रामायण की गाथा का संगम बनेगा अयोध्या का दीपोत्सव : पहली बार‘सोलह शृंगार’के साथ निकलेगी रामलीला शोभायात्रा दसवें दीपोत्सव पर साकेत महाविद्यालय से निकलेंगी 21 भव्य झांकियां
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Sat, Oct 31, 2026
रामायण की गाथा का संगम बनेगा अयोध्या का दीपोत्सव
पहली बार ‘सोलह शृंगार’ के साथ निकलेगी रामलीला शोभायात्रा
दसवें दीपोत्सव पर साकेत महाविद्यालय से निकलेंगी 21 भव्य झांकियां
हरियाणा का फाग, केरल का कथककली, राजस्थान का झूमर और पंजाब का भांगड़ा होंगे विशेष आकर्षण
अयोध्या। रामनगरी अयोध्या की सांस्कृतिक विरासत को वैश्विक पहचान दिलाने और विकास की नई गाथा लिखने का प्रयास दीपोत्सव में भी दिखाई देगा। दसवें दीपोत्सव पर रामनगरी में परंपरा, संस्कृति और विकास का अनूठा संगम देखने को मिलेगा। इस बार दीपोत्सव की शोभायात्रा पहली बार रामलीला के ‘सोलह शृंगार’ के साथ निकाली जाएगी। साकेत महाविद्यालय से निकलने वाली 21 भव्य झांकियों के माध्यम से योगी सरकार की उपलब्धियों और रामायण के सातों कांडों को प्रदर्शित किया जाएगा। सूचना विभाग की ओर से सरकार की उपलब्धियों पर आधारित 14 झांकियां निकाली जाएंगी, जबकि पर्यटन एवं संस्कृति विभाग की ओर से रामायण के सातों कांडों पर आधारित झांकियां तैयार की जा रही हैं। साकेत महाविद्यालय परिसर में झांकियों के निर्माण का कार्य शुरू हो चुका है। इस बार पहली बार अयोध्या की 16 टीमें रामलीला के विभिन्न प्रसंगों को शोभायात्रा के रूप में प्रस्तुत करती नजर आएंगी। इनके साथ देश के विभिन्न राज्यों की लोक कलाएं और नृत्य भी रामपथ की रौनक बढ़ाएंगे। हरियाणा का फाग और केरल का कथककली आयोजन के विशेष आकर्षण होंगे।
दीपोत्सव में योगी सरकार की विकास यात्रा को जन-जन तक पहुंचाने के उद्देश्य से सूचना विभाग 14 आकर्षक झांकियां निकालेगा। इनमें उत्तर प्रदेश में बुनियादी ढांचे, शिक्षा, स्वास्थ्य, पर्यटन और सांस्कृतिक विकास के क्षेत्रों में हुए कार्यों को रचनात्मक ढंग से प्रस्तुत किया जाएगा। दूसरी ओर, पर्यटन एवं संस्कृति विभाग रामायण के सातों कांडों- बालकांड, अयोध्याकांड, अरण्यकांड, किष्किन्धाकांड, सुंदरकांड, लंकाकांड और उत्तरकांड पर आधारित झांकियां तैयार कर रहा है। इन झांकियों को आकर्षक और तकनीकी रूप से उन्नत बनाने का कार्य एक नामित कंपनी को सौंपा गया है। निर्माण कार्य शुरू हो चुका है और इन्हें दृश्यात्मक रूप से प्रभावशाली बनाया जा रहा है। अयोध्या अंतरराष्ट्रीय रामायण एवं वैदिक शोध संस्थान के सलाहकार एवं विशेष कार्याधिकारी आशुतोष द्विवेदी ने बताया कि इस बार दीपोत्सव में सांस्कृतिक विविधता का अनूठा संगम देखने को मिलेगा। देश के विभिन्न राज्यों की लोक कलाएं और नृत्य अयोध्या के रामपथ पर अपनी छटा बिखेरेंगे। दीपोत्सव में 14 प्रदेशों के साथ उत्तर प्रदेश की 11 टीमें लोक संस्कृति के रंग बिखेरेंगी। हरियाणा का फाग, केरल का कथककली, राजस्थान का झूमर, पंजाब का भांगड़ा, ओडिशा का संबलपुरी, गाजीपुर का डिबिया नृत्य तथा पश्चिम बंगाल और मध्य प्रदेश की लोक कलाएं आयोजन के मुख्य आकर्षण होंगे। लगभग 650 से अधिक कलाकार अपनी रंगारंग प्रस्तुतियों से दर्शकों का मन मोह लेंगे। उन्होंने बताया कि पहली बार अयोध्या की 16 टीमों की रामलीला भी शोभायात्रा के रूप में निकलेगी, जिसमें ‘सोलह शृंगार’ की परंपरा को विशेष रूप से दर्शाया जाएगा। इससे रामलीला की पारंपरिक प्रस्तुति को शोभायात्रा के माध्यम से एक नया स्वरूप मिलेगा। जिला सूचना अधिकारी अनुराग रंजन ने बताया कि दीपोत्सव की झांकियों में जल जीवन मिशन, एक जनपद एक उत्पाद (ओडीओपी), कृषि एवं पशुपालन, आयुष्मान कैशलेस योजना, स्वच्छ एवं हरित उत्तर प्रदेश, विकसित भारत, उत्तर प्रदेश पुलिस की सुरक्षा व्यवस्था, मिशन शक्ति, प्रधानमंत्री आवास योजना, पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना, आत्मनिर्भर नारी, अयोध्या दीपोत्सव, बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ और उत्तर प्रदेश डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर के माध्यम से कराए गए विकास कार्यों की झलक दिखाई देगी। इन झांकियों के जरिए प्रदेश की प्रगति, समृद्धि और सरकार की विकासपरक योजनाओं को प्रदर्शित किया जाएगा। सूचना विभाग की झांकियां विशेष रूप से योगी सरकार के कार्यकाल में हुए बुनियादी परिवर्तनों पर केंद्रित रहेंगी। इनमें सड़क, बिजली, पानी और स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार, शिक्षा व्यवस्था में सुधार, पर्यटन स्थलों के विकास और सांस्कृतिक धरोहर के संरक्षण को प्रमुखता दी जाएगी। वहीं, संस्कृति विभाग की झांकियां रामायण के प्रत्येक कांड की कथा को दृश्य रूप में प्रस्तुत करेंगी, जिससे दर्शक बालकांड से लेकर उत्तरकांड तक की संपूर्ण गाथा को एक क्रम में देख सकेंगे। इस बार झांकियों के निर्माण में आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है, ताकि वे रात के समय भी आकर्षक नजर आएं और दीपों की रोशनी में उनकी भव्यता और निखरे। अयोध्या का दीपोत्सव अब केवल स्थानीय आयोजन नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश की सांस्कृतिक शक्ति, धार्मिक विरासत और विकास मॉडल को देश-दुनिया के सामने प्रस्तुत करने का महत्वपूर्ण मंच बन चुका है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विजन के अनुरूप इस वर्ष की शोभायात्रा में रामलीला की परंपरा को नई ऊंचाई देने के साथ प्रदेश सरकार की उपलब्धियों को जनमानस तक पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है।
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