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: राम नाम की बड़ी अद्भुत महिमा है बस, जरूरत है श्रद्धा, विश्वास और भक्ति की: चिदम्बरानन्द

बमबम यादव

Sat, Jan 20, 2024

रामलला के प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव के पावन अवसर पर राम महल वैदिक भवन में हो रहा रामकथा

अयोध्या। रामनगरी में प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव का रंग चटक हो गया है। चहुंओर मंगल ध्वनियां बज रही है। मंदिर मंदिर आयोजन की लड़ी लगी हुई है। राम महल वैदिक भवन में प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव बड़े ही हाव भाव के साथ मनाया जा रहा है। मंदिर में राम कथा का दिव्य आयोजन किया गया है। तो दूसरी तरह सुबह से लेकर शाम तक विशाल अन्नक्षेत्र चल रहा है। रामकथा में व्यासपीठ से कथा का रसास्वादन ट्रस्ट, मुंबई के महामंडलेश्वर स्वामी चिदम्बरानन्द सरस्वती जी महाराज करा रहें है। कथा के आज चतुर्थ दिवस व्यासपीठ से कथा स्वामी चिदम्बरानन्दजी ने रामकथा का सार भगवान का नाम की महिमा पर व्याख्यान किया।उन्होंने कहा कि भगवान राम हमारे जीवन के प्रत्येक रंग में समाए हुए हैं। हमने पाश्चात्य सभ्यता को काफी हद तक अपनाया परंतु राम राम कहना नहीं छोड़ा। हम प्रतिदिन अच्छे बुरे अवसरों पर राम नाम ही लेते हैं। आज भी हम राम राम या जय रामजी की कहकर अभिवादन करते हैं। जीवन के अंतिम समय में बिछुड़ने पर राम-राम का ही उल्लेख होता है। समस्या के आने पर विपत्तियों से घिरने पर हे राम' अथवा अरे राम सहसा ही हमारे मुख से निकल पड़ता है। जीवन में प्रसन्नचित होने पर हम रामजी की कृपा के प्रति कृतज्ञता प्रकट करते हैं। उन्होंने कहा कि राम नाम की बड़ी अद्भुत महिमा है। बस, जरूरत है श्रद्धा, विश्वास और भक्ति की। राम नाम स्वयं ज्योति है, स्वयं मणि है। राम नाम के महामंत्र को जपने में किसी विधान या समय का बंधन नहीं है। राम का नाम जपने से हो जाता है मानव का कल्याण।

सरस्वती जी ने बताया कि राम से बड़ा राम का नाम है अर्थात राम मिले ना मिले लेकिन राम का नाम जपना मात्र ही मानव के कल्याण के लिए काफी है। उन्होंने कहा कि राम नाम में बहुत शक्ति है, क्योंकि राम का नाम वैसे तो केवल दो अक्षर का ही होता है परंतु इस दो अक्षर के नाम में संपूर्ण संसार का रहस्य छिपा है। इसलिए 2 अक्षर के इस प्यारे से नाम राम का जाप प्रत्येक प्राणी को करना चाहिए, क्योंकि राम नाम ही एक ऐसा मूल मंत्र है जिसका जाप करने से मनुष्य अपने सांसारिक दु:खों पीड़ा से मुक्ति पा सकता है और संसार रूपी भवसागर से पार उतर सकता है। महोत्सव का संयोजन वैदेही भवन पीठाधीश्वर महामंडलेश्वर महंत रामजीशरण महाराज कर रहेंकथा में मुम्बई समेत पूरे भारत से संत साधक शामिल हुए।

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