Saturday 31st of October 2026

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नाका-जनौरा में मकान ध्वस्तीकरण का मामला हो या मीरा मांझी की बदहाली, पवन पांडेय के हस्तक्षेप के बाद हरकत में आया सत्ता

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पूर्व मंत्री पवन बने BJP और जिला प्रशासन की चुनौती!हर मुद्दे पर विपक्ष : नाका-जनौरा में मकान ध्वस्तीकरण का मामला हो या मीरा मांझी की बदहाली, पवन पांडेय के हस्तक्षेप के बाद हरकत में आया सत्ता

पूर्व मंत्री पवन बने BJP और जिला प्रशासन की चुनौती! हर मुद्दे पर विपक्ष को मिल रहा सियासी स्पेस

नाका-जनौरा में मकान ध्वस्तीकरण का मामला हो या मीरा मांझी की बदहाली, पवन पांडेय के हस्तक्षेप के बाद हरकत में आया सत्ता पक्ष और प्रशासन; दो घटनाओं ने बढ़ाई सियासी हलचल

अयोध्या। समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री तेजनारायण पांडेय ‘पवन’ इन दिनों अयोध्या में भाजपा और जिला प्रशासन के लिए सियासी चुनौती बनते नजर आ रहे हैं। उनकी चुनौती की खासियत यह है कि वह जिन मुद्दों को उठाते हैं, उन पर सत्ता पक्ष और प्रशासन को भी सामने आकर अपना पक्ष रखना पड़ता है। विपक्ष की असली ताकत भी यही है कि वह जनता से जुड़े सवालों को इस तरह उठाए कि सरकार और प्रशासन जवाब देने के लिए मजबूर हों।

इसे पवन पांडेय का महिमामंडन कहकर खारिज किया जा सकता है, लेकिन बीते एक महीने की दो घटनाएं इस राजनीतिक तस्वीर को समझने के लिए काफी हैं। दोनों ही मामलों में पहले पवन ने हस्तक्षेप किया और उसके बाद भाजपा के जनप्रतिनिधियों से लेकर जिला प्रशासन तक सक्रिय नजर आया।

पहला मामला: नाका-जनौरा में बुलडोजर कार्रवाई और मुआवजे का सवाल

14 कोसी परिक्रमा मार्ग के नाका-जनौरा क्षेत्र में नजूल भूमि पर बने मकानों के ध्वस्तीकरण की कार्रवाई के बाद भाजपा नेता मुरारी यादव समेत कई प्रभावित परिवारों का मामला गरमा गया। पवन पांडेय मौके पर पहुंचे और प्रभावितों की बात सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव से कराई। इस हस्तक्षेप ने मामले को राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर नई धार दे दी।

इसके अगले ही दिन विधायक वेद प्रकाश गुप्त को जिलाधिकारी शशांक त्रिपाठी के साथ प्रभावित परिवारों की बैठक करनी पड़ी। विधायक के हस्तक्षेप के बाद महज 48 घंटे के भीतर लोक निर्माण विभाग के निर्माण खंड-3 ने प्रभावितों को मिलने वाले मुआवजे का आकलन कर दिया। उल्लेखनीय है कि यही निर्माण खंड 14 कोसी परिक्रमा मार्ग की कार्यदायी संस्था है। इसके बाद जिला प्रशासन ने सूचना विभाग के माध्यम से मुआवजे की धनराशि से संबंधित विज्ञप्ति भी मीडिया को जारी कराई।

दूसरा मामला: मीरा मांझी की बदहाली और भाजपा का जवाब

दूसरा मामला अयोध्या की मीरा मांझी का है। 30 अक्टूबर 2023 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ उज्ज्वला योजना की लाभार्थी मीरा मांझी के घर चाय पीने पहुंचे थे। उस समय उनका परिवार सरकारी योजनाओं के लाभार्थी के रूप में चर्चा में आया था।

लेकिन हाल में जब बैंक के कर्ज की अदायगी का दबाव बढ़ने और आर्थिक परेशानियों की बात सामने आई तो पूर्व मंत्री पवन पांडेय सबसे पहले उनके घर पहुंचने वालों में शामिल रहे। उन्होंने 50 हजार रुपये की नकद आर्थिक सहायता दी और बैंक के कर्ज का सेटलमेंट कराकर उसकी धनराशि जमा कराने का आश्वासन भी दिया।

पवन पांडेय के पहुंचने के बाद महापौर महंत गिरीशपति त्रिपाठी भी मीरा मांझी के घर पहुंचे। उन्होंने 60 हजार रुपये की आर्थिक सहायता दी और मीडिया के सामने सरकारी योजनाओं के तहत परिवार को मिले लाभ का ब्यौरा भी रखा। इसके बाद जिला प्रशासन ने भी सूचना विभाग के माध्यम से विज्ञप्ति जारी कर मीरा मांझी को विभिन्न सरकारी योजनाओं से मिले लाभ की जानकारी सार्वजनिक की।

सवाल सिर्फ दो घटनाओं का नहीं, विपक्ष की सक्रियता का है

इन दोनों घटनाओं में एक समानता साफ दिखाई देती है। जनता से जुड़े मुद्दे पर पवन पांडेय ने पहल की, प्रभावितों के बीच पहुंचे और उनकी बात को राजनीतिक मंच तक पहुंचाया। इसके बाद भाजपा के जनप्रतिनिधियों और जिला प्रशासन को भी सक्रिय होकर जवाब देना पड़ा।

राजनीति में विपक्ष की भूमिका केवल सरकार की आलोचना करना नहीं, बल्कि जनता की समस्याओं को सत्ता के सामने मजबूती से रखना भी है। नाका-जनौरा के प्रभावित परिवार हों या मीरा मांझी का आर्थिक संकट, इन मामलों ने यह जरूर दिखाया है कि अयोध्या में पवन पांडेय विपक्ष की सक्रियता के जरिए सत्ता पक्ष को जवाब देने की स्थिति में ला रहे हैं।

यही वजह है कि अब अयोध्या की सियासत में सवाल केवल यह नहीं है कि पवन पांडेय कौन-सा मुद्दा उठा रहे हैं, बल्कि यह भी है कि उनके उठाए सवालों पर भाजपा और प्रशासन को कितनी तेजी से मैदान में उतरना पड़ रहा है।

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