अमृतमयी सुखद सत्संग कथा के चतुर्थ दिवस श्रद्धालुओं को रसपान करा रहे थे। उन्होंने कहा कि हमारे जीवन में जितनी भी भाैतिक उपलब्धियां हैं। वह सिर्फ जीवन निर्वाह करने के लिए सरलता प्रदान करते हैं। लेकिन सुख न वस्तुओं से, न मकान और न गाड़ी से है। सुख काे शरीर, मन व आत्म तीन भागाें में बांटा गया है। यदि मन काे सुख चाहिए। ताे विवेकवान बनें। आत्मा की शांति के लिए श्रद्धावान बनाे। श्रद्धावान काे आत्म शांति मिलती है। शब्द हमें सुख और दुख देते हैं। संत कबीर कहते हैं कि शब्द बहुत बड़ी चीज है। जिन्हाेंने शब्द पर विवेक किया एवं विवेक शब्द बाेले। ताे उनका सब कार्य पूर्ण हाे जाता है। जिनकाे शब्द की साधना करना आ गया। वह बहुत आगे जाते हैं। राष्ट्रीय संत ने कहा कि भले ही हमारे घर छाेटे हाें। लेकिन हमारा दिल बड़ा हाेना चाहिए। जब तक मनुष्य दूसरे की संवेदना व दर्द काे नही समझता। दूसरे के भावाें काे नही पढ़ता है। तब तक उसका कल्याण संभव नही है। एक दिन सभी काे वृद्ध हाेना है। अपने बुजुर्गों का आदर करें। जिनके घर में बुजुर्गों का आदर नही है। वह घर, घर नही है। घर में बुजुर्गों की ही माैजूदगी से हमारी भव-बाधाएं दूर हाेती हैं। उनका पुण्य-प्रताप हमारे लिए कवच-कुंडल का कार्य करता है। जिसके घराें में बुजुर्गों की सेवा हाेती हैं। वहां देवी-देवताओं का वास हाेता है। उस घर पर गुरुओं की विशेष कृपा हाेती है। उन्होंने कहा कि अपने बच्चों काे अच्छे संस्कार दें। वह खूब पढ़-लिखकर आगे बढ़े। अपने देश, प्रदेश, जिले व कुल का नाम पूरी दुनिया में राेशन करें। हृदय रूपी तराजू से पहले ताैलिए। तब अपने मुख से वाणी निकालिए। लेकिन कभी झूठ न बाेलिए। सदैव सत्य के मार्ग पर चलें। इस अवसर पर श्रीरामवल्लभाकुंज अधिकारी राजकुमार दास, वैदेही भवन महंत रामजी शरण, कबीर मठ जियनपुर के महंत उमाशंकर दास, कार्यक्रम प्रभारी प्रवीन साहेब, हरीश साहेब, शील साहेब, रवींद्र साहेब आदि उपस्थित रहे। सुखद सत्संग कथा का पंडाल खचाखच श्रद्धालुओं से भरा रहा। बड़ी संख्या में भक्तगण अमृतमयी सत्संग का श्रवण कर अपना जीवन धन्य बना रहे थे।
: हैंडराइटिंग और डीएनए रिपोर्ट सरकार के दबाव में बनाई गई: अनुज धर
Tue, Nov 8, 2022
कहा, नेताजी गुमनामी बाबा के लिए बने आयोगों की जांच रिपोर्ट सूक्ष्म करके, सरकार की दबाव में बनाई गई
योगी सरकार पर हमला बोलते हुए अनुज धर ने कहा, सरकार के 6 साल पूरे होने वाले हैं लेकिन गुमनामी बाबा पर बनाई गई गैलरी की ओपनिंग आम जनता के लिए क्यों नहीं
अयोध्या। सुरसर मंदिर में आयोजित तीन दिवसीय श्री रामोत्सव और लिटरेचर फेस्टिवल में आए अनुज धर ने प्रेस से मुखातिब होते हुए कहा की गुमनामी बाबा भगवान जी ही नेताजी सुभाष चंद्र बोस थे यह सिद्ध हो चुका है । लेकिन तत्कालीन सरकार ने गुमनामी बाबा से जुड़ी साक्ष्यों कुछ छुपाया है। उन्होंने बताया की गुमनामी बाबा और नेताजी के संबंध में जितने आयोग बनाए गए सभी ने जांच रिपोर्ट सूक्ष्म करके और कहीं ना कहीं सरकार की दबाव में आकर के रिपोर्ट बनाई। उन्होंने बताया की नेताजी सुभाष चंद्र बोस और गुमनामी बाबा की हैंडराइटिंग जांच की रिपोर्ट मात्रा दो पन्ने में बना दी गई और यह सिद्ध कर दिया गया की दोनों अलग है और डीएनए रिपोर्ट को भी नेगेटिव बता दिया गया यह कौन नहीं जानता की सरकार के दबाव में कैसे रिपोर्ट बनते हैं।
उन्होंने बताया की अमेरिका के प्रसिद्ध हैंडराइटिंग एक्सपर्ट से हमने व्यक्तिगत बिना बताए हुए दोनों राइटिंग का टेस्ट कराया और बिना बताए ही उन्होंने बताया की यह दोनों हैंडराइटिंग एक ही व्यक्त किए हैं। और उन्होंने 40 पाने की एक रिपोर्ट बनाई। उन्होंने वर्तमान सरकार पर भी सवाल खड़ा करते हुए कहा की उत्तर प्रदेश में 6 साल योगी सरकार के पूरे होने वाले हैं लेकिन गुमनामी बाबा पर बनाई गई गैलरी की ओपनिंग आम जनता के लिए क्यों नहीं हुई। कहीं ना कहीं वर्तमान सरकार भी दर कर कम कर रही है। उन्होंने कहा की हम सभी लोग भारत के साथ-साथ पूरे देश में अवेयरनेस फैला रहे हैं और कोई भी सरकार हो अब नेताजी सुभाष चंद्र बोस की मौत मिस्त्री और गुमनामी बाबा से उनका संबंध छुपाया नहीं जा सकता। उन्होंने कहा जब गुमनामी बाबा की गैलरी आम जनता के लिए खोली जाएगी तो आम जनता अपने आप समझ जाएगा की यह कौन है क्या एक सन्यासी के पास इतनी बुक्स होंगी क्या एक सन्यासी इतनी नॉलेज रखेगा और अगर गुमनामी बाबा नेताजी सुभाष चंद्र बोस नहीं थे तो 1985 तक सरकार के लोग गुमनामी बाबा से मिलने क्यों आते थे। उन्होंने कांग्रेस सरकार के साथ-साथ वर्तमान सरकार पर भी सवाल या निशान खड़ा करते हुए कहा की आखिर नेताजी सुभाष चंद्र और गुमनामी बाबा के मौत का रहस्य को सरकार क्यों नहीं सुलझाना चाहती है।