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: गुरुओं का संघर्ष शौर्य-शहादत की मिसाल से परिपूर्ण है: ज्ञानी गुरुजीत सिंह

बमबम यादव

Sat, Dec 7, 2024
गुरुओं का संघर्ष शौर्य-शहादत की मिसाल से परिपूर्ण है: ज्ञानी गुरुजीत सिंह
मानवता के महान दूत और बलिदानियों के सिरमौर नवम सिख गुरु तेगबहादुर महाराज का 349वां बलिदान दिवस ऐतिहासिक गुरुद्वारा ब्रह्मकुंड अयोध्या में निष्ठापूर्वक मनाया गया
अयोध्या। मानवता के महान दूत और बलिदानियों के सिरमौर नवम सिख गुरु तेगबहादुर महाराज का 349वां बलिदान दिवस ऐतिहासिक गुरुद्वारा ब्रह्मकुंड अयोध्या में निष्ठापूर्वक मनाया गया। इस अवसर पर गुरु के अप्रतिम अवदान का विमर्श छिड़ा। ब्रह्मकुंड गुरूद्वारा के मुख्यग्रंथी ज्ञानी गुरुजीत सिंह ने बताया कि गुरु तेग बहादुर साहब तिलक एवं जनेऊ के लिए बलिदान दिए थे। शुक्रवार को उनका बलिदान दिवस मर्यादा पुरुषोत्तम प्रभु श्रीराम की नगरी अयोध्याधाम स्थित ऐतिहासिक ब्रह्मकुंड गुरुद्वारा में मनाया गया है, जिसमें अयोध्या के संत महंत भी सम्मिलित हुए और गुरु तेगबहादुर के बलिदान दिवस पर श्रद्धांजलि अर्पित कर भावरूपी अनुराग व्यक्त किया। उन्होंने बताया कि जब देश पर मुगलों का आक्रमण हुआ करता । तब-तब गुरु ने रक्षा के लिए तलवार उठाई। मुगलों द्वारा तोड़े गए श्रीराम मंदिर पर पुनः भव्य निर्माण हाे गया है, जिससे पूरा समाज खुशी से झूम रहा है। 22 जनवरी को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राममंदिर की प्राण प्रतिष्ठा किया। हम सभी मंदिर निर्माण से गदगद हैं। इस माैके पर दर्जनों संत-महंतों ने  उपस्थित होकर के गुरु तेग बहादुर के व्यक्तित्व पर प्रकाश डाला। इससे पूर्व गुरुग्रंथ साहब के 101 अखंड पाठ की लड़ी का समापन किया गया। कार्यक्रम का समापन लंगर से हुआ, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया।बलिदान दिवस के कार्यक्रम को यादगार बनाने वालों में गुरुद्वारा प्रबंधन से जुड़े अधिवक्ता कुलवीर सिंह, सुरजीत सिंह, चरनजीत सिंह आदि प्रमुख रहे। इस अवसर पर मणिरामदास छावनी के उत्तराधिकारी महंत कमलनयन दास, एसएसपी राजकरण नैय्यर, कथावाचक हरमिंदर सिंह अंबाला, भाई प्रीतम सिंह, भाई प्रदीप सिंह, भाई महेंद्र सिंह, सिमरनजीत कौर, भाजपा नेता अभिषेक मिश्रा आदि माैजूद थे। वहीं ब्रह्मकुंड गुरुद्वारा के महंत बलजीत सिंह ने बताया कि गुरु जी के बलिदान दिवस पर संगत का आयोजन किया गया। जिसमें अयोध्या, लखनऊ, नवाबगंज, फैजाबाद, गोंडा, सुल्तानपुर, अकबरपुर सहित अन्य जिलों के संगत के लोग अयोध्या पहुंचे, गुरु जी को नमन किया। उन्होंने बताया कि गुरु मानवता के उन्नायक रहे हैं। नवम गुरु के बलिदान से इस दिशा में गुरुओं के प्रयास का चरम परिलक्षित है। उन्होंने कहा, गुरु का स्पष्ट सूत्र था कि न जुल्म करेंगे और न जुल्म सहेंगे। गुरुओं का संघर्ष शौर्य-शहादत की मिसाल से परिपूर्ण है। सदियों तक यह प्रतीत होता रहा कि गुरु व उनके अनुयायी जिस सनातन धारा की अस्मिता के लिए सर्वस्व न्योछावर करते रहे। उसके हिस्से संघर्ष ही संघर्ष है, पर आज वे मूल्य और आदर्श प्रतिष्ठापित हो रहे हैं, जिनकी अखंडता-अक्षुण्णता के लिए गुरुओं ने जान की बाजी लगाने की परंपरा विकसित की।

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