खेतों में प्लॉटिंग का खेल!कार्रवाई के दावों के बीच कौन काट रहा अयोध्या : सरेठी-कुशमाहा समेत कई गांवों में बेखौफ अवैध प्लाटिंग!“अयोध्या में खेत बने प्लॉटिंग का मैदान, नियमों को ठेंगा!”
admin
Tue, Oct 6, 2026
“खेतों में प्लॉटिंग का खेल! कार्रवाई के दावों के बीच कौन काट रहा अयोध्या?”
सरेठी-कुशमाहा समेत कई गांवों में बेखौफ अवैध प्लाटिंग!
कार्रवाई के दावों के बीच खेतों में कट रहे धड़ाधड़ प्लॉट, कच्ची सड़कें और सीमांकन से सज रही जमीन—खरीदारों की गाढ़ी कमाई पर मंडरा रहा खतरा
“अयोध्या में खेत बने प्लॉटिंग का मैदान, नियमों को ठेंगा!”
अयोध्या। रामनगरी में योजनाबद्ध विकास के बड़े-बड़े दावों के बीच गांवों की कृषि भूमि पर कथित अवैध प्लाटिंग का खेल तेजी से पैर पसारता नजर आ रहा है। सरेठी, कुशमाहा, शिवदासपुर, रामदतपुर अटरावा, बैसिंग और ददेरा समेत कई इलाकों में खेतों को छोटे-छोटे टुकड़ों में बांटकर प्लॉटिंग किए जाने की शिकायतें सामने आ रही हैं। सवाल यह है कि जब अयोध्या विकास प्राधिकरण अवैध प्लाटिंग और अवैध निर्माण के खिलाफ लगातार कार्रवाई का दावा कर रहा है, तो आखिर इन इलाकों में यह खेल किसकी शह पर चल रहा है?
कृषि भूमि पर प्लॉट काटे जाने के साथ कहीं कच्ची सड़कें बनाई जा रही हैं तो कहीं जमीन का सीमांकन कर संभावित खरीदारों को आकर्षित किया जा रहा है। यदि संबंधित भूमि का भू-उपयोग परिवर्तन, ले-आउट स्वीकृति और अन्य जरूरी अनुमतियां नहीं ली गई हैं तो ऐसी प्लाटिंग में जमीन खरीदना लोगों के लिए भविष्य में भारी पड़ सकता है।
आज प्लॉट, कल पछतावा?
अवैध अथवा बिना स्वीकृत ले-आउट वाली कॉलोनियों में खरीदारों को बाद में नक्शा पास कराने, सड़क, नाली, बिजली, जलनिकासी और अन्य मूलभूत सुविधाओं के लिए जूझना पड़ सकता है। कई मामलों में निवेश की गई रकम फंसने के साथ जमीन के वैध उपयोग और निर्माण की अनुमति को लेकर भी विवाद खड़ा हो सकता है।
विकास की रफ्तार में अवैध प्लाटिंग का ब्रेक
अयोध्या में जिस तेजी से विकास परियोजनाएं आकार ले रही हैं, उसके बीच बेतरतीब प्लाटिंग भविष्य की शहरी व्यवस्था के लिए गंभीर चुनौती बन सकती है। बिना किसी समग्र योजना के काटे जा रहे प्लॉट आने वाले समय में सड़क, जलनिकासी, पार्किंग और सार्वजनिक सुविधाओं की व्यवस्था को प्रभावित कर सकते हैं।
बिना प्लानिंग की प्लाटिंग, शहर की प्लानिंग को कमजोर करती है।
इतना ही नहीं, यदि नियमों को दरकिनार कर जमीन की खरीद-फरोख्त हो रही है तो इससे सरकार को विकास शुल्क, मानचित्र स्वीकृति शुल्क और अन्य राजस्व का भी नुकसान हो सकता है।
अब बड़ा सवाल यही है कि इन गांवों में हो रही संदिग्ध प्लाटिंग की जमीनों का सत्यापन, ले-आउट की स्वीकृति, भू-उपयोग परिवर्तन और राजस्व अभिलेखों की जांच कब होगी? जिम्मेदार विभाग यदि समय रहते सक्रिय नहीं हुए तो आज खेतों में खिंची ये छोटी-छोटी सीमाएं कल अयोध्या के अनियोजित विस्तार की बड़ी समस्या बन सकती हैं।
जरूरत सिर्फ कार्रवाई के दावे की नहीं, बल्कि मौके पर उतरकर जांच और जिम्मेदार लोगों पर ठोस कार्रवाई की है।
Tags :
विज्ञापन
विज्ञापन