Sunday 5th of July 2026

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अयोध्या में भाजपा को एक कुर्मी लीडरशिप की तलाश : सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव के पीडीए में सेंध के लिए होने लगी जरूरत महसूस

अयोध्या में भाजपा को एक कुर्मी लीडरशिप की तलाश

सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव के पीडीए में सेंध के लिए होने लगी जरूरत महसूस

अयोध्या। भारतीय जनता पार्टी ने अयोध्या में कुर्मी बिरादरी में लीडरशिप की तलाश तेज कर दी है। अचानक पूर्व सांसद विनय कटिहार की राम मंदिर तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपतराय पर हमलावर होने के बाद पार्टी में इसकी अंदरूनी चर्चा तेज है। लंबे समय से भाजपा की राजनीति में हाशिए पर पड़े या कह लीजिए की वनवास झेल रहे विनय कटियार ने जिस तरह से चंपतराय पर हमला बोला है, उससे उनके सजातीय लोगों में जिले की राजनीति में लौटने की अटकलों को पंख लगे हैं। चंपतराय पर उनका ताजा हमला संयोग है या प्रयोग, यह तो आने वाला वक्त बताएगा। 2024 के लोकसभा चुनाव में जिस तरीके से थोक में कुर्मी बिरादरी अखिलेश की साइकिल पर सवार होकर भाजपा के कमल को अयोध्या में मुरझाया था, भारतीय जनता पार्टी अभी उसे भूली नहीं है। भले ही वह राम मंदिर निर्माण का देश भर में यशोगान करें, लेकिन वह जानती है कि अयोध्या में कुर्मी बिरादरी का एक बड़ा वोट बैंक उससे लुढ़क कर समाजवादी पार्टी में चला गया जो उसकी जीत का लोकसभा में बड़ा कारण बना। यह भी सच है कि समाजवादी पार्टी के लोकसभा प्रत्याशी अवधेश प्रसाद की जीत में उनके अपने सजातीय वोट बैंक की भी बड़ी भूमिका है। कुर्मी वोट बैंक का साइकिल पर सवार होना भी उतना ही सच है जितना अवधेश प्रसाद का सजातीय वोट बैंक अयोध्या से लेकर बाराबंकी के दरियाबाद विधानसभा क्षेत्र तक एक मुश्त समाजवादी पार्टी में चले जाना। वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा कुर्मी बिरादरी के किसी नेता को जिले की सियासत के केंद्र में लाना चाहती है जिससे समाजवादी पार्टी के पीडीए वोट बैंक को साइकिल पर सवार होने से रोका जा सके। पूर्व सांसद विनय कटियार के हालिया बयान से भाजपा में छिड़ी चर्चा के बीच यह भी मानना है कि गुजरात लाबी के पसंद नहीं है। ऐसे में जिले से ही किसी नेता को ढूंढ कर कुर्मी लीडरशिप के रूप में प्रोजेक्ट करना दिल्ली ज्यादा पसंद करेगा। पार्टी के कुछ नेता इसे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से विनय कटियार की बढ़ती नजदीकियों के रूप में भी देखने लगे हैं। देखने की वजह राम मंदिर के ध्वजारोहण कार्यक्रम में 25 नवंबर को मुख्यमंत्री व चंपतराय के बीच तल्ख संवाद की भी चर्चा है जिसकी पुष्टि नहीं होती। लेकिन चंपतराय पर इलेक्ट्रॉनिक मीडिया से कटियार के ताजा हमले को उसी से जोड़ा जाने लगा है। इसकी तस्वीर भी आने वाले दिनों में ही साफ होगी जिसके लिए अभी इंतजार करना होगा।

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