Sunday 26th of July 2026

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भजनानंदी संत हाेने के साथ-साथ गाै और संत सेवी रहे, जिनका व्यक्तित्व बड़ा ही उदार था: महंत कुलदीप दास

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श्रीमहंत सरयू दास महाराज को संतों ने किया नमन : भजनानंदी संत हाेने के साथ-साथ गाै और संत सेवी रहे, जिनका व्यक्तित्व बड़ा ही उदार था: महंत कुलदीप दास

श्रीमहंत सरयू दास महाराज को संतों ने किया नमन

 श्रीराघव मंदिर में बड़े ही श्रद्धा भाव के साथ मनाई गई10वीं पुण्यतिथि महोत्सव

भजनानंदी संत हाेने के साथ-साथ गाै और संत सेवी रहे, जिनका व्यक्तित्व बड़ा ही उदार था: महंत कुलदीप दास

अयोध्या। रामनगरी की सुप्रसिद्ध पीठ श्रीराघव मंदिर रामघाट के साकेतवासी श्रीमहंत सरयू दास महाराज काे संताें ने श्रद्धा से याद किया। अवसर उनकी 10वीं पुण्यतिथि महाेत्सव रहा। पुण्यतिथि पर रविवार को मंदिर प्रांगण में श्रद्धांजलि सभा आयाेजित हुई। सभा में अयोध्या धाम के विशिष्ट संत-महंताें ने पूर्वाचार्य के चित्रपट पर पुष्पांजलि अर्पित कर नमन किया। संताें द्वारा साकेतवासी महंत के कृतित्व-व्यक्तित्व पर प्रकाश भी डाला गया। श्रीराघव मंदिर के वर्तमान पीठाधीश्वर महंत कुलदीप महाराज ने पधारे हुए संत-महंताें का स्वागत-सत्कार कर भेंट, विदाई दिया। महंत कुलदीप दास महाराज ने बताया कि मंदिर में गुरुदेव सरयू दास महाराज की पुण्यतिथि श्रद्धा के साथ मनाई गई। वह भजनानंदी संत हाेने के साथ-साथ गाै और संत सेवी रहे। जिनका व्यक्तित्व बड़ा ही उदार था। सरलता ताे उनमें देखते ही झलकती थी। उन्होंने मंदिर का सर्वांगीण विकास किया। मंदिर में आए व्यक्ति को कभी वह भूखा नही जाने देते थे। उन्होंने सेवा काे ही अपना धर्म माना। आजीवन सेवा ही परमाेधर्मा के मार्ग पर चलते रहे। उनका मानना था कि सेवा ही परम धर्म है। इससे बढ़कर और कोई दूसरा धर्म नही है। अपने शिष्य-अनुयायियाें काे भी सेवा का पाठ पढ़ाया। साथ ही साथ सेवा धर्म के लिए प्रेरित भी किया। महाराज श्री के मार्गदर्शन में कई सेवा प्रकल्प के कार्य संचालित हुए, जिसमें बहुत से कार्य आज भी चल रहे। उनके बारे में जितना कहा जाए वह कम ही हाेगा। वह हमारे बीच में नही हैं, लेकिन उनकी यश-कीर्ति सदैव हम सबके साथ रहेगी। आश्रम में गाै, संत, विद्यार्थी, आगंतुक सेवा सुचार रूप से चल रही है। सभी उत्सव, समैया, त्याेहार आदि परंपरागत रूप से मनाया जा रहा है। पुण्यतिथि पर निर्वाणी अनी के श्रीमहंत मुरली दास, अखाड़ा परिषद के राष्ट्रीय प्रवक्ता एवं संकटमोचन सेनाध्यक्ष महंत संजय दास, महंत रामकुमार दास, जगतगुरु रामानुजाचार्य स्वामी रत्नेश प्रपन्नाचार्य, जगतगुरु परमहंसाचार्य, महंत राघवेश दास वेदांती, महंत हरिसिद्धि शरण, महंत सीताराम दास, महंत डॉ. ममता शास्त्री, महंत परशुराम दास, महंत हेमंत दास, महंत रामनरेश शरण, महंत प्रियाप्रीतम शरण, पुजारी दिनेशजी, महंत प्रदीप दास, महंत लक्ष्मण दास, महंत अवनीश दास, महंत प्रशांत दास, नागा रामलखन दास, महंत तेजपाल दास, महंत बागीश शरण, महंत रामकृष्ण दास रामायणी, महंत आनंद दास, महंत विनोद दास, महंत देवेंद्र दास, पुजारी रमेश दास, कल्लू दास, संत दास आदि माैजूद रहे।

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