उडुपी के सामने पार्किंग का खेल, रामपथ पर जाम से रामभक्त परेशान : पार्किंग की व्यवस्था नहीं तो नक्शा कैसे पास हुआ? सड़क पर खड़ी गाड़ियों ने खड़े किए बड़े सवाल,नगर निगम और विकास प्राधिकरण
Nitish Shrivastava
Sat, Sep 26, 2026
उडुपी के सामने पार्किंग का खेल, रामपथ पर जाम से रामभक्त परेशान
पार्किंग की व्यवस्था नहीं तो नक्शा कैसे पास हुआ? सड़क पर खड़ी गाड़ियों ने खड़े किए बड़े सवाल, नगर निगम और विकास प्राधिकरण की कार्यप्रणाली पर उठ रही उंगली
अयोध्या। रामनगरी में विकास और व्यवस्थाओं के बड़े-बड़े दावों के बीच रामपथ पर खड़ी गाड़ियां एक अलग ही तस्वीर दिखा रही हैं। शहर के प्रमुख प्रतिष्ठानों में शुमार उडुपी रेस्टोरेंट के आसपास पार्किंग व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं। रेस्टोरेंट और उससे जुड़े प्रतिष्ठानों के सामने सड़क किनारे वाहनों की कतार लगने से राहगीरों और रामभक्तों को आवागमन में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। कई बार वाहनों के सड़क पर खड़े होने से यातायात प्रभावित होने की स्थिति बनती है।
सबसे बड़ा सवाल यही है—अगर प्रतिष्ठान में पर्याप्त पार्किंग की व्यवस्था नहीं है तो मानचित्र स्वीकृत कैसे हुआ? और यदि मानचित्र में पार्किंग का प्रावधान किया गया है, तो मौके पर वह व्यवस्था दिखाई क्यों नहीं देती?
नाम बड़ा है, प्रतिष्ठान बड़ा है, कारोबार बड़ा है... लेकिन पार्किंग का सवाल उससे भी बड़ा हो गया है।
रेस्टोरेंट में भोजन करने आने वाले ग्राहक हों या कमरों में ठहरने वाले लोग, उनके वाहन आखिर कहां खड़े होंगे? क्या मुख्य सड़क और रामपथ के किनारे वाहन खड़ा करना ही पार्किंग का विकल्प बन गया है?
छोटे पर कार्रवाई, बड़े पर सवाल क्यों?
अयोध्या में सड़क और फुटपाथ पर अतिक्रमण करने वाले छोटे दुकानदारों के खिलाफ समय-समय पर कार्रवाई होती रही है। ठेला सड़क पर खड़ा हो या दुकान का सामान बाहर निकला हो, जिम्मेदार विभाग कार्रवाई का हवाला देते हैं।
लेकिन सवाल यह है कि जब बड़े व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के सामने सड़क पर वाहनों की कतार लगती है, तब जिम्मेदार विभागों की निगरानी व्यवस्था कहां चली जाती है?
उडुपी, उडुपी एक्सप्रेस और उडुपी टू मुंबई के आसपास खड़े वाहनों की तस्वीरें इस पूरी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर रही हैं। यदि सड़क पर लगातार वाहन खड़े होने से यातायात प्रभावित हो रहा है, तो इस स्थिति की जिम्मेदारी आखिर किसकी है?
एडीए से सीधा सवाल—नक्शे में क्या है पार्किंग?
मामला केवल यातायात का नहीं, बल्कि मानचित्र स्वीकृति और पार्किंग प्रावधानों की जांच से भी जुड़ा है। अयोध्या विकास प्राधिकरण को स्पष्ट करना चाहिए कि संबंधित प्रतिष्ठानों के स्वीकृत मानचित्र में पार्किंग के लिए कितनी जगह निर्धारित है और मौके पर उसका कितना पालन हो रहा है।
यदि पार्किंग का प्रावधान है तो उसकी स्थिति सार्वजनिक होनी चाहिए और यदि मौके पर मानचित्र के अनुरूप व्यवस्था नहीं है तो जिम्मेदारों पर कार्रवाई क्यों नहीं?
इसी तरह नगर निगम और यातायात विभाग को भी यह स्पष्ट करना होगा कि रामपथ पर वाहनों की पार्किंग को लेकर क्या व्यवस्था है और सड़क पर खड़े वाहनों के कारण यातायात प्रभावित होने पर कौन जिम्मेदार है?
रामभक्त सड़क पर, गाड़ियां पार्किंग में क्यों?
अयोध्या में देश-दुनिया से श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। रामपथ शहर की महत्वपूर्ण सड़कों में शामिल है। ऐसे में यदि किसी प्रतिष्ठान की पार्किंग व्यवस्था का भार सड़क पर आ जाता है तो इसका सीधा असर आम राहगीर और श्रद्धालुओं पर पड़ता है।
सवाल बेहद सीधा है—
पार्किंग है नहीं तो नक्शा कैसे पास हुआ?
नक्शे में पार्किंग है तो मौके पर दिखाई क्यों नहीं देती?
सड़क पर गाड़ियां खड़ी हैं तो कार्रवाई क्यों नहीं होती?
और यदि सब कुछ नियमों के मुताबिक है तो फिर रामपथ पर जाम की स्थिति क्यों बनती है?
अब जरूरत आरोप-प्रत्यारोप की नहीं, बल्कि मौके की निष्पक्ष जांच और जिम्मेदार विभागों की स्पष्ट जवाबदेही की है। अयोध्या विकास प्राधिकरण, नगर निगम और यातायात विभाग को मौके का निरीक्षण कर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।
क्योंकि सवाल सिर्फ एक रेस्टोरेंट का नहीं है—सवाल रामनगरी की सड़क, यातायात व्यवस्था और नियमों के समान अनुपालन का है।
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