अयोध्या में 16 अक्टूबर को होगा ‘सीइंग इक्वली’ पुस्तक का लोकार्पण : धर्म, लोकतंत्र और सामाजिक सद्भाव पर जुटेंगे जनप्रतिनिधि, संत और विचारक
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Tue, Oct 13, 2026
अयोध्या में 16 अक्टूबर को होगा ‘सीइंग इक्वली’ पुस्तक का लोकार्पण
धर्म, लोकतंत्र और सामाजिक सद्भाव पर जुटेंगे जनप्रतिनिधि, संत और विचारक
अयोध्या। धर्म, समानता और सामाजिक सद्भाव के सवालों पर संवाद के लिए 16 अक्टूबर को अयोध्या में सीलिंग इक्वली पुस्तक का लोकार्पण नयाघाट स्थित बाल योगी महंत रामदास के करतलिया बाबा आश्रम में शाम 5:30 बजे आयोजित होगा।कार्यक्रम में जनप्रतिनिधि, संत, पत्रकार और सामाजिक विचारक शामिल होंगे। कार्यक्रम का आयोजन वेस्टलैंड बुक्स और करतलिया बाबा आश्रम की ओर से किया जा रहा है।पुस्तक में हिंदू परंपरा के भीतर प्रेम, करुणा, समानता और सामाजिक न्याय जैसे मूल्यों को रेखांकित किया गया है। इसमें धर्म के नाम पर होने वाले जातिगत भेदभाव, सामाजिक विभाजन और धार्मिक संकीर्णता पर भी सवाल उठाए गए हैं। पुस्तक का उद्देश्य धार्मिक परंपराओं में निहित समावेशी और मानवीय विचारों को सामने लाना है।प्रोफेसर अनंतानंद रामबचन और सुनीता विश्वनाथ द्वारा संपादित इस पुस्तक में 13 निबंध शामिल हैं। भारत, अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया के हिंदू धार्मिक नेताओं और विचारकों ने इन निबंधों के माध्यम से समानता, करुणा और सामाजिक न्याय के विभिन्न पहलुओं पर विचार रखे हैं। पुस्तक में धर्म को केवल पूजा-पाठ और अनुष्ठानों तक सीमित न मानकर उसे सामाजिक जिम्मेदारी और मानवीय गरिमा से जोड़ने पर जोर दिया गया है।पुस्तक में हिंदू धर्म और हिंदुत्व की विभाजनकारी राजनीतिक विचारधारा के बीच अंतर को भी रेखांकित किया गया है। इसमें कहा गया है कि धर्म का आधार प्रेम, शांति और मानवता होना चाहिए। जातिगत भेदभाव, पितृसत्ता और दूसरे समुदायों के प्रति घृणा जैसी प्रवृत्तियों पर सवाल उठाते हुए समानता और समावेशिता को बढ़ावा देने का आह्वान किया गया है।कार्यक्रम में अयोध्या के सांसद अवधेश प्रसाद, पूर्व मंत्री पवन पांडेय, महंत दिलीप दास, वरिष्ठ पत्रकार सुमन गुप्ता, पुस्तक के योगदानकर्ता स्वामी राघवेंद्र और करतलिया बाबा आश्रम के महंत रामदास के शामिल होने की जानकारी दी गई है। महंत रामदास का लेख भी पुस्तक में शामिल है।पुस्तक का दिल्ली में पहले ही लोकार्पण हो चुका है। अयोध्या में होने वाला यह आयोजन देश के विभिन्न हिस्सों में अगले तीन महीनों तक प्रस्तावित संवाद कार्यक्रमों की शृंखला का हिस्सा है। आयोजकों के अनुसार, इन कार्यक्रमों के माध्यम से धर्म की मानवीय भूमिका, लोकतांत्रिक मूल्यों और सामाजिक सद्भाव पर व्यापक विमर्श को आगे बढ़ाया जाएगा।
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