Saturday 26th of September 2026

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भागवत कथा सुनने से जागृत होती है भक्ति और चैतन्यता : आशीष जी : हनुमान बाग मंदिर में सात दिवसीय कथा महोत्सव, श्रीमहंत जगदीश दास महाराज की अध्यक्षता में जुटे राजस्थान के श्रद्धालु

भागवत कथा सुनने से जागृत होती है भक्ति और चैतन्यता : आशीष जी

हनुमान बाग मंदिर में सात दिवसीय कथा महोत्सव, श्रीमहंत जगदीश दास महाराज की अध्यक्षता में जुटे राजस्थान के श्रद्धालु

अयोध्या। रामनगरी के प्रसिद्ध पीठों में शुमार श्री हनुमान बाग मंदिर में श्रीमद्भागवत कथा महोत्सव राजस्थान के भक्तों द्धारा हो रही है। जिसमें कथा व्यास राजस्थान के प्रख्यात कथावाचक आशीष जी है। कथा का शुभारंभ आज समारोह पूर्वक किया गया। यह महोत्सव मंदिर के पीठाधीश्वर श्री महंत जगदीश दास महाराज के पावन अध्यक्षता में हो रहा है। कथा के प्रथम दिवस आशीष जी ने कहा कि जन्मांतरे यदा पुण्यं तदा भागवतं लभेत! अर्थात जन्म-जन्मांतर एवं युग-युगांतर में जब पुण्य का उदय होता है तब जीवमात्र को ऐसे सुअवसर प्राप्त होते है। उन्होंने कहा कि श्रीमद्भागवत कथा सुनने मात्र से ही कट जाते हैं सारे पाप। व्यासपीठ से कथा का महत्व समझाते हुए आशीष जी ने कहा कि श्रीमद्भागवत कथा एक अमर कथा है। इसे सुनने से पापी से पापी व्यक्ति भी पाप से मुक्त हो जाता है। महाराज श्री ने प्रथम दिवस पर श्रीमद्भागवत कथा का महात्म्य बताते हुए कहा कि वेदों का सार युगों-युगों से मानव जाति तक पहुंचता रहा है। भागवत महापुराण यह उसी सनातन ज्ञान की पयस्विनी है जो वेदों से प्रवाहित होती चली आ रही है। इसीलिए भागवत महापुराण को वेदों का सार कहा गया है। उन्होंने श्रीमद् भागवत महापुराण की व्याख्या करते हुए बताया कि श्रीमद् भागवत अर्थात जो श्री से युक्त है, श्री अर्थात चैतन्य, सौंदर्य, ऐश्वर्या, भागवत: प्रोक्तम् इति भागवत भाव कि वो वाणी, जो कथा जो हमारे जड़वत जीवन में चैतन्यता का संचार करती है। जो हमारे जीवन को सुंदर बनाती है वो श्रीमद्भागवत कथा जो सिर्फ मृत्युलोक में ही संभव है। और साथ ही यह एक ऐसी अमृत कथा है जो देवताओं के लिए भी दुर्लभ है इसलिए परीक्षित ने स्वर्ग अमृत के बजाए कथामृत का वरण किया किस स्वर्गामृत का पान करने से पुन्यों का क्षय होता है पापों का नहीं। कितु कथा अमृत का पान करने से संपूर्ण पापों का नाश होता है।कथा के दौरान उन्होंने अयोध्या धाम का अर्थ बताते हुए कहा कि अयोध्या धाम इंसान का मन है। कभी-कभी इंसान के मन में भक्ति जागृत होती है। परंतु वह जागृति स्थाई नहीं होती। इसका कारण यह है कि हम ईश्वर की भक्ति तो करते हैं पर हमारे अंदर वैराग्य व प्रेम नहीं होता है। इसलिए अयोध्या धाम में जाकर भक्ति देवी तो तरुणी हो गई पर उसके पुत्र ज्ञान और वैराग्य अचेत और निर्बल पड़े रहते हैं। महोत्सव में राजस्थान से 500 भक्त अयोध्या आयें हुए है।महोत्सव की देखरेख पुजारी योगेंद्र दास, मंदिर के अधिकारी सुनील दास, रोहित शास्त्री, नितेश शास्त्री कर रहे है। कार्यक्रम में मुख्य रुप से जितेंद्र झालानी नवल किशोर झालानी सहित बड़ी संख्या में भक्त मौजूद रहें।

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