नाबालिग का वीडियो वायरल करना पड़ा भारी! : एसएसपी से लेकर संपादक तक को नोटिस! 3 नवंबर को फिर होगी सुनवाई!
admin
Fri, Oct 30, 2026
नाबालिग का वीडियो वायरल करना पड़ा भारी!
एसएसपी से लेकर संपादक तक को नोटिस! 3 नवंबर को फिर होगी सुनवाई!
नाबालिग का वीडियो वायरल करना पड़ा भारी! पुलिस अधिकारियों से लेकर अखबार के संपादक तक को किशोर न्यायालय का नोटिस
अयोध्या में रौनाही टोल प्लाजा प्रकरण ने पकड़ा कानूनी तूल, नाबालिग आरोपी की प्रेस कॉन्फ्रेंस का वीडियो और प्रेस नोट वायरल करने पर उठे सवाल; एसएसपी गौरव ग्रोवर समेत कई को नोटिस, 3 नवंबर को अगली सुनवाई
अयोध्या/रौनाही। नाबालिग आरोपी का वीडियो और प्रेस कॉन्फ्रेंस से जुड़ी सामग्री सार्वजनिक करना पुलिस विभाग और संबंधित पक्षों के लिए कानूनी परेशानी का कारण बन गया है। रौनाही टोल प्लाजा प्रकरण में किशोर आरोपी की प्रेस कॉन्फ्रेंस का वीडियो और प्रेस नोट वायरल किए जाने के मामले में प्रधान किशोर न्यायालय बोर्ड ने संज्ञान लेते हुए प्रकीर्ण वाद दर्ज किया है। मामले में वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक गौरव ग्रोवर, पूर्व एसपी ग्रामीण बलवंत चौधरी, थाना प्रभारी रौनाही रतन शर्मा और अमर उजाला के संपादक समेत संबंधित पक्षों को नोटिस जारी किए गए हैं।
मामले को लेकर वरिष्ठ अधिवक्ता प्रवीण दुबे ने प्रधान किशोर न्यायालय बोर्ड का दरवाजा खटखटाया था। उन्होंने नाबालिग आरोपी की पहचान और उससे संबंधित वीडियो एवं प्रेस नोट सार्वजनिक किए जाने के मामले को न्यायालय के समक्ष उठाया। इस पर न्यायालय ने मामले का संज्ञान लेते हुए प्रकीर्ण वाद दर्ज किया और संबंधित पक्षों से जवाब तलब किया।
बताया जा रहा है कि रौनाही टोल प्लाजा से जुड़े प्रकरण में पुलिस की ओर से नाबालिग आरोपी की प्रेस कॉन्फ्रेंस का वीडियो और प्रेस नोट सार्वजनिक रूप से प्रसारित हुआ था। इसी को लेकर कानूनी आपत्ति उठाई गई। मामला किशोर न्यायालय पहुंचने के बाद पुलिस महकमे में भी हलचल मच गई है।
सुनवाई के दौरान थाना प्रभारी रौनाही रतन शर्मा ने अपना पक्ष न्यायालय के सामने रखा। अन्य संबंधित पक्षों को भी अपना जवाब प्रस्तुत करने का अवसर दिया गया है। न्यायालय ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 3 नवंबर की तारीख निर्धारित की है।
अब निगाहें 3 नवंबर की सुनवाई पर टिकी हैं। सवाल यह है कि नाबालिग से जुड़े मामले में वीडियो और प्रेस नोट सार्वजनिक करने की परिस्थितियों पर संबंधित पक्ष न्यायालय के सामने क्या जवाब देते हैं और इस मामले में आगे क्या कानूनी रुख सामने आता है।
नाबालिग की पहचान और निजता की सुरक्षा कानून का महत्वपूर्ण हिस्सा है। ऐसे मामलों में पुलिस और मीडिया की जिम्मेदारी भी कानूनी कसौटी पर परखी जाती है।
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