सम्प्रदायाचार्य श्रीचंद महाराज की जयंती श्रद्धापूर्वक मनाई : आश्रम के श्रीमहंत डा. भरत दास ने की आरती-पूजा, आश्रम के संस्थापक बाबा संगत बख्श समेत सभी आचार्यों की समाधि का किया पूजन
बमबम यादव
Sun, Sep 20, 2026
सम्प्रदायाचार्य श्रीचंद महाराज की जयंती श्रद्धापूर्वक मनाई
आश्रम के श्रीमहंत डा. भरत दास ने की आरती-पूजा, आश्रम के संस्थापक बाबा संगत बख्श समेत सभी आचार्यों की समाधि का किया पूजन
गुरु पर्व महोत्सव 27 सितम्बर से पांच अक्टूबर तक चलेगा
5 अक्टूबर को रक्षामंत्री राजनाथ सिंह व सीएम योगी आदित्यनाथ कार्यक्रम में होगें शामिल, करेगें नारायण संस्कृत महाविद्यालय का उद्घाटन
आश्विन मास के आरंभ के साथ आचार्य परम्परा नुसार उदासीन संगत ऋषि आश्रम रानोपाली में गुरु पर्व का आयोजन परम्परागत रूप से किया जाता है। इसी कड़ी में 27 सितम्बर से गुरु पर्व का शुभारम्भ श्रीमद्भागवत (कथा) ज्ञान यज्ञ सप्ताह से होगा। इस कथा की पूर्णाहुति 3 अक्टूबर को होगी। पुनः 3 को अखंड श्रीराम चरित मानस का पाठ शुरू होगा। इस पाठ की पूर्णाहुति 4 पांच अक्टूबर को होने के साथ ध्वजारोहण होगा और वार्षिक मेला व संतों व भक्तों का भंडारा भी होगा। 5 अक्टूबर को ही देश के रक्षामंत्री राजनाथ सिंह व सूबे के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ कार्यक्रम में शामिल होगें इसके साथ ही परिसर के अन्दर श्री नारायण संस्कृत महाविद्यालय का उद्घाटन भी करेंगे।
अयोध्या। उदासीन संगत ऋषि आश्रम रानोपाली में उदासीन सम्प्रदाय के प्रवर्तक भगवान श्रीचंद महाराज की 532 वीं जयंती श्रद्धापूर्वक मनाई गई। इस अवसर पर आश्रम के पीठाधीश्वर श्रीमहंत डा. भरत दास की अगुवाई में सम्प्रदायाचार्य की विशेष पूजा-अर्चना की। आश्रम में स्थित उनकी मूर्ति का अभिषेक कर विशेष श्रृंगार किया गया और फिर मंदिर के महंत डा. श्री दास ने आरती उतारी। वहीं उन्होंने आश्रम के संस्थापक आचार्य बाबा संगत बख्श सहित अन्य आचार्यों की समाधि का भी पूजन किया। इस दौरान भजन-कीर्तन चलता रहा। महंत डा. दास ने बताया कि प्रतिवर्ष श्रीचंद्र महाराज जयंती भादौ शुक्ल नवमी को मनाई जाती है। उन्होंने बताया कि भगवान श्रीचंद्र, गुरु नानक देव जी के बड़े बेटे थे। उनका जन्म सन 1449 में हुआ था और उन्होंने अपना जीवन तपस्या और आध्यात्मिक यात्रा में बिताया, जिससे वे भारत के विभिन्न क्षेत्रों में गुरु नानक की शिक्षाओं का प्रसार करने में सहायक हुए। उन्होंने बताया कि जन्म के समय उनके शरीर पर विभूति (पवित्र राख) लगी थी और कानों में कुंडल थे, जिससे उन्हें भगवान शिव का अवतारी माना जाता हैं। उनका बेहद चमत्कारिक व्यक्तित्व था। उन्होंने विपरीत परिस्थितियों में धर्म की रक्षा की। जयंती के मौके पर नारायण राम संस्कृत महाविद्यालय के प्राचार्य डा. रामभद्र दास, अभिषेक दास, धर्म दास समेत संस्कृत विद्यालय के ब्रह्मचारी मौजूद रहे।
Tags :
विज्ञापन
विज्ञापन