मित्रता में त्याग और समर्पण होना चाहिए: आशीष : हनुमान बाग मंदिर के पीठाधीश्वर श्रीमहंत जगदीश दास महाराज के सानिध्य में चल रहें श्रीमद् भागवत कथा में उमड़ा भक्तों का
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Thu, Oct 1, 2026
मित्रता में त्याग और समर्पण होना चाहिए: आशीष
हनुमान बाग मंदिर के पीठाधीश्वर श्रीमहंत जगदीश दास महाराज के सानिध्य में चल रहें श्रीमद् भागवत कथा में उमड़ा भक्तों का भारी हुजूम
अयोध्या। रामनगरी को संतो की सराह भी कही जाती है यहां अनेक भजनानंदी संत हुये है जिनकी त्याग तपस्या साधना उच्च कोटि की रही। ऐसे ही प्रसिद्ध पीठ श्री हनुमान बाग मंदिर में इन दिनों राजस्थान के भक्तों द्धारा आयोजित श्रीमद् भागवत कथा महोत्सव की अमृत वर्षा हो रही है। जिसमें व्यासपीठ से भागवत कथा की अमृत वर्षा राजस्थान के प्रख्यात कथावाचक आशीष जी कर रहे है। यह महोत्सव मंदिर के श्रीमहंत जगदीश दास जी महाराज के पावन सानिध्य में चल रहा है। कथा के छटवें दिवस पर कथा में सुदामा व परमात्मा श्री कृष्ण की मित्रता की कथा सुनाते हुए कथा व्यास आशीषजी ने कहा कि यदि मित्रता करना सीखना है तो हमें सुदामा की त्याग और परमात्मा के समर्पण की कथा अवश्य सुनना चाहिए। मित्रता निस्वार्थ व निष्काम भाव से करना चाहिए। मित्रता में जहां स्वार्थ आता है वहां मित्रता मित्रता नहीं रह जाती। बल्कि एक स्वार्थ से परिपूर्ण संबंध बन करके रह जाता है। उन्होंने कहा कि मित्रता में त्याग और समर्पण अत्यधिक आवश्यक है एक तरफ जहां सुदामा अत्यंत गरीब होते हुए भी परमात्मा श्री कृष्ण से स्वार्थ नहीं रखता है जबकि सुदामा परमात्मा श्री कृष्ण का बालसखा है। वहीं दूसरी ओर परमात्मा श्री कृष्ण जब सुदामा जी को अपने पास आया हुआ देखते हैं तो मित्र को किसी भी प्रकार की ग्लानि न हो यह ध्यान रखते हुए सुदामा के दिए हुए चावल अत्यंत प्रेम के साथ खाते हैं और अपना सर्वस्व सुदामा के लिए समर्पित कर देते हैं। कथा वाचक ने कहा कि जहां पर त्याग और समर्पण की भावना है मित्रता वही है और मित्रता का असली स्वरूप भी यही है। व्यासपीठ का पूजन आयोजकों ने किया। महोत्सव में राजस्थान से 500 भक्त अयोध्या आयें हुए है।महोत्सव की देखरेख पुजारी योगेंद्र दास, मंदिर के अधिकारी सुनील दास, रोहित शास्त्री, नितेश शास्त्री कर रहे है। कार्यक्रम में मुख्य रुप से जितेंद्र झालानी नवल किशोर झालानी सहित बड़ी संख्या में भक्त मौजूद रहें।
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