Thursday 15th of October 2026

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भगवदाचार्य स्मारक सदन की ऐतिहासिक रामलीला के अष्टम दिवस हुआ सजीव मंचन, संत-महंतों सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु रहे

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निषाद मिलन, दशरथ मरण और चित्रकूट प्रसंगों ने भावुक किए श्रद्धालु : भगवदाचार्य स्मारक सदन की ऐतिहासिक रामलीला के अष्टम दिवस हुआ सजीव मंचन, संत-महंतों सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु रहे

निषाद मिलन, दशरथ मरण और चित्रकूट प्रसंगों ने भावुक किए श्रद्धालु

भगवदाचार्य स्मारक सदन की ऐतिहासिक रामलीला के अष्टम दिवस हुआ सजीव मंचन, संत-महंतों सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु रहे मौजूद

अयोध्या। रामनगरी के भगवदाचार्य स्मारक सदन में आयोजित पौराणिक एवं ऐतिहासिक श्रीरामलीला के अष्टम दिवस निषाद मिलन, दशरथ मरण एवं चित्रकूट प्रसंगों का भावपूर्ण मंचन किया गया। प्रभु श्रीराम के वनगमन, निषादराज के साथ आत्मीय मिलन, पुत्र वियोग में राजा दशरथ के प्राण त्यागने और चित्रकूट में प्रभु श्रीराम के प्रवास से जुड़े प्रसंगों ने श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया। मंचन के दौरान भक्ति, त्याग, प्रेम और मर्यादा के प्रसंगों ने वातावरण को राममय बना दिया।

रामलीला में निषादराज और प्रभु श्रीराम के मिलन का प्रसंग विशेष आकर्षण का केंद्र रहा। निषादराज का प्रभु श्रीराम के प्रति अगाध प्रेम, समर्पण और आत्मीयता सामाजिक समरसता तथा निष्कपट भक्ति का संदेश देती नजर आई। इस प्रसंग ने यह भाव स्थापित किया कि प्रभु श्रीराम के लिए भक्त की निष्ठा और प्रेम ही सर्वोपरि है। वहीं, वनगमन के बाद पुत्र वियोग में व्याकुल राजा दशरथ के जीवन की अंतिम घड़ियों के मंचन ने दर्शकों को भावुक कर दिया। श्रीराम से बिछोह का असहनीय दुख और पिता-पुत्र के अटूट स्नेह का चित्रण देखकर श्रद्धालु भावविह्वल हो उठे।

इसके बाद चित्रकूट प्रसंग का मंचन हुआ, जिसमें वनवास के दौरान प्रभु श्रीराम के जीवन, उनके आदर्शों और धर्म के प्रति अटूट प्रतिबद्धता को दर्शाया गया। कलाकारों ने संवाद, भाव-भंगिमाओं और सजीव अभिनय के माध्यम से रामकथा के इन महत्वपूर्ण प्रसंगों को प्रभावशाली रूप में प्रस्तुत किया। मंचन ने श्रद्धालुओं को मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम के आदर्शों को आत्मसात करने तथा जीवन में धर्म, कर्तव्य और त्याग का मार्ग अपनाने की प्रेरणा दी।

इस अवसर पर संत श्री तुलसीदास रामलीला समिति के कोषाध्यक्ष एवं बड़ा भक्तमाल पीठाधीश्वर महंत अवधेश कुमार दास महाराज, समिति के महामंत्री महंत संजय दास महाराज, नागा राम लखन दास महाराज, श्रृंगी ऋषि पीठाधीश्वर महंत हेमंत दास महाराज, राम कचेहरी के महंत शशिकांत दास महाराज, प्रतिष्ठित व्यवसायी अजीत पांडेय ‘पिंटू’, महंत धनुषधारी शुक्ला, महंत अनिरुद्ध शुक्ला, हनुमान बाग के संत रोहित दास तथा महंत विराट दास जी उपस्थित रहे।

इसके अतिरिक्त पुरोहित समाज से ओमप्रकाश, घनश्याम दास, अंबिका दास, घनश्याम दास, तन्मय दास , देवव्रत पांडेय एवं समिति के सचिव शिवम श्रीवास्तव सहित बड़ी संख्या में संत-महंत, धर्मप्रेमी और श्रद्धालु मौजूद रहे।

भगवदाचार्य स्मारक सदन की यह ऐतिहासिक रामलीला अयोध्या की धार्मिक एवं सांस्कृतिक परंपरा को जीवंत बनाए रखने के साथ नई पीढ़ी तक भगवान श्रीराम के आदर्शों को पहुंचाने का महत्वपूर्ण माध्यम बनी हुई है। रामलीला के माध्यम से प्रस्तुत प्रसंग श्रद्धालुओं को सत्य, प्रेम, त्याग, सेवा और मर्यादा के मार्ग पर चलने की प्रेरणा दे रहे हैं।

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