: संतों ने पीएम मोदी के दीर्घायु के लिए किया अनुष्ठान
Sat, Sep 17, 2022
पीएम मोदी के 72 वें जन्मदिन पर रामनगरी के हनुमानगढ़ी पर गद्दीनशीन के शिष्य संत मामा दास के अगुवाई में लगा विशेष भोग, हुआ धार्मिक अनुष्ठान
अयोध्या। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 72 वां जन्मदिन पूरे देश में मन जा रहा है। हर कोई प्रधानमंत्री के दीर्घायु की कामना के लिए धार्मिक अनुष्ठान किया जा रहा है तो वही आधुनिक युग की तरह केक काटकर भी बधाई दी जा रही है। वही राम नगरी अयोध्या के प्रसिद्ध पीठ हनुमानगढ़ी पर भी उनके दीर्घायु की कामना के लिए की गई। कही हवन पूजन तो कही दीर्घायु के भगवान से किया गया मन्नत।
भगवान श्री राम की नगरी के हनुमानगढ़ी के नागा साधु राजू दास ने आज सुबह से ही हनुमानगढ़ी पर धार्मिक अनुष्ठान किये जिसमें सामुहिक हनुमान चालीसा का पाठ किया गया और प्रधानमंत्री के दीर्घायु और सफलता के लिए हनुमानगढ़ी की यज्ञशाला हनुमत यज्ञशाला में यज्ञ कर डाली गई आहुतियां। 5 वैदिक ब्राह्मणों की मौजूदगी में यज्ञ को संपन्न कराया गया। तो वही हनुमानगढ़ी के गद्दीनशीन श्रीमहंत प्रेमदास महाराज के कृपापात्र शिष्य मामा दास के संयोजन में हनुमान जी का विशेष श्रृंगार कर भगवान को भोग लगाया गया।
हनुमानगढ़ी के गद्दीनशीन श्रीमहंत प्रेमदास महाराज के कृपापात्र शिष्य मामा दास के साथ संतों के समक्ष प्रधानमंत्री के जन्मोत्सव के उपलक्ष में हनुमान जी महाराज के प्रधानमंत्री के दीर्घायु की कामना करते हुए आशीर्वाद मांगा है कि नरेंद्र मोदी शतायु हो दीर्घायु हो सनातन धर्म और अखंड भारत की मनोकामना पूर्ण होती रहे पूरे विश्व पर हिंदुस्तान की छाप रहे जिस प्रकार से सनातन धर्म संस्कृति प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने काम किया है।
: विश्व की सबसे बड़ी रामलीला "अयोध्या की रामलीला" तोड़ेगी अपना रिकार्ड
Fri, Sep 16, 2022
25 से 5 अक्टूबर तक होगी अयोध्या की रामलीला
रामलीला कमेटी के फाउंडर अध्यक्ष ने डीएम-एसएसपी को दिया निमंत्रण
अयोध्या। गुरूवार को अयोध्या की रामलीला कमेटी के फाउंडर अध्यक्ष सुभाष मलिक (बॉबी) ने ज़िला अधिकारी नीतीश कुमार व अयोध्या के एसएसपी प्रशांत वर्मा जी को रामलीला का निमंत्रण दिया वि उन्हें अयोध्या की रामलीला के बारे में जानकारी दी । इसी के साथ उन्होंने बताया की यह रामलीला का तीसरा संस्करण है जो की अयोध्या में लक्ष्मण किला सरयू नदी के किनारे किया जाता हैं। अयोध्या की रामलीला का आयोजन उत्तर प्रदेश सरकार के मुख्य मंत्री योगी आदित्यनाथ और संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री जयवीर सिंह और अयोध्या की रामलीला के मुख्य संरक्षक प्रवेश साहिब वर्मा (भाजपा सांसद) के सहयोग से अयोध्या की रामलीला का आयोजन होता है। हमारी कमेटी का एक ही उद्देश्य है की भगवान श्रीराम की रामलीला को सभी राम भक्त घर पर बैठकर देख पाएं।। अयोध्या की रामलीला विश्व की सबसे बड़ी रामलीला है, 2020 में 16 करोड़, और 2021 में बाईस करोड़ से ज्यादा अयोध्या की रामलीला का लाइव टेलीकास्ट दूरदर्शन और कई सेटेलाइट चैनल और सोशल मीडिया यूट्यूब पर होता है।इसका आयोजन भगवान श्री राम के आशिर्वाद से होता है। इसमें गुफ़ी पेंटल नारद मुनि की भूमिका निभा रहे है, गिरजा शंकर राजा दशरथ श्रीराम के पिताश्री की भूमिका निभा रहे है, भाग्यश्री,राकेश बेदी, रजा मुराद, और कई बॉलीवुड की महान हस्तियां अयोध्या की रामलीला में काम कर रही हैं। अयोध्या कि रामलीला कमेटी के फाउंडर अध्यक्ष सुभाष मालिक(बॉबी) ने बताया अयोध्या कि रामलीला का अयोजन 25 सितंबर से 5 अक्टूबर 2022 तक अयोध्या में हर वर्ष कि तरह लाइव देख पाएंगे। इस वर्ष अयोध्या कि रामलीला का तीसरा संस्करण होगा। जिसको लाइव दिखाया जाएगा। शाम 7 से रात 10 बजे तक दूरदर्शन पर देख पाएंगे। , रवि किशन केवट, विंदू दारा सिंह जी हनुमान, गजेंद्र चौहान राजा जनक, शाहबाज खान रावण, गुफ़ी पेंटल नारद मुनि, गिरजा शंकर दशरथ, कपिल शर्मा शो की बुआ उपासना सिंह कैकेई, दीक्षा रैना सीता, राहुल बुचर राम , रजा मुराद महर्षि विश्वामित्र की भूमिका निभाएंगे। इस मौके पर अयोध्या कि रामलीला कमेटी के चेयरमैन राकेश बिंदल,वॉइस चेयरमैन प्रदीप अग्रवाल, वॉइस चेयरमैन कैप्टन राज माथुर, वॉइस चेयरमैन अनुज अग्रवाल, संरक्षक सत प्रकाश राणा ,सरंक्षक पवन वत्स ,उपाध्यक्ष दीपक भगचंदनी आदि मौजूद थे।
: रामलला सदन में रामानुजाचार्य कर रहे पितृसमर्चनम्
Fri, Sep 16, 2022
रामलला सदन पीठाधीश्वर जगद्गुरू रामानुजाचार्य स्वामी डा राघवाचार्य कहते है कि पूर्वजों का संस्कार कराते हैं मार्गदर्शन
अयोध्या। सनातन धर्म में मान्यता है कि पितृपक्ष के 15 दिनों के दौरान परिवार को आशीर्वाद देने से स्वर्गवासी पितर की आत्मा धरती पर आती है। इसलिए उनके श्राद्ध के दिन आत्मिक शांति के लिए पिंडदान एवं तर्पण किया जाता है। पितरों का स्मरण कर श्रद्धा के साथ श्राद्धकर्म किया जाता है। धर्मगुरु रामलला सदन पीठाधीश्वर जगद्गुरू रामानुजाचार्य स्वामी डा राघवाचार्य जी के अनुसार पितृ पक्ष के दौरान पुत्रों को अपने पूर्वजों का पिंडदान, तर्पण एवं श्राद्ध के बाद ब्राह्मण भोज कराना चाहिए। लेकिन यदि पुत्र जीवति न हो तो पौत्र, प्रपौत्र या विधवा पत्नी भी श्राद्ध कर सकती है। पुत्र न होने की स्थिति में पत्नी का श्राद्ध पति करता है। यदि पिता के एक से अधिक पुत्र हैं तो सबसे बड़े पुत्र को ही श्राद्ध करना चाहिए। यदि सभी भाई अलग अलग रहते हैं तो सभी अपने अपने घर में श्राद्ध कर सकते हैं। संयुक्त परिवार के रूप में यदि सभी साथ रहते हैं तो एक ही जगह श्राद्ध करना चाहिए।
पितृपक्ष का समापन आश्विनी मास की अमावस्या को होगा। इस अमावस्या को सर्वपितृ अमावस्या करते हैं। रामलला सदन पीठाधीश्वर जगद्गुरू रामानुजाचार्य स्वामी डा राघवाचार्य जी कहते हैं कि पूर्व की तरफ मुख करके देवता, उत्तर की तरफ मुख करके सप्त ऋषियों को नमन करने के बाद दक्षिण की तरफ मुख करके तीन बार आचमन करें। ततपश्चात पित्रों को जल तर्पण करना चाहिए। उंगली में पैंती और धोती पहने रहें। सुविधा एवं नियमानुसार बाल-दाढ़ी और खानपान का ख्याल रखें। अधिकतर लोग पितृपक्ष में रोजाना अपने पितरों के लिए तर्पण करते हैं तो कुछ लोग श्राद्ध की तिथियों पर पितरों के नाम से ब्राह्मणों को भोजन कराकर श्राद्ध करते हैं। श्राद्ध के दिन ब्राह्मणों को आदरपूर्वक घर बुलाते हैं और उन्हें भोजन करवाकर यथासंभव दान-दक्षिण देकर विदा करते हैं।